You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क्या ये चुनाव नवाज़ और सेना के वर्चस्व की लड़ाई है
पाकिस्तान के चुनावों में मतदान से पहले गड़बड़ियां करने, धमकी देने और मीडिया पर दबाव बनाने के आरोप लगे हैं.
गुल बुख़ारीका लाहौर आर्मी कैंटोनमेंट एरिया से जून में अपहरण कर लिया गया था. पढ़िए पाकिस्तान के चुनाव पर उनकी राय.
अब से कुछ महीनों पहले तक शहरों में चरमपंथ के लिए पाकिस्तान की ताक़तवर सेना पर आरोप लगाने वाली बहुत कम आवाज़ें सुनाई दे रही थीं.
लेकिन ये आवाज़ें 13 जुलाई को तब लाहौर पहुंचीं, जब पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी मरियम नवाज़ पाकिस्तान में सज़ा काटने के लिए लंदन से वापस लौटे.
पिछले शुक्रवार को रावलपिंडी की सड़कों पर ये नारा सुनने को मिला, ''ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है.'' ये जगह सेना के मुख्यालय से बहुत दूर नहीं है.
नवाज़ शरीफ़ के भरोसेमंद हनीफ़ अब्बासी के सात साल पुराने नार्कोटिक्स से जुड़े एक मामले की सुनवाई अगस्त में होनी थी जो अचानक 21 जुलाई को कर दी गई और अब्बासी को उम्रक़ैद की सज़ा सुना दी गई. चुनाव से चार दिन पहले हुए इस फ़ैसले ने उन्हें मैदान से बाहर कर दिया.
हनीफ़ अब्बासी अपने निर्वाचन क्षेत्र में शेख़ राशिद अहमद के मुक़ाबले ज़्यादा मज़बूत दावेदार थे.
वहीं, शेख़ राशिद ने जनरल ज़िया और जनरल मुशर्रफ़ की सरकारों में काम किया है और वह शरीफ़ के धुर विरोधी इमरान ख़ान की तहरीके इंसाफ पार्टी के सहयोगी भी हैं. फ़ैसला सुनाने के लिए जो समय चुना गया उसके चलते पनपे ग़ुस्से के कारण इस मामले की सच्चाई को जानने में अब किसी की दिलचस्पी नहीं है.
नवाज़ शरीफ़ की वापसी पर हज़ारों लोगों ने रैली में हिस्सा लिया, लेकिन मीडिया में लाहौर या रावलपिंडी में हुए किसी भी विरोध को जगह नहीं मिली. हालांकि सोशल मीडिया पर तस्वीरों, वीडियो और बहस की झड़ी लग गई थी.
नवाज़ शरीफ़ को समर्थन
सेना की उम्मीदों के उलट शरीफ़ की लोकप्रियता ने तब ज़ोर पकड़ा, जब उन्हें पिछले साल जुलाई में भ्रष्टाचार के आरोप में प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया था. तब उन्होंने इसके लिए सेना को ज़िम्मेदार ठहराया था. उनके इस आरोप ने जनता का ध्यान सेना की तरफ़ खींचा.
इन आरोपों को फैलने से रोकने के लिए मीडिया पर नियंत्रण का रास्ता अख़्तियार किया गया. प्रमुख मीडिया चैनल 'जियो' टेलीविज़न को अप्रैल में बंद कर दिया गया. वहीं, पाकिस्तान के सबसे पुराने अख़बार 'डॉन' का वितरण मई से प्रभावित हो रहा है.
आखिर में कई महीनों के नुक़सान के बाद 'जियो' को ख़ुद पर सेंसर लगाने और कड़े दिशा निर्देशों का पालन करने पर मजबूर होना पड़ा. इसके बाद दूसरे मीडिया समूहों को भी यही रास्ता अपनाना पड़ा और फिर किसी ने नवाज़ शरीफ़ और उनकी बेटी का भाषण दिखाने की हिम्मत नहीं की.
अब मीडिया के झुक जाने के बाद इस लड़ाई को जारी रखने की सारी ज़िम्मेदारी एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया पर आ गई. लेकिन न्यायपालिका और सेना के इस गठजोड़ के ख़िलाफ़ लोगों की आवाज़ में हमेशा जोश और ग़ुस्सा बना रहा.
लगातार मिल रही धमकियों और अपहरणों के बावजूद सोशल मीडिया पर बहस जारी रही. यहां तक जो पत्रकार मीडिया चैनल या अख़बार के ज़रिए अपनी बात नहीं कह पा रहे थे उन्होंने भी सोशल मीडिया का सहारा लिया.
लगता है नवाज़ शरीफ़ ने एक दौर की लड़ाई जीत ली है. वह एक ऐसी व्यक्ति के तौर पर देखे जा रहे हैं जो देश से बाहर एक आरामदायक ज़िंदगी के साथ अपनी बीमार पत्नी के पास रह सकते थे, लेकिन वो इस सज़ा का सामना करने वापस आए.
उम्मीदों पर फिरा पानी
चुनाव से पहले आए सर्वे में उन्हें उनके विरोधियों से आगे दिखाया गया है. सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रिया को देखकर भी लगता है कि वो लोगों की सहानुभूति हासिल करने में कामयाब रहे हैं.
अब नवाज़ शरीफ़ की मज़बूत पकड़ वाले पंजाब को इमरान ख़ान के पक्ष में करना आसान नहीं होगा.
नवाज़ शरीफ़ को जनता अस्वीकार कर देगी और इमरान ख़ान को गले लगा लेगी, इस उम्मीद के धुंधली होने के बाद ही हनीफ़ अब्बासी को अचानक उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई.
हालांकि, ये साफ़ है कि पीएमएल-एन के उम्मीदवारों को अयोग्य करार देने, जेल में डालने या चुनाव से दूर रखने और दहशत के माहौल में पत्रकारों और सोशल मीडिया यूज़र्स को डराने के बाद नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के चुनाव में जीत हासिल करने की उम्मीद कम ही है.
लेकिन, अगर उनकी पार्टी 272 में से 90 सीटें भी हासिल कर लेती है तो भी ये संसद में सबसे ज़्यादा वोट पाने वाली पार्टी बनी रहेगी. इसे नवाज़ शरीफ़ के लिए कथित सेना के विरोध को जनता के समर्थन के तौर पर देखा जाएगा.
(ये लेखक के निजी विचार हैं)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)