ब्रेक्सिट 2019: क्या आप भी नहीं समझ पा रहे हैं कि ब्रिटेन में चल क्या रहा है?

ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के झंडे

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    • Author, रॉब वॉटसन
    • पदनाम, राजनीतिक संवाददाता, लंदन

यूरोपीय संघ से अलग होने और संघ के साथ भविष्य में रिश्तों को लेकर ब्रितानी प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की योजना पर मंगलवार को ब्रितानी संसद में मतदान होना है.

ये मतदान बीते साल 11 दिसंबर को होना था लेकिन इसे टाल दिया गया था. ब्रिटेन को 29 मार्च को यूरोपीय संघ से अलग होना है और ये समय क़रीब आता जा रहा है.

अभी तक किसी को ये नहीं पता है कि ब्रेक्सिट आख़िर होगा कैसे और बहुत संभव है कि अगले सप्ताह के अंत तक भी इस बारे में स्थिति पूरी तरह साफ़ न हो पाए.

लेकिन इस मतदान से दो चीज़ें पता चल जाएंगी, पहली ये कि टेरीज़ा मे की योजना का संसद में किस हद तक विरोध हो रहा है और दूसरा ये कि क्या उनके पास कोई वैकल्पिक योजना भी है.

लेकिन ऐसा होना भी सुनिश्चित नहीं है क्योंकि अगर मंगलवार को वो मतदान में हार जाती हैं, तो तकनीकी रूप से उनके पास संसद को अपनी योजना के बारे में बताने के लिए सोमवार तक का समय है.

उनके पास अपने समझौते को दोबारा पारित कराने, नया समझौता करने, कोई समझौता न करने या फिर यूरोपीय संघ से अलग होने के मुद्दे पर देश में दोबारा जनमत संग्रह कराने और ब्रेक्सिट को टाल देने के विकल्प हैं.

सांसद किस मुद्दे पर मतदान कर रहे हैं?

टेरीज़ा मे के समझौते के दो हिस्से हैं, एक तो क़ानूनी तौर पर बाध्य निकासी समझौता जिसमें ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की शर्ते हैं और एक ग़ैर बाध्यकारी घोषणापत्र जिसमें यूरोपीय संघ के साथ भविष्य के रिश्तों को लेकर ब्रिटेन की उम्मीदें हैं.

टेरीज़ा मे की कंज़रवेटिव पार्टी के कई ब्रेक्सिट समर्थक सांसदों का कहना है कि टेरीज़ा मे का समझौता ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के क़रीब रखेगा जबकि ब्रेक्सिट के विरोधी कंज़रवेटिव सांसदों और सभी विरोधी दलों को लगता है कि घोषणापत्र बेहद अस्पष्ट है.

तो क्या हो सकता है?

बीबीसी के अनुमान के मुताबिक टेरीज़ा मे को सदन में बीते सौ सालों की सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ सकता है. हार के स्तर को कम करने के लिए टेरीज़ा मे और उनके मंत्री अंतिम क्षणों तक प्रयास करेंगे.

अगर मे हारीं तो उनके पास क्या विकल्प है?

उनके सबसे क़रीबी सहयोगियों को भी नहीं पता कि उनके पास कोई योजना है या नहीं.

टेरीज़ा मे

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सार्वजनिक तौर पर और निजी संवादों में भी टेरीज़ा मे कहती रही हैं कि उनकी योजना जनमतसंग्रह के नतीजे का बिना अर्थव्यवस्था को बर्बाद किए सम्मान करने का सबसे बेहतर तरीका है.

कुछ विकल्प जो वो अपना सकती हैं- यूरोपीय संघ के पास दोबारा जाएं और अपने समझौते को सांसदों को लिए और आकर्षक बनाएं, सांसदों को अपने समझौते के विकल्प के इर्द-गिर्द एकजुट होने की चुनौती दें, सांसदों को बिना समझौते के यूरोपीय संघ से अलग होने की धमकी दें या फिर ब्रेक्सिट के मुद्दे पर दोबारा जनमत संग्रह कराएं या यूरोपीय संघ से पूरी प्रक्रिया को टालने के लिए कहें.

हाऊस ऑफ़ कामंस के स्पीकर से विवाद क्यों?

प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे को जल्द से जल्द वैकल्पिक योजना तैयार करनी चाहिए, वैसे, उन्हें शुक्रिया अदा करना चाहिए स्पीकर जॉन बेक्रो और ब्रेक्सिट समर्थक सांसदों के बीच इस सप्ताह हुए विवाद का.

स्पीकर पर यूरोपीय संघ से अलग होने के ख़िलाफ़ होने के कटु आरोप भी लगे. उन्होंने दरअसल ये कहा था कि वो चाहते हैं कि ब्रेक्सिट के प्रबंधन में संसद की भूमिका और अधिक हो.

ये महत्वपूर्ण है क्योंकि संसद अभी तक बिना समझौते के यूरोपीय संघ से अलग होने और टेरीज़ा मे के समझौते, दोनों के ही ख़िलाफ़ रही है.

मुख्य विपक्षी पार्टी में क्या चल रहा है?

ब्रेक्सिट ने न सिर्फ़ सत्ताधारी कंज़रवेटिव पार्टी में मतभेद पैदा किए हैं बल्कि मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी में भी दरार डाल दी है.

यूरोपीय संघ के विरोधी जेरेमी कोर्बिन की छाया में पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह से यूरोपीय संघ से अलग होना चाहता है लेकिन पार्टी के अधिकतर सदस्य और समर्थक चाहते हैं कि दोबारा जनमत संग्रह हो और ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग होने से रोका जाए.

मंगलवार को होने वाले मतदान में लेबर पार्टी टेरीज़ा मे के ख़िलाफ़ वोट करेगी. लेकिन अगर सदन में भविष्य में इस मुद्दे पर मतदान हुए तो उनमें पार्टी क्या करेगी ये कहना मुश्किल है..

तो ब्रेक्सिट कैसे होगा?

ये किसी को नहीं पता है.

साधारण शब्दों में कहें तो, जनमत संग्रह के ढाई साल बाद भी सांसद ये तय नहीं कर पाएं हैं कि इसके नतीजे का करें क्यां.

ये इतना ही सरल है और इसी से पता चलता है कि ब्रिटेन 1954 के बाद के सबसे बड़े राजनीतिक संकट में कैसे घिर रहा है.

ब्रेक्सिट

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लेकिन अगर कुछ नहीं हुआ तो इसका मतलब ये है कि ब्रिटेन को बिना समझौते के ही यूरोपीय संघ से अलग होना पड़ेगा.

और अगर अंत में टेरीज़ा मे बिना समझौते के यूरोपीय संघ से अलग होने के लिए तैयार न हो पाईं और अगर संसद इसे रोकने के लिए आतुर रही तो फिर किसी को नहीं पता कि क्या होगा. कुछ तो होगा, लेकिन क्या होगा, ये कहना अभी मुश्किल है.

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