किम जोंग की निगरानी में मिसाइल हमले का अभ्यास

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उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक किम जोंग की निगरानी में मिसाइल हमले का अभ्यास किया गया है.
इस अभ्यास में उत्तर कोरिया की कई मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया के होदो प्रायद्वीप से छोटी दूरी की गई मिसाले जापानी सागर में दागी गई हैं.
उत्तर कोरिया की ओर से की गई घोषणा के मुताबिक देश के नेता किम जोंग उन ने 'देश की युद्धक क्षमता बढ़ाने' के लिए मिसाइलें दागने के आदेश दिए.
इसी बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट करके कहा है कि उन्हें विश्वास है कि किम जोंग उन बेहतर रिश्तों के रास्ते को नुक़सान नहीं पहुंचाएंगे.
उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, "वो जानते हैं कि मैं उनके साथ हूं और वो मुझसे किया गया वादा नहीं तोड़ेंगे. समझौगा होगा!"
उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि किम जोंग उन उत्तर कोरिया की आर्थिक क्षमता को समझते हैं और वो ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो इसे ख़त्म करे या इसमें हस्तक्षेप करे."
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इसी साल फ़रवरी में हनोई में हुई वार्ता के दौरान ट्रंप समझौते से पीछे हट गए थे. उन्होंने कहा था कि उत्तर कोरिया ने एक ख़राब समझौते का प्रस्ताव दिया था.
दबाव बनाने की रणनीति
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार सेवा केसीएनए ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस अभ्यास का उद्देश्य विदेशी आक्रमण की स्थिति में उत्तर कोरिया की तैयारियों को परखना था.
उत्तर कोरिया के नेता ने अपने सैनिकों से कहा कि इस बात को दिमाग़ में रखें कि वास्तविक शांति और सुरक्षा की गारंटी सिर्फ़ ताक़तवर बल ही दे सकते हैं.
माना जा रहा है कि उत्तर कोरिया ने शनिवार को ये अभ्यास अमरीका पर परमाणु समझौते के लिए दबाव बनाने के लिए किए हैं.
बीते महीने ने उत्तर कोरिया ने एक ने 'सामरिक निर्देशित हथियार' का परीक्षण करने का दावा किया था.

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हनोई में वार्ता के बाद किया गया ये पहला परीक्षण था.
यदि उस मिसाइल के शनिवार को लांच किए जाने की पुष्टि हो जाती है तो ये नवंबर 2017 के बाद से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा परीक्षण होगा.
उस समय उत्तर कोरिया ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण किए थे.
हालांकि कम दूरी की मिसाइलें दागने से उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण न करने का वादा नहीं टूटेगा.
वहीं दक्षिण कोरिया के सैन्य प्रमुख ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने कई छोटी दूरी की मिसालें लांच की हैं.
इन मिसाइलों ने 70 से 200 किलोमीटर तक की दूरी तय की है.
दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के परीक्षणों को उकसावे की कार्रवाई मानता है और उत्तर कोरिया से ऐसा न करने की मांग करता रहा है.
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