अमरीका ने आईएमएफ़ को चेतावनी दी है कि वो पाकिस्तान को 'डॉलर' न दे

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- Author, टीम बीबीसी
- पदनाम, नई दिल्ली
पाकिस्तान में चुनाव संपन्न हो गया है और जल्द ही पूर्व क्रिकेटर इमरान ख़ान प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज होंगे.
सत्ता परिवर्तन के बाद अक्सर इस मुहावरे का इस्तेमाल किया जाता है कि यह 'कांटों भरा ताज' है. इमरान ख़ान के लिए भी यह कांटों भरा ताज है, क्योंकि पाकिस्तान का ख़ज़ाना ख़ाली है.
कहा जा रहा था कि चुनाव के बाद नई सरकार को आर्थिक मदद के लिए आईएमएफ़ (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड) की शरण में जाना होगा. इससे पहले, पाकिस्तान 12 बार आईएमएफ़ की शरण में जा चुका है.
अब ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान की आईएमएफ़ की राह भी अमरीका ने मुश्किल कर दी है. चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना में पाकिस्तान सबसे अहम देश है और उसे तत्काल आर्थिक मदद की ज़रूरत है.

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अमरीका ने रोकी राह
पाकिस्तान को लेकर आईएमएफ़ को अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने चेतावनी दी कि उनकी नज़र आईएमएफ़ के रुख़ पर बनी हुई है.
पॉम्पियो ने कहा, ''हमलोग देख रहे हैं कि आईएमएफ़ क्या करता है. आईएमएफ़ को कोई ग़लती नहीं करनी चाहिए.''
हालांकि सीएनबीसी को दिए इंटरव्यू में पॉम्पियो ने कहा कि वो पाकिस्तान से पारस्परिक फ़ायदे के संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा रखते हैं. अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि आईएमएफ़ से पाकिस्तान को डॉलर दिया जाना तार्किक नहीं होगा.
पॉम्पियो ने कहा कि आईएमएफ़ के फंड में अमरीकी डॉलर का बड़ा योगदान होता है. आईएमएफ़ को अगर देना ही है तो चीनी बॉन्ड दे या ख़ुद चीन ही फंड दे.
पाकिस्तान विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी से जूझ रहा है और उसे तत्काल मदद की ज़रूरत है. पाकिस्तान को चीन पहले ही काफ़ी क़र्ज़ दे चुका है.
पाकिस्तान के महत्वपूर्ण अख़बार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी की नई सरकार इमरान ख़ान के नेतृत्व में 11 अगस्त को शपथ लेगी और माना जा रहा है कि नई सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आर्थिक मदद के लिए तुरंत संपर्क करेगी.

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संकट में पाकिस्तान
पाकिस्तान के निर्यात में लगातार कमी आ रही है और और कर्ज़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है.
फ़ाइनैंशियल टाइम्स के अनुसार पाकिस्तान के सीनियर अधिकारी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 12 अरब डॉलर की आर्थिक मदद के लिए ज़मीन तैयार कर रहे हैं.
हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के एक प्रवक्ता ने कहा, ''हमें पाकिस्तान से फंड के लिए किसी भी तरह का कोई अनुरोध नहीं आया है. हमलोग अभी पाकिस्तान से इस मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं कर रहे हैं.''
पाकिस्तान एक बार फिर से चीन से क़र्ज़ ले सकता है. चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना में शामिल होने के बाद से पाकिस्तान कई बड़े क़र्ज़ ले चुका है. कई अर्थशास्त्रियों ने पाकिस्तान को बढ़ते चीनी क़र्ज़ के लिए चेतावनी दी है.

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चीन के क़र्ज़ का बढ़ता दायरा
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस परियोजना के तहत पाकिस्तान में चीन जो भी काम कर रहा है उस पर मालिकाना हक़ पाकिस्तान का नहीं रह जाएगा. कई रिपोर्टों में कहा गया है कि पाकिस्तान चीन के क़र्ज़ में उलझते जा रहा है और चुकाने में उसे काफ़ी दिक़्क़त होगी.
डॉन में सोमवार को एक रिपोर्ट छपी थी जिसमें बताया गया है कि चीन 'चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर' में और पैसा डालने के लिए तैयार हो गया है.
पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ 115 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. सरकार बनाने के लिए इमरान ख़ान की पार्टी के पास 22 सीटें कम हैं और वो गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
फाइनैंशियल टाइम्स से पाकिस्तानी सरकार के एक सलाहकार ने कहा, ''हम मुश्किल स्थिति में हैं और मदद की ज़रूरत है. हम इसकी कल्पना नहीं कर सकते हैं कि बिना आईएमएफ़ के क्या करेंगे. हमें 10 अरब डॉलर से 12 अरब डॉलर तक के क़र्ज़ की ज़रूरत है.'' इससे पहले 2013 में पाकिस्तान ने 5.3 अरब डॉलर का क़र्ज़ लिया था.

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9 अरब ही विदेशी डॉलर
हाल के महीनों में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई है. अतंरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण पाकिस्तान का आयात महंगा हो रहा है और निर्यात में लगातार कमी आ रही है.
20 जुलाई को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की तरफ़ से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान के पास महज 9 अरब डॉलर ही विदेशी मुद्रा बची है. मतलब दो महीने के आयात भर की रक़म भी पाकिस्तान के पास नहीं बची है.
तमाम आशंकाओं के बावजूद पाकिस्तान ने चीन से क़र्ज़ लेना जारी रखा है. पिछले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान चीन से पांच अरब डॉलर का क़र्ज़ ले चुका है.
पाकिस्तानी रुपये में पिछले वित्तीय वर्ष में डॉलर की तुलना में 20 फ़ीसदी की गिरावट आ चुकी है. पश्चिम के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पाकिस्तानी रुपए में 10 फ़ीसदी की और गिरावट आ सकती है.
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