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क्या होगा जब मोदी-इमरान और विराट-सरफ़राज़ होंगे आमने-सामनेः वुसअत का ब्लॉग
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी के लिए
पाकिस्तान के लिए आज से शुरू होने वाला हफ़्ता बहुत तूफ़ानी है. कल यानी मंगलवार को पाकिस्तान अगला आर्थिक वर्ष का बजट पेश करने वाला है.
सभी का यहां ख़ून सूख रहा है यह सोच-सोच कर कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से अगले तीन साल के लिए ब्याज पर छह अरब डॉलर मिलने से पहले देश की अर्थव्यवस्था में आर्थिक संतुलन लाने के नाम पर कौन-कौन से टैक्स जनता पर लादे जाएंगे.
सेना ने भी ऐलान कर दिया है कि उसे नए बजट में कोई नया पैसा नहीं चाहिए, जितना पैसा मिल रहा है उतना अगले वर्ष के लिए भी काफ़ी होगा, यानी एक हज़ार एक करोड़ रुपये.
लेकिन जब सेना ने कमर बांध ली है तो व्यापारी, उद्योगपति, पूंजीपति और करोड़ों लोगों की क्या मजाल कि नए टैक्सों पर मुंह से सी... तक की आवाज़ भी निकाल सकें.
इसलिए आगामी बजट के इंतज़ार में हम सब दम साधे, सीट बेल्ट बांधे बैठे हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था की मौसम की ख़राबी के कारण आर्थिक उड़ान कम-से-कम अगले दो वर्ष के लिए बहुत ही झटकेदार होने वाली है, हो सके तो हमारे लिए दुआ कीजिएगा.
मंगलवार के बाद आएंगे गुरुवार और शुक्रवार, जब किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन की शिखर बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी भाग लेंगे.
अभी तक तो यही कहा जा रहा है कि मोदी जी का विमान एक विशेष अनुमति पत्र के साथ बिश्केक आते-जाते पाकिस्तान के ऊपर से गुज़रेगा.
पर इसका ये मतलब तो नहीं कि दोनों नाराज़ नहीं हैं. दोनों एक ही हॉल में बैठेंगे और ग्रुप फ़ोटो में भी होंगे पर एक-दूसरे से नहीं मिलेंगे.
दोनों बाक़ी सब नेताओं से मिलेंगे पर एक-दूसरे से नहीं मिलेंगे.
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दोनों नेताओं का यह बचपना बाक़ी नेता बहुत दिलचस्पी से देख कर मज़ा लेंगे. मगर ऐसा तो पहले भी हो चुका है कि नहीं मिलेंगी, नहीं मिलेंगे कहते हुए एक-दूसरे के सामने से गुज़रते हुए अचानक हाथ मिला लिए.
मीडिया ने बातें की, टिप्पणीकारों ने टिप्पणी की और बाद में मामला वही ढाक के तीन पात.
न मिलने से कोई लाभ, न ना मिलने से किसी का कोई नुक़सान.
इसके बाद आ जाएगा रविवार जब विश्व क्रिकेट कप में भारत और पाकिस्तान न चाहते हुए भी मैदान में एक-दूसरे के सामने खड़े होंगे.
पचास ओवर के मैच के दौरान भारत और पाकिस्तान के क़रीब 150 करोड़ लोग पागल होंगे और जो न जीता उसकी शामत और फिर ये हफ़्ता भी गुज़र जाएगा.
इसके बाद नए हफ़्ते में वही होगा जो सबकुछ होता आ रहा है. वाघा अटारी बॉर्डर गेट पर हवा को चीरती हुई और धरती को हिलाती सैनिकों की एड़ियां और हमारी गालियां, जय हिंद, पाकिस्तान ज़िंदाबाद होते रहेंगे.
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