बांग्लादेश: शेख़ हसीना भारत और चीन में संतुलन कैसे साधती हैं

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बांग्लादेश में ग्यारहवें संसदीय चुनावों के नतीजे जैसे ही आए प्रधानमंत्री शेख हसीना को जीत की बधाई देने वालों में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे थे.
शेख हसीना लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री चुनी गई हैं और वो भी प्रचंड बहुमत से. संसदीय चुनावों में हसीना की पार्टी अवामी लीग ने पूरे विपक्ष का सूपड़ा साफ़ कर दिया.
शेख़ हसीना को मुबारकबाद चीन ने भी दी, लेकिन तकरीबन एक हफ्ते बाद. पाँच जनवरी को चीन ने आधिकारिक रूप से जीत के लिए अवामी लीग की प्रमुख को जीत की बधाई दी.
साल 2009 में सत्ता में आने के बाद अवामी लीग की सरकार की अगुवाई कर रही शेख हसीना भारत और चीन के बीच 'संतुलन भरे रिश्ते' बनाए हुई हैं. निश्चित तौर पर बांग्लादेश के लिए चीन और भारत दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन कई लोगों के दिमाग़ में सवाल यही कौंध रहा है कि बांग्लादेश भारत और चीन के बीच आख़िरकार संतुलन कैसे कायम रख पाती हैं?
दरअसल, भारत और चीन के बांग्लादेश से हित अलग-अलग तरह से जुड़े हैं. शेख़ हसीना ने टकराव की कूटनीति को छोड़ते हुए दोनों पड़ोसी सरकारों को नाराज़ होने का मौका कम ही दिया है.
भारत और चीन से रिश्ते

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कई राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शेख़ हसीना सरकार के भारत के साथ संबंध राजनीतिक और सुरक्षा वजहों से हैं. जबकि चीन के साथ बांग्लादेश के रिश्ते पूरी तरह से आर्थिक हैं.
पूर्वोत्तर के अलगाववादियों पर लगाम लगाने के मामले में शेख हसीना सरकार ने भारत को जिस तरह का समर्थन दिया वो अभूतपूर्व था. यही नहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश की ज़मीन को इस्लामिक चरमपंथ को फैलने से रोकने के लिए भी कई कदम उठाए, ताकि वे भारत को नुक़सान न पहुंचा सकें.
दूसरी तरफ़, बांग्लादेश के चीन के साथ रिश्ते विशुद्ध रूप से व्यापार से जुड़े हुए हैं. पिछले कुछ सालों में चीन ने बांग्लादेश में अच्छा-ख़ासा निवेश किया है.
दक्षिणी और उत्तरी बांग्लादेश को जोड़ने वाला पुल भी चीन की मदद से ही तैयार हो रहा है. छह किलोमीटर लंबा यह पुल दोनों इलाक़ों को सड़क और रेल के ज़रिए जोड़ेगा.
यह पुल पदमा नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक है और रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पुल के निर्माण में चीन ने 370 करोड़ डॉलर की रक़म लगाई है.
उस वक्त जब वर्ल्ड बैंक ने बांग्लादेश को वित्तीय मदद देने से इनकार कर दिया था, तब चीन ने इस परियोजना के लिए बांग्लादेश को आर्थिक मदद दी थी.
चीन से सहजता
शेख हसीना सरकार ने चीन को ऐसी ही कई परियोजनाओं में हिस्सेदार बनाया है, इसलिए शी जिनपिंग को अवामी लीग सरकार का सत्ता में होना सहज बनाता है.

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हसीना के अलावा बांग्लादेश में दूसरी सरकार बनने पर समीक्षा के नाम पर इन परियोजनाओं को निशाना बनाया जा सकता था या लटकाया जा सकता था. कहने की ज़रूरत नहीं कि इससे चीन को आर्थिक नुकसान पहुंचता.
साल 2014 में शेख हसीना के चीन दौरे के बाद दोनों देशों के बीच गर्मजोशी बढ़ी, इसके बाद इस रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए शी जिनपिंग ने दो साल बाद यानी साल 2016 में बांग्लादेश का दौरा किया. जिनपिंग का ये दौरा कितना अहम था, इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि दोनों देशों के बीच 26 समझौते हुए.
अधिकारियों के मुताबिक चीन विभिन्न परियोजनाओं के लिए बांग्लादेश को 24 अरब डॉलर का कर्ज़ देगा और इनमें से अधिकतर परियोजनाएं बुनियादी क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. इसमें पदमा नदी पर पुल बनाना तो शामिल है ही, इसके अलावा चटगांव में कर्णफुली सुरंग का निर्माण भी चीन की मदद से हो रहा है.
करीब 20 हज़ार करोड़ टका की इस परियोजना में चीन का हिस्सा करीब 9 हज़ार करोड़ टका का है. नौ किलोमीटर से कुछ लंबी ये सुरंग 3.4 किलोमीटर तक नदी के नीचे से जाएगी.
चीन ने सुरंग बनाने के लिए 12.12 मीटर व्यास की एक मशीन भी बांग्लादेश भेजी है.
इसके अलावा, चीन बांग्लादेश में दो बड़े थर्मल पावर प्लांट्स और एक फर्टिलाइज़र प्लांट भी लगाएगा. यही नहीं, बांग्लादेश ने चीन से पनडुब्बी ख़रीदने का समझौता भी किया है.
ढाका यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विभाग प्रोफेसर दिलावर हुसैन कहते हैं, "चीन के साथ बांग्लादेश के सैन्य मुद्दे तो हैं ही आर्थिक रिश्ते भी हैं और इनमें इतनी जटिलता भी नहीं है. लेकिन भारत के साथ कूटनीतिक रिश्तों पर सामंजस्य बिठाना अहम होगा."
कूटनीतिक सफलता
प्रोफ़ेसर हुसैन के मुताबिक बांग्लादेश की कूटनीति ने भारत और चीन के साथ रिश्तों में सामंजस्य बिठाने में अहम भूमिका निभाई है.

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मसलन, सोनादिया में पोर्ट बनाने को लेकर भारत और चीन दोनों ही दिलचस्पी दिखाई थी, लेकिन बांग्लादेश ने किसी भी देश को इसे बनाने का ठेका नहीं दिया, क्योंकि ऐसा करने से कोई एक देश नाराज़ हो सकता था, जो कि बांग्लादेश के हित में नहीं होता.
मुंशी फ़ैज़ अहमद साल 2007 से 2012 तक चीन में बांग्लादेश के राजदूत रहे हैं और अभी बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के चेयरमैन हैं.
अहमद का कहना है कि भारत के साथ बांग्लादेश के संबंध सिर्फ़ राजनीतिक और सुरक्षा मसलों से जुड़े हुए नहीं है, आर्थिक मुद्दे भी उससे जुड़े हुए हैं.
वह कहते हैं, "हालाँकि चीन हमारा सबसे बड़ा साझेदार है, लेकिन भारत से भी हमारे आर्थिक रिश्ते कुछ कम नहीं हैं."
जानकारों का ये भी मानना है कि दोनों देशों को नाराज़ किए बिना आगे बढ़ने से शेख़ हसीना ने अपनी कूटनीतिक योग्यता साबित की है. उन्होंने दोनों देशों के साथ अपनी ज़रूरतों के हिसाब से रिश्ते बनाए हैं.
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