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ईरान को मजबूर करने के लिए आज से लगेंगे ये अमरीकी प्रतिबंध
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से हटने के बाद फिर से लगाए जा रहे प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू किया जाएगा.
भारतीय समय के अनुसार मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे से ईरान के ऑटोमोबाइल सेक्टर के साथ-साथ उसके सोने और कीमती धातुओं में व्यापार पर भी प्रतिबंध लग जाएगा.
ट्रंप का मानना है कि आर्थिक दबाव के कारण ईरान नए समझौते के लिए राज़ी हो जाएगा और अपनी 'नुक़सानदेह' गतिविधियां रोक देगा.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने इस क़दम को "मनोवैज्ञानिक युद्ध" क़रार दिया है.
सरकारी चैनल पर ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए रूहानी ने मामले को सुलझाने के लिए अमरीका के साथ तुरंत वार्ता करने के विचार को खारिज करते हुए कहा, "हम कूटनीति और वार्ता के हमेशा से पक्ष में हैं मगर बातचीत के लिए ईमानदारी की ज़रूरत होती है."
ट्रंप ने चेताया है कि जो व्यक्ति या कंपनियां प्रतिबंधों का उल्लंघन करेंगी, उन्हें 'गंभीर परिणाम' भुगतने होंगे.
2015 में हुए समझौते में शामिल रहे रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने अमरीका के क़दम पर 'गहरा अफ़सोस' जताया है.
उन्होंने समझौते के तहत ईरान से किए गए वादों को निभाने की प्रतिबद्धता जताई है. ईरान ने कहा है कि अगर उसे आर्थिक लाभ मिलते रहेंगे तो वह भी वादों को निभाता रहेगा.
ट्रंप ने क्यों तोड़ा था परमाणु समझौता?
परमाणु समझौते के तहत प्रतिबंधों से राहत के बदले ईरान की विवादित परमाणु गतिविधियों को रोकने की कोशिश की गई थी.
पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का कहना था कि इससे ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका जा सकेगा और यह समझौता दुनिया को सुरक्षित बनाए रखने में मदद करेगा.
मगर ट्रंप का कहना है कि यह बेहद 'भयंकर और एकतरफ़ा' समझौता था.
क्या-क्या प्रतिबंध लगे हैं
ट्रंप के हस्ताक्षर वाले आदेश में जिन प्रतिबंधों का ज़िक्र किया गया है, वे इस तरह से हैं:
- ईरान सरकार द्वारा अमरीकी नोटों को खरीदने या रखने पर रोक
- सोने या अन्य कीमती धातुओं में व्यापार पर रोक
- ग्रेफ़ाइट, एल्यूमीनियम, स्टील, कोयला और औद्योगिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर रोक
- ईरान की मुद्रा रियाल से जुड़े लेन-देन पर रोक
- ईरान सरकार को ऋण देने से जुड़ी गतिविधियों पर रोक
- ईरान के ऑटोमोटिव सेक्टर पर प्रतिबंध
पांच नवंबर से ईरान पर कुछ और प्रतिबंध फिर से लगाए जाएंगे जो इस तरह से हैं:
- ईरान की बंदरगाहों को चलाने वालों पर प्रतिबंध. साथ ही ऊर्जा, शिपिंग और जहाज़ निर्माण सेक्टर पर प्रतिबंध.
- ईरान के पेट्रोलियम संबंधित लेन-देन पर प्रतिबंध
- सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान के साथ विदेशी वित्त संस्थानों के लेन-देन पर प्रतिबंध
ट्रंप ने कहा, "मुझे खुशी है कि बहुत सारी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने पहले ही ईरान में कारोबार छोड़ने का एलान कर दिया है और कई देशों ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान से कच्चे तेल का आयात खत्म या कम कर देंगे."
"हम सभी देशों से इस तरह के कदम उठाने की अपील करते हैं ताकि ईरान की सत्ता या तो अपना धमकाने वाला व्यवहार छोड़े या फिर आर्थिक रूप से अलग-थलग होने की राह पर बढ़ती जाए."
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया
ईरान की तरफ से तो तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है मगर विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा था कि इस मामले को लेकर अमरीका 'अलग-थलग' पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि किसी ऐसे से मोलभाव करने की कल्पना भी कठिन है जिसने बहुत प्रयासों के बाद हुए समझौते को आसानी से तोड़ दिया हो. उन्होंने कहा, "कौन यकीन कर सकता है कि ट्रंप बातचीत को लेकर गंभीर हैं?"
ब्रितानी, फ्रांसीसी और जर्मनी के विदेश मंत्रालयों ने यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख के माध्यम से संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें लिखा गया है कि परमाणु समझौता सही से काम कर रहा था और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद अहम था.
इन तीनों देशों ने ऐसे कदम उठाने की योजना बनाई है जिससे ईरान के साथ कारोबार कर रही यूरोपीय कंपनियों को अमरीकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाया जा सके. हालांकि ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि अमरीका उनके कदम से ज़रा भी चिंतित नहीं है.
अधिकारी ने बताया कि मई में अमरीका के परमाणु समझौते से पीछे हटने के बाद से ही ईरान गंभीर आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है और इसकी मुद्रा रियाल अपनी लगभग 80 प्रतिशत कीमत खो चुकी है.
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