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क्रिकेट विश्व कप 2019 में क्यों फेवरेट है पाकिस्तान क्रिकेट टीम?
- Author, अभिजीत श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने विश्व कप 2019 के लिए पाकिस्तान को फेवरेट टीम में से एक बताया है. इसके पीछे उन्होंने दलील दी है कि इंग्लैंड में विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहतर होता है.
गांगुली ने कहा कि पाकिस्तान की टीम ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे वनडे में 373 रनों का पीछा करते हुए 361 रन बना लिये और सिर्फ़ 12 रनों से मैच हारी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा इंग्लैंड में खेले जाने वाले वर्ल्ड टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करता है.
पाकिस्तान ने दो साल पहले इंग्लैंड में चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीता. पाकिस्तान की टीम ने साल 2009 में वर्ल्ड टी20 भी इंग्लैंड में ही जीती.
तो क्या वाकई पाकिस्तान की टीम विश्व कप 2019 की फेवरेट टीमों में से है?
इंग्लैंड की धरती पर वर्ल्ड कप में प्रदर्शन
आंकड़ों के लिहाज से इंग्लैंड में खेले गए विश्व कप टूर्नामेंट में जीत का सबसे जोरदार रिकॉर्ड वेस्टइंडीज टीम का रहा है.
1975 से 1999 तक चार वर्ल्ड कप में वेस्ट इंडीज दो बार चैंपियन रही तो 1983 में फ़ाइनल में हारी.
अब तक इंग्लैंड में वर्ल्ड कप के दौरान खेले गए 22 मुक़ाबलों में से कैरिबियाई टीम को 17 में जीत मिली जबकि केवल केवल चार में हार का सामना करना पड़ा और इनमें से भी तीन मैच तो 1999 वर्ल्ड कप के दौरान खेले गए थे.
प्रदर्शन के लिहाज से अपने घर में इंग्लैंड की टीम एक फ़ाइनल और दो सेमीफ़ाइनल का सफर तय करते हुए 21 मैचों में से 15 मुक़ाबला जीत चुकी है.
वहीं दक्षिण अफ़्रीकी टीम यहां केवल 1999 का वर्ल्ड कप खेली है. उसमें वो सेमीफ़ाइनल तक पहुंचे, जो टाई रहा था. टूर्नामेंट के दौरान खेले गए 8 मैचों में से उन्हें 5 में जीत और 2 में हार मिली थी.
ऑस्ट्रेलियाई टीम ने वर्ल्ड कप के दौरान इंग्लैंड में 23 मैच खेले हैं. उन्हें 13 में जीत जबकि 9 में हार का सामना करना पड़ा है.
यहां खेले गए चार टूर्नामेंट्स में से ऑस्ट्रेलिया एक बार (1999 में) विजेता रहा जबकि एक बार (1975 में) उसने फ़ाइनल तक का सफर तय किया.
भारत भी जीत चुका है विश्व कप
भारतीय टीम भी इंग्लैंड की धरती पर ही 1983 का विश्व कप जीती थी. अब तक इंग्लैंड की धरती पर वर्ल्ड कप में भारत ने 22 मैच खेले हैं. इनमें से 11 में जीत और इतने ही मैचों में हार का सामना करना पड़ा है.
इन आंकड़ों के लिहाज से भारत के प्रदर्शन को औसत कहा जा सकता है लेकिन यदि ऐसे देखें कि 1983 के वर्ल्ड कप से भारत ने 10 मैचों में जीत हासिल की है जबकि केवल 6 गंवाए हैं तो इसे अच्छे प्रदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए.
पाकिस्तान कैसे अलग है?
बाकी प्रमुख टीमों (न्यूज़ीलैंड, श्रीलंका और पाकिस्तान) की इंग्लैंड में खेले गए वर्ल्ड कप के दौरान जीत से अधिक हार हुई है. लेकिन इनमें से पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसी टीम है जो दो बार सेमीफ़ाइनल में तो एक बार फ़ाइनल में पहुंचने में कामयाब रही है.
साथ ही आईसीसी के दो टूर्नामेंट (चैंपियंस और टी20 वर्ल्ड) की विजेता भी रही है. यहां एक बात और महत्वपूर्ण है कि ये दोनों टूर्नामेंट मौजूदा कप्तान सरफ़राज़ अहमद के नेतृत्व में ही खेला गया था.
पाक टीम में युवाओं का दमखम
इमाम-उल-हक़, हसन अली, शादाब ख़ान और फखर ज़मान जैसे पाकिस्तान के कुछ नए खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं.
ये सभी युवा हैं. मैदान पर इनकी तेज़ी देखते ही बनती है. मध्यक्रम में सरफराज़ अहमद जैसा अनुभवी कप्तान, स्पिन और तेज़ गेंदबाजी को तहस-नहस करने की क्षमता रखने वाले विस्फोटक हैरिस सोहेल और अनुभवी शोएब मलिक हैं जो टीम को किसी भी परिस्थिति से उबार कर जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं.
पाकिस्तान के लिए इमाम-उल-हक़ और फखर ज़मां बल्लेबाज़ी की शुरुआत करते हैं. 23 वर्षीय इमाम-उल-हक़ वनडे में 60 की औसत से खेल रहे हैं.
औसत के लिहाज से यह पाकिस्तान के किसी भी क्रिकेटर का वनडे में सबसे अच्छा प्रदर्शन है. उन्होंने इंग्लैंड, दक्षिण अफ़्रीका, श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ बीते दो वर्षों के दौरान छह शतक बनाए हैं. मई के महीने में उन्होंने ब्रिस्टल के मैदान पर सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड तोड़ा है. इसी मैदान पर विश्व कप के दौरान पाकिस्तान को श्रीलंका से खेलना है.
दूसरे सलामी बल्लेबाज़ बाएं हाथ के 29 वर्षीय फखर ज़मां भी 50 से अधिक की औसत से खेलते हैं. उन्होंने बीते वर्ष ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ वनडे में दोहरा शतक जड़ा है. वनडे में दोहरा शतक जमाने वाले फखर पहले पाकिस्तानी बल्लेबाज़ हैं.
वे इस दौरान भारत, ज़िम्बाब्वे और इंग्लैंड के ख़िलाफ़ चार शतकों समेत 9 अर्धशतक भी लगा चुके हैं. भारत के ख़िलाफ़ उनका शतक उनके दोहरे शतक से भी अधिक महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इसी शतक की वजह से पाकिस्तान ने 2017 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी का खिताब अपने नाम किया था.
तीसरे नंबर पर खेलने वाले बाबर आज़म टी20 के सरताज हैं. टी20 क्रिकेट में उन्होंने विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ते हुए केवल 26 पारियों में सबसे तेज़ एक हज़ार रन बनाए हैं. न्यूज़ीलैंड की तेज़ पिचों पर आज़म अपनी बल्लेबाज़ी का हुनर दिखा चुके हैं.
अनुभवी कप्तान
31 वर्षीय कप्तान सरफराज़ अहमद के पास 100 से अधिक वनडे और दो हज़ार से अधिक रन बनाने के साथ ही वर्ल्ड टी20 और चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने का अनुभव है.
वनडे में 45 से अधिक की औसत से खेलने वाले हैरिस सोहेल टीम के उपयोगी ऑलराउंडर हैं. कई मैच जिताऊ पारियां खेल चुके हैरिस सोहेल अपने करियर की शुरुआत में फिटनेस को लेकर बेहद परेशान रहे. यहां तक कि उनके घुटने का ऑपरेशन भी हो चुका है और जब दिग्गजों ने उनका करियर समाप्त मान लिया तो उन्होंने जीवट दिखाते हुए वापसी की.
स्पिन हो या पेस, किसी भी गेंद को मैदान की बाहर पहुंचाने की उनकी योग्यता के साथ ही उनके डिफेंस कौशल की तारीफ विशेषज्ञ भी करते हैं. पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज शोएब अख्तर उन्हें मैदान के अंदर 'दिमाग वाला बल्लेबाज़' कहते हैं.
इनके अलावा मध्यक्रम में पाकिस्तान के पास अनुभव के धनी शोएब मलिक हैं. ढाई सौ से अधिक वनडे खेल चुके मलिक 2007 की विश्व कप टीम में शामिल थे.
उनका साथ देंगे 31 वर्षीय आबिद अली, जिन्होंने इसी साल मार्च में पाकिस्तान के लिए खेलना शुरू किया और पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ शतक जड़ कर विश्व कप की टीम में अपनी जगह पक्की की है.
वेल्स में ही जन्में खब्बू इमाद वसीम 40 से अधिक की औसत से बल्लेबाज़ी करते है और बाएं हाथ के उपयोगी स्पिन गेंदबाज़ हैं.
धारदार गेंदबाज़ी
वैसे तो विश्व कप के लिए चुनी गई पाकिस्तान टीम की खासियत उसकी बल्लेबाज़ी दिख रही है लेकिन इतिहास गवाह है कि पाकिस्तान की विशेषता उसकी गेंदबाज़ी हुआ करती है.
वैसे तो ये गेंदबाज़ी लाइनअप इमरान, अकरम, वकार और अख्तर जैसी ख़तरनाक नहीं दिख रही है. लेकिन विश्व कप के लिए चुनी गई टीम में जिन गेंदबाज़ों को शामिल किया गया है उनकी खासियत को जानने के बाद कोई भी यह मानेगा कि ये उन दिग्गज गेंदबाज़ों से कमतर भी नहीं हैं.
विश्व कप से पहले इंग्लैंड में खेली जा रही वडे सिरीज़ में पाकिस्तान के लिए तेज़ गेंदबाज़ी की कमान फहीम अशरफ, शाहीन आफ़रीदी, हसन अली और जुनैद ख़ान संभाल रहे हैं.
25 वर्षीय तेज़ गेंदबाज हसन अली 47 वनडे में 25.62 की औसत से 78 विकेट ले चुके हैं. 2017 के चैंपियंस ट्रॉफ़ी में प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट रहे अली ने टूर्नामेंट में 13 विकेट लेते हुए पाकिस्तान को पहली बार खिताब दिलाने में अपनी अहम भूमिका अदा की थी. अली को लगातार 90 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंद फेंकने में महारथ है.
वहीं 25 वर्षीय अशरफ और 29 वर्षीय जुनैद दायें हाथ तो आफ़रीदी बाएं हाथ से तेज़ गेंदें डालते हैं. 2017 चैंपियंस ट्रॉफ़ी से वनडे करियर शुरू करने वाले अशरफ सीम, स्विंग और बेहद चालाकी से स्लो बॉल डालने में महारथ रखते हैं.
19 वर्षीय साढ़े छह फ़ीट लंबे शाहिन आफ़रीदी के पास अनुभव तो बेहद कम है लेकिन अंडर-19 वर्ल्ड कप के पांच मैचों में 12 विकेट चटकाने पर भारत के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ उनकी तारीफ कर चुके हैं तो पाकिस्तान के कोच मिकी आर्थर उन्हें भविष्य में दुनिया का नंबर-1 गेंदबाज़ बताते हैं.
जुनैद ख़ान टीम के सबसे अधिक अनुभवी गेंदबाज़ हैं और मोहम्मद हसनैन, शाहीन आफ़रीदी, फहीम अशरफ और हसन अली को उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.
शोएब मलिक का अनुभव
इस सब से इतर पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पास शोएब मलिक के रूप में एक बेहद ही अनुभवी क्रिकेटर है. 428 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके मलिक के पास 2009 में इंग्लैंड में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप और 2017 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने का अनुभव है. मैदान पर शांत दिखने वाले मलिक का दिमाग मैच के दौरान परिस्थितियों की बहुत गहरी समझ रखता है और उन्हें पाकिस्तान की टीम में धोनी का पर्याय माना जाए तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी.
मलिक का 2019 में अब तक का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा है लेकिन 37 वर्षीय इस दिग्गज ने विश्व कप के बाद संन्यास लेने की घोषणा करने के साथ कहा कि इस टूर्नामेंट में वो ऐसे खेलेंगे जैसे कि यह उनके करियर की शुरुआत है.
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