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पाकिस्तान में गुरु नानक देव से जुड़ी इमारत को नुक़सान पहुंचाने का सच
- Author, उमर दराज़
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता
हाल ही में पाकिस्तान के पूर्वोत्तर शहर नरोवाल के बाथनवाला गांव में स्थित एक पुरानी इमारत को स्थानीय मीडिया ने गुरु नानक से जोड़कर ख़बर चलाई थी.
दरअसल यह ख़बर पाकिस्तान के एक प्रतिष्ठित अख़बार में लगी थी जिसके अनुसार, कुछ शरारती तत्वों ने पाकिस्तान के नरोवाल शहर के बाथनवाला गांव में सदियों पुराने गुरु नानक महल को नुक़सान पहुंचाया है. इसकी क़ीमती खिड़कियां, दरवाज़े और रोशनदान बेच दिए गए हैं.
इस ख़बर के आधार पर ही भारत में बहुत सी ख़बरें चलीं, लेकिन क्या यह इमारत गुरु नानक से जुड़ी हुई थी?
शेर मुहम्मद का परिवार इस इमारत में 1947 से रह रहा है. लेकिन हाल ही में कुछ स्थानीय मीडिया में ख़बरें आईं कि यह इमारत सिख संप्रदाय के बाबा गुरु नानक देव से जुड़ी है.
शेर मुहम्मद का मानना है कि यह सही नहीं है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "क़रीब एक हफ़्ता हुआ है जब एक पार्टी आई और उसने यह दावा किया कि यह गुरु नानक से जुड़ा हुआ है, उससे पहले इसका कोई ज़िक्र नहीं था. आप ख़ुद ही इसे देख सकते हैं. हमसे पहले, कोई परिवार यहां रहता था जो यहां आए और छोड़ कर यहां से जा चुके हैं."
"कुछ लोग भारत से यहां आ कर बसे थे. लेकिन उन्हें लगा कि यह सीमा से सटा हुआ है लिहाज़ा वो यहां नहीं रहना चाहते थे. उनके रिश्तेदारों ने उन्हें यहां से कहीं और जाने की सलाह दी थी. इस इमारत की निगरानी के लिए एक व्यक्ति यहां रहा करता था, हालांकि जो यहां से गए उनके परिवार का कोई नहीं रहता था. उसके बाद हमने यहां रहना शुरू किया और यह आज भी हमारे पास ही है."
तो सवाल उठता है कि आख़िर 72 साल बाद अचानक से ऐसी बातें क्यों सामने आई?
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि उन्हें एक शिकायत मिली कि एक पुरानी इमारत का मलबा बेचा जा रहा है. उसके बाद कुछ स्थानीय पत्रकारों ने सिख धर्म के गुरुओं की तस्वीरें देखीं. इस तरह से यह गुरु नानक से जुड़ा हुआ मामला बन गया.
हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि इमारत बेहद कमज़ोर हो चुकी है यही कारण है कि इसे गिराया जा रहा है.
बाथनवाला के रहने वाले समर अब्बास कहते हैं, "यह सदियों पुरानी जर्जर हो चुकी इमारत है, जो ख़ुद-ब-ख़ुद गिरने लगी है. कुछ बार तो ऐसा हुआ कि जब इसके कुछ हिस्से गिरे तो इस गली से गुज़र रहे स्थानीय निवासियों को उससे नुक़सान पहुंचा. तब स्थानीय लोगों ने इसे धीरे-धीरे गिराने का फ़ैसला किया और जो परिवार यहां रहता है वो ऐसा ही कर रहा है."
शेर मुहम्मद का मानना है कि मीडिया में जो तस्वीरें आईं उसे विभाजन से पहले यहां रहने वाले परिवार ने बनाया था. यह गुरुद्वारा नहीं है, न ही कोई अन्य धार्मिक इमारत.
हालांकि अब इस महल को सील कर दिया गया है और शेर मुहम्मद बेघर हो गए हैं.
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