बोर्ड परीक्षा की पढ़ाई के साथ CUET की तैयारी कैसे करें?

    • Author, प्रियंका झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET के रजिस्ट्रेशन फॉर्म जारी हो गए हैं. इनके जारी होते ही उन स्टूडेंट्स का काम बढ़ गया है, जो इन दिनों 12वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे.

एक तरफ़ बोर्ड परीक्षा की तैयारी करनी है, दूसरी तरफ़ सीयूईटी का भी ख़्याल रखना है, ऐसे में क्या पढ़ें, कैसे पढ़ें और किसे ज़्यादा प्राथमिकता दें, ऐसे सवाल परेशान कर सकते हैं. क्योंकि बोर्ड परीक्षा के बाद जो स्टूडेंट्स को आगे ले जाएगा, वो है सीयूईटी.

दिल्ली में रहने वालीं लीना फिलहाल प्री बोर्ड परीक्षा दे रही हैं, बोर्ड की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं और साथ ही सीयूईटी भी उनकी तैयारियों का हिस्सा है.

अब सवाल ये कि सीयूईटी है क्या, इसका पैटर्न कैसा होता है और इसकी तैयारी में लगे स्टूडेंट किस रणनीति के साथ अच्छा स्कोर कर सकते हैं?

करियर कनेक्ट सिरीज़ की इस कड़ी में ऐसे लाखों स्टूडेंट्स की कुछ उलझनों को समझेंगे और एक्सपर्ट से जानेंगे कि इस परीक्षा के लिए सही रणनीति क्या हो सकती है.

कॉलेज तक ले जाने की राह है सीयूईटी

देश भर के अलग-अलग केंद्रीय विश्वविद्यालयों, राज्य की, प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में दाख़िले के लिए जो एंट्रेंस टेस्ट होता है, उसे सीयूईटी कहते हैं. इसे हर साल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) आयोजित करती है.

देश की 48 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, 36 स्टेट यूनिवर्सिटी, 26 डीम्ड यूनिवर्सिटी और 113 प्राइवेट यूनिवर्सिटी इसका हिस्सा हैं.

इन 223 विश्वविद्यालयों के अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च, नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज़ यूनिवर्सिटी, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी जैसे सात सरकारी इंस्टीट्यूट भी इसी स्कोर के ज़रिए अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाख़िला देते हैं.

सीयूईटी को लेकर एनटीए की ओर से जो इंफ़ोर्मेशन बुलेटिन जारी किया गया है, उसके मुताबिक इस परीक्षा को देने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है. कोई भी कैंडिडेट जिसने 12वीं पास की हो, वो ये परीक्षा दे सकता है.

हालांकि, कैंडिडेट जिस यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट में दाख़िला चाहते हैं, वहां अगर कोई उम्र की सीमा तय है, तो एडमिशन उसी के हिसाब से होगा.

सीयूईटी, जेईई, कैट जैसे एंट्रेंस टेस्ट की तैयारी करवाने वाले संस्थान में पढ़ाने वाले अख़िलेश सिंह कहते हैं, "ऐसे तो इसके लिए उम्र की सीमा नहीं है और अगर किसी ने 12वीं के बाद एक साल ड्रॉप किया हो तो भी परीक्षा देने के लिए वो योग्य है, लेकिन अगर कोई 12वीं में रहते हुए इसकी तैयारी करता है तो उसके अच्छा स्कोर करने की संभावना ज़्यादा होती है, क्योंकि कॉम्पिटिशन साल दर साल बढ़ता ही जाता है."

जो स्टूडेंट तीन विषयों के लिए रजिस्ट्रेशन करेंगे उन्हें एक हज़ार रुपए फ़ीस देनी होगी. तीन विषय के बाद एडिशनल सब्जेक्ट एड करने पर प्रति विषय चार-चार सौ रुपये अतिरिक्त देने होंगे. आरक्षित वर्ग के स्टूडेंट्स के लिए ये राशि कम है, जिसकी पूरी जानकारी सीयूईटी के इंफ़ोर्मेशन बुलेटिन में उपलब्ध है.

फिलहाल एनटीए ने कहा है कि ये परीक्षा इस साल 11 से 31 मई के बीच हो सकती है. रिज़ल्ट की तारीख़ अब तक नहीं बताई गई है. फॉर्म भरने की आख़िरी तारीख़ 30 जनवरी है.

क्या होता है एग्ज़ाम का पैटर्न?

पिछले साल यानी सीयूईटी 2025 के लिए देशभर में कुल 13 लाख 54 हज़ार 699 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया था और इनमें से 10 लाख 71 हज़ार 735 स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे.

ये पेपर 13 अलग-अलग भाषाओं में हुआ, जिसमें अंग्रेज़ी, हिन्दी, असमिया, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगू और उर्दू थीं.

सीयूईटी का स्ट्रक्चर ऐसा है, जिसमें तीन सेक्शन होते हैं.

एजुकेशन कंपनी आईएमएस में सीयूईटी के प्रोग्राम डायरेक्टर जतिंदर वोहरा कहते हैं:

"पहला सेक्शन लैंग्वेज सेक्शन है, जिसमें 13 भाषाएं होती हैं. इसमें इंग्लिश, हिंदी, गुजराती, पंजाबी, उर्दू, असमिया जैसी भाषाएं हैं. अधिकांश यूनिवर्सिटी में लैंग्वेज का पेपर अनिवार्य होता है. कुछ यूनिवर्सिटी हैं, जहां ये आवश्यक नहीं होता है, लेकिन दिल्ली यूनिवर्सिटी जैसी टॉप सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ये ज़रूरी है. कुछ कोर्स हैं, जैसे बीए इंग्लिश ऑनर्स, उसके लिए इंग्लिश लेना ज़रूरी है लेकिन आम तौर पर अधिकांश कोर्स में स्टूडेंट्स इन 13 में से कोई भी लैंग्वेज चुन सकते हैं."

"दूसरे सेक्शन में डोमेन सब्जेक्ट्स होते हैं. इनमें जो विषय 12वीं में स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं, वो ले सकते हैं, जैसे फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स, इकोनॉमिक्स, अकाउंटेंसी वगैरह."

"तीसरे सेक्शन में GAT यानी जनरल एप्टीट्यूड टेस्ट आता है. ये जनरल नॉलेज, रीज़निंग, गणित से जुड़ा पेपर है. मगर ये पेपर अनिवार्य नहीं है. हां, स्टेट यूनिवर्सिटी के एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करने या फिर स्कोर को बेहतर बनाने के लिए स्टूडेंट्स को इसे देने की सिफ़ारिश की जाती है."

स्टूडेंट्स को ये सारे यानी 37 पेपर नहीं देने होते हैं. एनटीए कहता है कि कोई स्टूडेंट अधिकतम लैंग्वेज और GAT मिलाकर पांच पेपर दे सकता है.

लेकिन ये पेपर देने कैसे होते हैं, यह किसी यूनिवर्सिटी के कोर्स पर निर्भर करता है.

जतिन वोहरा इसे समझाते हुए कहते हैं, "दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकॉम ऑनर्स का काफ़ी प्रचलित है. अगर किसी को इसमें दाखिला लेना है तो उसे एक लैंग्वेज लेनी होगी, मैथमैटिक्स या अकाउंटेंसी में से एक पेपर देना होगा और दो अन्य डोमेन देने होंगे. मगर हो सकता है कि बनारस यूनिवर्सिटी के लिए कुछ अलग पेपर देने हों, जो वहां के कोर्स के हिसाब से हों."

अखिलेश सिंह डोमेन कोर्स चुनते समय एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. डोमेन सब्जेक्ट यानी वे जो स्टूडेंट 12वीं में पढ़ते हैं, जैसे फ़िज़िक्स, केमिस्ट्री, मैथमैटिक्स, अकाउंटेंसी, हिस्ट्री, बायोलॉजी वगैरह.

उनका कहना है, "डोमेन पेपर वही होने चाहिए, जो स्टूडेंट ने 12वीं में पढ़े हों. अगर कोई इनसे अलग विषय चुनता है तो फिर सीयूईटी में तरज़ीह उन्हें ही मिलती है, जिन्होंने वो विषय पढ़ा हो. न पढ़ने वालों के कुछ अंक कटते हैं और फिर उसके हिसाब से कटऑफ़ बनती है."

हर विषय में 50-50 सवाल पूछे जाएंगे. हर सही जवाब के लिए पांच नंबर मिलेंगे और गलत के लिए एक नंबर कट जाएगा. वहीं, सवाल छोड़ने पर कुछ नहीं मिलेगा, न ही अंक कटेंगे. कुल पांच पेपर होते हैं, तो 250 मार्क्स का पेपर होता है. हर विषय के पेपर को सॉल्व करने के लिए 60 मिनट मिलते हैं.

क्या होता है सिलेबस?

लीना सीबीएसई बोर्ड से पढ़ रही हैं, इसलिए उन्हें ये चिंता नहीं है कि सीयूईटी में एनसीईआरटी से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे या नहीं.

अखिलेश सिंह कहते हैं कि एनटीए ये पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीयूईटी का सिलेबस बारहवीं की एनसीईआरटी की किताबों से होगा.

ऐसे में उन स्टूडेंट का क्या जो सीबीएसई की बजाय किसी दूसरे बोर्ड से बारहवीं कर रहे हैं?

अखिलेश सिंह कहते हैं, "एनसीईआरटी अपने आप में बहुत कॉम्प्रिहेंसिव सिलेबस लेकर चलता है. कई बार स्टेट बोर्ड एनसीईआरटी से सिलेबस लेते हैं, लेकिन कुछ विषयों में थोड़ा बदलाव भी होता है. एनटीए पहले ही ये बता चुका है कि हमारा पूरा पेपर एनसीईआरटी के आधार पर ही होगा. तो बच्चा स्टेट बोर्ड से हो या फिर सीबीएसई, उसके लिए यह सुझाव होता है कि वह डोमेन सब्जेक्ट की विस्तृत जानकारी रखे.''

वहीं, जतिंदर वोहरा के मुताबिक डोमेन पेपर में सभी सब्जेक्ट का सिलेबस 90-95% एनसीईआरटी से मैच करता है.

सीयूईटी का रिज़ल्ट पर्सेंटाइल में आता है. हालांकि, यह पर्सेंटाइल तय करने के पीछे अलग-अलग फ़ैक्टर होते हैं.

अखिलेश सिंह कहते हैं, "ये एक कम्पेरेटिव स्कोर होता है. मान लीजिए कि किसी बच्चे को किसी सब्जेक्ट में 90 पर्सेंटाइल मिले हैं, तो उस पेपर को पूरे भारत में जितने भी बच्चों ने दिया, उनमें से 90 फ़ीसदी उससे पीछे हैं. मतबल 90 पर्सेंटाइल लाने वाला बच्चा टॉप 10 पर्सेंटाइल में है."

किन बातों का रखें ध्यान?

लीना की इच्छा है कि वह सॉइकोलॉजी ऑनर्स पढ़े और वह भी दिल्ली यूनिवर्सिटी के बेस्ट कॉलेज से.

वह कहती हैं, "मैंने दो महीने पहले सीयूईटी की तैयारी करनी शुरू की थी. लेकिन फिलहाल मेरा पूरा ध्यान बोर्ड परीक्षा पर है. मैंने टाइम मैनेजमेंट से इस परेशानी को थोड़ा कम किया है. जैसे मैं वीकडे में सिर्फ़ बोर्ड के विषय पढ़ती हूं. वीकेंड में सीयूईटी की तैयारी करती हूं. मैं रीज़निंग और बेसिक मैथ्स को फ़ोकस कर रही हूं, ताकि अच्छा स्कोर मिले."

उन्होंने कहा, "ये संतुलन बनाने के लिए एक शेड्यूल बनाएं कि कितना टाइम सीयूईटी को देना है और कितना बोर्ड को. जो भी स्ट्रैटेजी बनाएं, फिर उसके साथ चलें."

वहीं अखिलेश सिंह का मानना है कि कुछ तरीके हैं, जिनसे स्टूडेंट बिना कोचिंग के भी सीयूईटी में अच्छा स्कोर ला सकते हैं. जैसे:

  • एनसीईआरटी का सिलेबस ध्यान से पढ़ें. इसकी इतनी प्रैक्टिस कर लें कि कोई संदेह न बचे.
  • नियमित रूप से मॉक टेस्ट देते रहें.
  • पिछले साल के प्रश्नपत्र का बराबर अभ्यास करें.
  • टाइम मैनेजमेंट सीखना सबसे अहम है. क्योंकि बोर्ड की परीक्षा तीन घंटे की होती है और सीयूईटी एक घंटे की.

जतिंदर वोहरा कहते हैं कि स्टूडेंट को जो भी भाषा लेनी है या ले ली है, उसमें पढ़ने की आदत होनी चाहिए. साथ ही, डोमेन के लिए आपको सबसे पहले बारहवीं की एनसीईआरटी की किताबों को फॉलो करना है और अपने बोर्ड की तैयारी भी दिल से करनी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.