ईरान की हथियार प्रणालियों पर अमरीका का साइबर हमला

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अमरीका ने ईरान की हथियार प्रणालियों के ख़िलाफ़ साइबर हमले शुरू किए हैं. कुछ अमरीकी रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हवाई हमले नहीं करने के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के फ़ैसले के बाद ये कदम उठाया गया है.
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक रॉकेट और मिसाइल सिस्टम को नियंत्रित करने वाली कंप्यूटर प्रणालियों को निशाना बनाया गया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि तेल टैंकर पर हमले और इसके बाद एक अमरीकी हवाई ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ ये कदम उठाया है.
कहा जा रहा है कि ये साइबर हमले कई हफ्तों तक जारी रहेंगे. इसका उद्देश्य ईरान की उस हथियार प्रणाली को निशाना बनाना है जिसका इस्तेमाल इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प करता है. इन हमलों के बाद इस प्रणाली पर ऑनलाइन काम करना बंद हो जाएगा और इसका संचालन ऑफलाइन ही किया जा सकेगा.
हालांकि शनिवार को अमरीकी गृह सुरक्षा विभाग ने चेतावनी दी कि ईरान अमरीका के ख़िलाफ़ साइबर हमलों में तेज़ी ला रहा है.
इसके अलावा, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की है और कहा है कि ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे जब तक ईरान अपना रवैया नहीं बदलता.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हम कुछ और प्रतिबंध लगा रहे हैं. कुछ चीज़ों पर तो बहुत तेज़ी से."
ट्रंप का ये बयान तब आया है जब ईरान ने घोषणा की कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय सीमा से ज़्यादा बढ़ाएगा.
2015 के परमाणु समझौते के मुताबिक ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर सीमा तय की गई थी. इसके बदले ईरान पर कुछ प्रतिबंधों को हटा दिया गया था जैसे ईरान के तेल निर्यात को इजाज़त दे दी गई थी. तेल ही ईरान सरकार की आमदनी का मुख्य ज़रिया है.
अर्थव्यवस्था को झटका
लेकिन अमरीका ने खुद को इस समझौते से बाहर कर लिया और प्रतिबंध फिर से लगा दिए. इससे ईरान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होने लगी, यहां तक की उसकी मुद्रा में भी रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई और विदेशी निवेशक अपने हाथ खींचने लगे.

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ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान एक समृद्ध देश बनना चाहता है तो मुझे कोई एतराज़ नहीं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाएगा अगर उनको लगता है कि पांच-छह साल में उनके पास परमाणु हथियार होंगे."
बाद में एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि सोमवार से ईरान पर अतिरिक्त बड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
बीबीसी के रक्षा मसलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस मानते हैं कि इस बढ़ते तनाव में कूटनीतिक राह मिलने पर अभी संशय हैं.
वो कहते हैं कि ट्रंप ईरान पर सैन्य ताकत शायद ही इस्तेमाल करें लेकिन वे आर्थिक प्रतिबंधों को कड़ा करने को लेकर अडिग हैं. इसी नीति ने दोनों देशों को युद्ध के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है.
ईरान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है और वो उस परमाणु करार की कुछ शर्तों को तोड़ने की धमकी दे रहा है जो उसने बाकी देशों के साथ किया था.

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ट्रंप ईरान के साथ समझौता करने की बात भी कर रहे हैं. इस महीने की शुरुआत में विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बिना शर्त करने की बात भी कही अगर ईरान एक सामान्य देश की तरह बर्ताव करे तो.
लेकिन ईरान ने इस बयान को शब्दों का खेल भर कहा. वहीं, ट्रंप के ये नए प्रतिबंध तनाव को कम करने में कोई मदद नहीं करेंगे.
पिछले साल अमरीका ने ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिए और ख़ासकर ऊर्जा, शिपिंग और आर्थिक सेक्टर में लगाए गए प्रतिबंधों ने ईरान के विदेशी निवेश को काफ़ी नुकसान पहुंचाया और तेल का निर्यात भी प्रभावित हुआ.
इन प्रतिबंधों के अनुसार अमरीकी कंपनियां ईरान के साथ व्यापार नहीं कर सकती और साथ ही उन विदेशी कंपनियों के साथ भी जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं.
इसकी वजह से ईरान में आयातित माल का अभाव हो गया ख़ासकर विदेशी कच्चे माल से बने उत्पादों का.
ईरान की मुद्रा रियाल के गिरने से ईरान में मीट और अंडे की कीमत भी काफ़ी उछाल आया और मंहगाई बढ़ी.

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ईरान ने भी इस आर्थिक दबाव का जवाब परमाणु करार की कुछ शर्तों का उल्लंघन करके दिया है. उसने यूरोपीय देशों पर भी आरोप लगाया कि उन देशों ने अमरीका के प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था को ना बचा कर अपना वादा तोड़ा है.
ट्रंप की ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा ऐसे वक्त आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.
गुरूवार को खाड़ी में एक अमरीकी ड्रोन को ईरान के सैन्य बलों ने मार गिराया.
ईरान की स्पेशल फोर्स इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स ने कहा कि ड्रोन को मार गिराना अमरीका को स्पष्ट संदेश है कि ईरान की सीमा उनकी लाल रेखा है.
लेकिन अमरीका के सैन्य अधिकारी कह रहे हैं कि ड्रोन गिराए जाने के वक्त अंतरराष्ट्रीय सीमा में स्ट्रेट ऑफ़ होरमज़ के ऊपर था.
ईरान की स्पेशल फोर्स के उच्च अधिकारी आमिर अली हजीज़ादेह ने कहा कि ड्रोन के करीब एक मिलिट्री जहाज़ भी उड़ रहा था जिसमें 35 यात्री थे.
उन्होंने कहा, "हम चाहते तो उसे भी गिरा सकते थे लेकिन हमने ऐसा नहीं किया."
लेकिन इस घटना से पहले अमरीका ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ़ होरमज़ के ठीक बाहर दो तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया था.
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