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वेनेज़ुएला की सीमा पर भारी संघर्ष, सेना की गोलियों से दो की मौत का दावा
कोलंबिया और ब्राज़ील से आने वाली मानवीय सहायता को रोकने के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने फ़ैसले के बाद शनिवार को वेनेज़ुएला के सीमावर्ती शहरों में भारी तनाव का माहौल पैदा हो गया.
इस दौरान रसद लेने पहुंचे लोगों पर वेनेज़ुएला के सुरक्षाबलों ने आंसू गैस और रबर की गोलियां चलाईं.
मानवाधिकार समूहों का दावा है कि इस दौरान लोगों पर बारूद वाली गोलियां भी चलाई गई, जिसमें कम-से-कम दो लोग मारे गये.
विपक्ष चाहता है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे वेनेज़ुएला के लोगों को मदद मिले, लेकिन मादुरो इसे देश की सुरक्षा के लिए ख़तरे के रूप में देखते हैं.
अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने वेनेज़ुएला की जनता पर किए गए इन हमलों की निंदा की और 'मादुरो के हत्यारों' को इसके लिए दोषी ठहराया.
उन्होंने कहा, "इस अपराध में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति हमारी सहानुभूति है."
साथ ही पोंपियो ने सहायता की रसद को जलाए जाने की घटना को हैरान करने वाला बताया.
इस बीच मादुरो की सरकार ने कोलंबिया के साथ अपने देश के राजनयिक रिश्तों को तोड़ दिया है. वहीं स्व-घोषित अंतरिम राष्ट्रपति ख़्वान ग्वाइदो ने शनिवार को कहा था कि लाखों स्वयंसेवक मानवीय सहायता पहुंचाने में मदद करेंगे. इस सहायता में खाना और दवाएं हैं.
यदि सहायता के लिए पहुंचे ये सामान वेनेज़ुएला में आने में कामयाब हो जाते हैं तो यह राजनीतिक तौर पर मादुरो की हार मानी जाएगी और ग्वाइदो की जीत.
यही वजह है कि वेनेज़ुएला के दोनों नेताओं के बीच इस समय मानवीय सहायता का मुद्दा अहम विषय बना हुआ है.
कैसे हो रहे हैं प्रदर्शन?
वेनेज़ुएला और कोलंबिया के बीच सीमा की कई ऐसी तस्वीरें आई हैं जिनमें सुरक्षाबल स्वयंसेवकों पर आंसू गैस के गोले दाग रहे हैं. वहीं, प्रदर्शनकारी चौकियों, सुरक्षाबलों और दंगाविरोधी पुलिस पर पत्थर फेंक रहे हैं.
स्थानीय मीडिया का कहना है कि लोग बैरिकेड पर चढ़कर सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, विपक्षी सांसदों ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश जारी करके बल प्रयोग किए जाने की आलोचना की है.
सिमोन बोलिवर इंटरनेशनल ब्रिज पर मौजूद बीबीसी संवाददाता ओर्ला गुएरिन ने कहा है कि वेनेज़ुएला के लोग सीमा पार करने के लिए जवानों के आगे गिड़गिड़ा रहे हैं.
वहीं, ग्वाइदो ने कोलंबियाई सीमा की ओर से तिएंदितस पुल का दौरा किया है जहां वह कोलंबिया के राष्ट्रपति इवान दोके के साथ थे. इस दौरान उन्होंने अपनी चौकी छोड़ने वाले जवानों का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी उनके साथ शामिल होंगे उन्हें 'क्षमा' किया जाएगा.
ट्रंप के ख़िलाफ़ मोर्चा
दूसरी ओर राष्ट्रपति मादुरो के एक शीर्ष सहयोगी ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह वेनेज़ुएला के लोगों को 'अपने ख़तरे पर' मदद स्वीकार करने दें लेकिन कोई भी विदेशी जवान वेनेज़ुएला में क़दम न रखे.
राष्ट्रपति मादुरो ने राजधानी कराकस में एक ख़ुशहाल भीड़ की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा है 'यहां कोई युद्ध नहीं होगा.'
उन्होंने मानवीय सहायता के ज़रिए अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा देश में आक्रमण करने का आरोप लगाया है. उन्होंने लिखा, "डोनल्ड ट्रंप, वेनेज़ुएला से अपने हाथ हटा लो."
उन्होंने ग्वाइदो को 'कठपुतली', 'अमरीकी प्यादा', 'मसखरा' और 'साम्राज्यवादी भिखारी' तक कहा है.
वीपीआई टीवी के अनुसार, वेनेज़ुएला-ब्राज़ील सीमा के नज़दीक एक सैन्य चौकी को राष्ट्रपति मादुरो के वफ़ादार लड़ाकों ने क़ब्ज़े में ले लिया है.
क्या है पूरा मसला?
वेनेज़ुएला बीते कई सालों से आर्थिक संकट की स्थिति से जूझ रहा है. यहां अनाज और दवाईयों की भारी कमी और लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से लोग देश से पलायन कर रहे हैं.
नेशनल असेंबली के आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले 12 महीनों में देश की मुद्रा स्फ़ीति दर 1,300,000 फ़ीसदी हो गई है.
देश की इस स्थिति के लिए एक वर्ग राष्ट्रपति मादुरो और पूर्व नेताओं को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है. वहीं मादुरो के समर्थकों का कहना है कि तख़्ता पलट करने की कोशिश में लगा विपक्ष और अमरीकी प्रतिबंधों के साथ-साथ कोलंबिया इसके पीछे वजह है.
इन सब के बीच, जनवरी में विपक्षी नेता ग्वाइदो ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ख़ुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था और अमरीका ने वेनेजुएला के अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में ग्वाइदो को मान्यता दे दी थी.
इसके बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमरीका के साथ सारे रिश्ते ख़त्म करने का फ़ैसला करते हुए अमरीकी राजदूत को देश छोड़ने को कहा था.
ग्वाइदो को सात दक्षिण अमरीकी देश- ब्राज़ील, कोलंबिया, चिली, पेरू, इक्वेडोर, अर्जेंटीना और पराग्वे समेत कनाडा ने भी अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दी थी. हालांकि यूरोपीय यूनियन वहां स्वतंत्र चुनाव के पक्ष में है.
दूसरी तरफ राष्ट्रपति मादुरो को मेक्सिको, बोलिविया और क्यूबा जैसे देशों का समर्थन हासिल है.
अब तक वेनेज़ुएला की सेना राष्ट्रपति मादुरो के साथ है और मादुरो ने अमरीका पर वेनेजुएला को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है. उन्होंने विपक्ष पर भी तख्तापलट की कोशिशों के आरोप लगाए हैं.
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