चीन का वो बेशक़ीमती खनिज, जिसके बिना अमरीका का काम नहीं चल सकता

चीन की बेशक़ीमती धातु

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    • Author, रियलिटी चेक टीम और बीबीसी मॉनीटरिंग
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अमरीका के साथ व्यापारिक विवाद बढ़ने के बीच चीन संकेत देता रहा है कि वो अमरीका को निर्यात होने वाले एक दुर्लभ खनिज पर प्रतिबंध लगा सकता है.

चीन इन दुर्लभ खनिजों का सबसे बड़ा उत्पादक देश है जो अधिकांश अमरीकी उद्योगों के लिए बहुत ही अहम हैं. उदाहरण के लिए सबसे तेज़ी से विकास कर रहे इलेक्ट्रिक कार और पवन चक्कियों में इनका इस्तेमाल किया जाता है.

पिछले साल अमरीकी भूगर्भीय सर्वे में इन खनिजों को अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय रक्षा के लिए बहुत ही अहम बताया गया था.

चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने इस हफ़्ते ट्वीट किया, "चीन अमरीका को निर्यात होने वाले दुर्लभ खनिजों पर प्रतिबंध लगाने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है."

Rare earth elements

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ये खनिज क्या हैं?

दुर्लभ खनिज जिन्हें रेयर अर्थ्स भी कहा जाता है, ये 17 धातुओं का एक समूह है जिसका इस्तेमाल बहुत सारे सेक्टरों में होता है, जिनमें वैकल्पिक ऊर्जा की तकनीक, तेल रिफ़ाइनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लास उद्योग शामिल हैं.

इन्हें दुर्लभ कहा जाता है लेकिन अमरीकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, धरती की अंदरूनी परत (क्रस्ट) में ये पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं.

हालांकि दुनिया में कुछ ही जगहें ऐसी हैं जहां इनका खनन होता है या इनका उत्पादन किया जाता है.

इसका उत्पादन काफ़ी जटिल होता है और पर्यावरण के लिए काफ़ी नुकसानदेह हो सकता है.

चीन में दुनिया के उत्पादन का 70 प्रतिशत खनन होता है. म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका के अलावा कुछ अन्य देश हैं जहां उत्पादन किया जाता है लेकिन बहुत कम मात्रा में.

China's dominance of rare earth mining . Yearly mine production (tonnes). .

अन्य दुर्लभ खनिजों के उत्पादन में चीन का दबदबा है.

पिछले साल इस्तेमाल लायक अर्थ ऑक्साइड का 90 प्रतिशत उत्पादन अकेले चीन ने किया था. बाक़ी का उत्पादन मलेशिया में एक ऑस्ट्रेलियाई कंपनी करती है.

चीन के सांख्यिकी विभाग के अनुसार, पिछले पांच सालों में चीन का दुर्लभ अर्थ ऑक्साइड का निर्यात लगभग दोगुना हो चुका है.

चीन पर अमरीका की कितनी निर्भरता?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अमरीका अपनी ज़रूरत का 80 प्रतिशत दुर्लभ खनिज चीन से आयात करता है.

इसके अलावा एस्टोनिया, फ़्रांस और जापान भी दुर्लभ खनिजों का अमरीका को निर्यात करते हैं लेकिन इसका भी कच्चा माल चीन से ही मंगाया जाता है.

अमरीका में भी एक दुर्लभ खनिज खादान है लेकिन वहां से भी कच्चा माल प्रोसेसिंग के लिए चीन को ही भेजा जाता है, जिस पर पहले से ही चीन ने 25 प्रतिशत टैक्स लगा रखा है.

अमरीका के लिए मलेशिया का विकल्प है लेकिन इससे भी ज़रूरत पूरी नहीं होती है.

इसके अलावा पर्यावरण को होने वाले नुक़सान के चलते मलेशिया ने इसके उत्पादन पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है.

दुर्लभ खनिज

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कभी अमरीका का था दबदबा

ऐसा संभव है लेकिन इसमें समय लगेगा और अगर ऐसा होता है भी तो कच्चे माल की क़िल्लत बनी रह सकती है.

असल में 1980 के दशक तक अमरीका रेयर अर्थ्स का सबसे बड़ा उत्पादक था.

इससे पहले चीन दुर्लभ खनिजों का बहुत कम निर्यात करता था.

साल 2010 में जापान के साथ हुए क्षेत्रीय विवाद के बाद उसने निर्यात करना शुरू किया.

अगर अमरीका को निर्यात होने वाले दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो इससे अमरीका के उन बड़े उद्योगों को ट्रिलियन डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ सकता है जो इन खनिजों पर पूरी तरह निर्भर हैं.

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