मल दान करने का आइडिया कैसा है? जानें क्या है 'सुपर पू'

Claudia Campenella, क्लाउडिया कैम्पेनेल्ला

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इमेज कैप्शन, क्लाउडिया दूसरों को अपनी पॉटी दान करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है
    • Author, मिशेल रॉबर्ट्स
    • पदनाम, हेल्थ एडिटर, बीबीसी न्यूज़ ऑनलाइन

स्पर्म डोनेट करने का तो सुना ही होगा लेकिन क्या कभी पॉटी या मल को दान करने की बात भी आपने सुनी है. सुनने में थोड़ा अज़ीब लग रहा है न... लेकिन यह सच है.

31 वर्षीय क्लाउडिया कैंपेनेला ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट सपोर्ट एडमिनिस्ट्रेटर और अपने खाली समय में एक पॉटी दानकर्ता हैं.

वो कहती हैं, "मेरे कुछ दोस्त सोचते हैं कि यह थोड़ा अज़ीब या घृणित है, लेकिन मुझे इसकी चिंता नहीं है. इसे दान करना बेहद आसान है और मैं केवल चल रहे मेडिकल रिसर्च में मदद करना चाहती हूं. मुझे इसमें कुछ योगदान करने की खुशी है."

दरअसल, उनकी पॉटी 'अच्छे बग' वाली है. उनकी पॉटी (मल) किसी रोगी आंत में डाल कर उसका इलाज किया जाएगा.

क्लाउडिया को पता है कि उनका दान कितना उपयोगी है और यही कारण है कि वे इसे दान करती हैं, लेकिन उनकी पॉटी इतनी ख़ास क्यों है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछ लोगों की पॉटी में ऐसे बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जिसकी मदद से किसी व्यक्ति के रोगी आंत को ठीक किया जा सकता है.

आंत, bowel

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सुपर पू डोनर्स

क्लाउडिया कहती हैं कि वो पॉटी डोनर बनना चाहती थीं क्योंकि उन्होंने पढ़ा था कि वेगन लोगों की पॉटी में इस तरह के अच्छे बग हो सकते हैं.

हालांकि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि वेगन लोगों की पॉटी की क्वालिटी अन्य आहार लेने वालों की तुलना में बेहतर होती है, लेकिन विशेषज्ञ यह रिसर्च कर रहे हैं कि आखिर वो क्या चीज़ है जिससे पॉटी 'बढ़िया' के दर्जे में आती है.

डॉक्टर जस्टिन ओ'सुलीवन ऑकलैंड यूनिवर्सिटी में एक मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट (आणविक जीवविज्ञानी) हैं और वे 'सुपर पू डोनर्स' के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं.

क्या है सुपर पू?

इंसान की आंतों में लाखों की संख्या में गुड और बैड दोनों तरह के कई प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं. ये सूक्ष्म जीव आपस में एक दूसरे से अलग होते हैं.

हालांकि चिकित्सा के क्षेत्र में पॉटी को दूसरे की आंत में डालना एकदम नया है, लेकिन रिसर्च में मिले सबूत इस बात का प्रमाण हैं कि कुछ दानकर्ता अपनी पॉटी से पैसे भी कमा सकते हैं.

डॉक्टर जस्टिन ओ'सुलीवन कहते हैं, "यदि हम पता लगा सकें कि यह कैसे होता है, तो मल प्रत्यारोपण की सफलता में सुधार कर सकते हैं और अल्जाइमर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और अस्थमा जैसी सूक्ष्म जीवों से जुड़ी बीमारियों में भी इसका परीक्षण किया जा सकता है."

डॉक्टर जॉन लैंडी वेस्ट हर्टफोर्डशायर अस्पताल एनएसएच ट्रस्ट में एक कन्सल्टेंट गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट हैं जो मल प्रत्यारोपण ईकाई में मदद करते हैं.

"हम अब तक ये नहीं समझ पाये हैं कि आखिर कोई 'सुपर पू डोनर' बनता कैसे है, इसके पीछे वजह क्या है."

"हम हमेशा यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारे डोनर स्वस्थ रहें और उन्हें कोई बीमारी न हो, लेकिन हम उनके सभी सूक्ष्म जीवों (माइक्रोबायोम) का परीक्षण नहीं करते हैं कि वो कैसा है."

"मुझे लगता है इस तरह की जांच भी की जानी चाहिए."

पॉटी में जीवाणु

डॉ ओ'सुलिवन के शोध के मुाताबिक़ व्यक्ति के म में अपने तरह के जीवाणु होते हैं जो लाभदायक साबित हो सकता है. उनका ये शोध फ्रंटियर्स इन सेलुलर एंड इन्फेक्शन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है,

डॉ ओ'सुलिवन कहते हैं कि मल प्रत्यारोपण के नतीजों को देखें तो पॉटी दाता के मल में मौजूद अधिक तरह जीवाणु बेहद अहम साबित होते हैं. और जिन मरीजों में मल प्रत्यारोपण सफल होता है उनके शरीर में बेहतर और विविध माइक्रोबायोम भी विकसित होता है.

लेकिन शोध से पता चलता है कि प्रत्यारोपण की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि दाता और मरीज़ का मैच कितना बेहतर होता है.

ये केवल पॉटी में मौजूद बैक्टिरीया पर निर्भर नहीं करता.

"फ़िल्टर्ड पॉटी के प्रत्यारोपण के ज़रिए बार-बार दस्त होने के कुछ मामलों में अच्छे नतीजे भी मिले हैं. इन मरीज़ के मल में जीवित बैक्टीरिया निकल जाता था जबकि उसमें डीएनए और वायरस बरकरार रहते थे.

डॉ ओ'सुलिवन कहते हैं, "ये वायरस प्रत्यारोपित किए गए बैक्टीरिया और अन्य जीवाणु के जीवित रहने और उनके मेटाबोलिक काम पर असर डाल सकते हैं."

क्लोस्ट्रीडियम डिफ्फिसिल, Clostridium difficile

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इमेज कैप्शन, क्लोस्ट्रीडियम डिफ्फिसिल से छोटी और बड़ी आंत में सूजन हो जाता है

लंदन के इंपीरियल कॉलेज में माइक्रोबायोम की विशेषज्ञ डॉ जूली मैक्डोनल्ड मल प्रत्यारोपण की सफलता दर को बढ़ाने के विषय पर अध्ययन कर रही हैं.

मौजूदा वक्त में, मल दान का अधिकतर इस्तेमाल क्लोस्ट्रीडियम डिफ्फिसिल नाम के पेट के संक्रमण की वजह से होने वाली ख़तरनाक स्थिति के इलाज के लिए किया जाता है.

ये संक्रमण किसी मरीज़ के पेट पर तब कब्ज़ा कर लेता है जब एंटीबायोटिक खाने के कारण मरीज़ के पेट में मौजूद उसके "अच्छे" जीवाणु ख़म हो गए हों. कमज़ोर आंत वाले मरीज़ के लिए ये घातक हो सकता है.

डॉ जूली मैक्डोनल्ड के काम से इशारा मिलता है कि मल प्रत्यार्पण को किसी विषेश काम में लाया जा सकता है जैसे कि बीमारी के कारण खोई गई चीज़ की पूर्ति करने के लिए.

वो कहती हैं, "हमारी प्रयोगशाला में हम ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रत्यारोपण कैसे काम करता है और कब हमें इस कदम को उठाना बंद करना चाहिए."

मरीज़ को मल के इंजेक्शन देने के बजाय उनके लिए मल पर आधारित एक उपचार-व्यवस्था भी अपनाई जा सकती है, जिसे अपनाने में उन्हें बुरा नहीं लगेगा.

वो कहती हैं, ऐसा करने से पॉटी दान के इर्दगिर्द बने वहम से छुटकारा मिलने में मदद होगी.

क्लाउडिया कैंपेनेला, Claudia Campenella

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क्लाउडिया चाहती हैं कि "लोग इस बारे में अपनी सोच बदलें" पॉटी डोनर या पू डोनर बनने के बारे में सोचें.

"इसे दान करना वाकई में बहुत आसान है और सरल भी है. अगर आप इसके बारे में सोच रहे हैं तो आप अफने नज़दीकी अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं."

"मुझे अस्पताल एक ख़ास डिब्बा देता है जिसमें मैं अपना मल इकट्ठा करती हूं. फिर मैं जब काम पर निकलती हूं मैं डिब्बा अस्पताल में देती हुई जाती हूं. बस आपको कुछ क़दम और चलने की मेहनत करनी होती है."

क्लाउडिया अब ब्लड डोनर बनने के बारे में भी सोच रही हैं. वो कहती हैं, "मैंने अब तक ऐसा किया नहीं है लेकिन मैं ऐसा करने के बारे में सोच रही हूं."

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