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सीरिया: 'मारा गया' अबू बक़र अल-बगदादी का एक बेटा
सीरिया में कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के नेता अबू बक़र अल-बगदादी के एक बेटे की मौत हो गई है. इस्लामिक स्टेट ने इस ख़बर की पुष्टि की है.
अबू बक़र अल-बगदादी के इस बेटे का नाम हुदहैफ़ा अल-बद्री था.
हुदहैफ़ा की मौत सीरियाई सरकार और रूसी सेना की इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ हुई साझा कार्रवाई में हुई.
एक संदेश में इस्लामिक स्टेट ने लिखा है, "हुदहैफ़ा सीरिया के होम्स प्रांत में सीरिया की सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे."
इस संदेश में इसके अलावा कुछ और नहीं लिखा गया है. लेकिन चरमपंथी संगठन ने एक नौजवान की तस्वीर शेयर की है जिसने हाथ में राइफ़ल पकड़ी हुई है.
पर इस संदेश से ये अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उनके पिता डॉक्टर इब्राहिम अवाद इब्राहिम अली अल-बद्री, जिन्हें दुनिया अबू बक़र अल-बगदादी के नाम से जानती है, वो ज़िंदा हैं.
बगदादी के सिर पर ढाई करोड़ अमरीकी डॉलर का ईनाम है. हालांकि कई बार उनके घायल होने और मारे जाने की ख़बरें आ चुकी हैं.
बगदादी के इस बेटे के बारे में सुरक्षा एजेंसियों के पास बेहद कम जानकारी है.
हिशम अल-हशीमी इराक़ सरकार के सलाहकार हैं. उन्हें जिहाद विषय का एक्सपर्ट माना जाता है. उनके अनुसार, "हुदहैफ़ा अल-बद्री का जन्म इराक़ के शहर समारा में साल 2000 में हुआ था."
हशीमी ने मई में दावा किया था कि बगदादी पर शिकंजा कसता जा रहा है और उनके पाँच सीनियर कमांडर इराक़ फ़ौज ने हिरासत में ले लिये हैं.
दरअसल बगदादी के एक कमांडर, इस्माइल अल-इथावी को तुर्की में गिरफ़्तार किया गया था. फिर उन्हें इराक़ लाया गया जहाँ उन्होंने इराक़ी जाँच इजेंसियों की बाकी चार कमांडरों को सीरिया में ढूंढनें में मदद की.
बीते साल हुईं बड़ी सैन्य कार्रवाइयों के बाद इस्लामिक स्टेट का कब्ज़ा एक सीमित इलाक़े तक ही रहा गया है. सीरिया का एक छोटा सा हिस्सा ही अब इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े में बचा है.
पिछले साल दिसंबर में ही इराक़ सरकार इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जंग में अपनी जीत घोषित कर चुकी है. हालांकि इराक़ी सेना अभी भी सीरियाई सीमा से सटे कई इलाक़ों में आईएस के ख़िलाफ़ सैन्य ऑपरेशन कर रही है.
कौन है अबू बक़र अल-बगदादी?
बताया जाता है कि बग़दादी का जन्म साल 1971 में इराक़ के बगदाद शहर के उत्तर में स्थित समारा में हुआ.
कुछ पुरानी रिपोर्टों के मुताबिक़, साल 2003 में जब अमरीकी सेनाएं इराक़ में दाख़िल हुईं, तब तक बग़दादी शहर की एक मस्जिद में मौलवी हुआ करते थे.
साल 2014 की रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड अल-शाम (आईएसआईएस) ने इराक़ और सीरिया में अपने कब्ज़े वाले इलाक़े में 'ख़िलाफ़त' यानी इस्लामी राज्य की घोषणा की थी.
संगठन ने अपने मुखिया अबू बक़र अल-बग़दादी को 'ख़लीफ़ा' और दुनिया में मुस्लिमों का नेता घोषित किया था.
उसी वक़्त एक वीडियो जारी कर ये कहा गया था कि आईएसआईएस संगठन का नाम सिर्फ़ 'इस्लामिक स्टेट' होगा.
जानकार मानते हैं कि बगदादी अपनी पहचान सार्वजनिक करने और अपने रहने की जगह बताने में काफ़ी सतर्क रहे हैं.
उनकी केवल दो सत्यापित तस्वीरें ही मौजूद हैं और अल-क़ायदा के दिवंगत मुखिया ओसामा बिन लादेन और अल-जवाहिरी की तरह वो वीडियो संदेशों में नहीं दिखते.
यहाँ तक कहा जाता है कि उनके लड़ाके भी उनसे आमने-सामने बात नहीं करते. आईएसआईएस मुखिया अपने कमांडरों को संबोधित करते समय भी मास्क पहने रहते हैं और यही वजह है कि उनका उपनाम 'अदृश्य शेख' पड़ा.
साल 2017 में उनका एक वीडियो जारी किया गया था, जिसमें अबू बक़र अल-बगदादी मूसल की एक मस्जिद में अपने वफ़ादारों को संबोधित करते दिखाई दिये थे. उससे पहले साल 2014 में बगदादी का एक अन्य वीडियो जारी किया गया था.
बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर कहते हैं कि बग़दादी के पास ख़ुद को रहस्य बनाए रखने के लिए कई पर्याप्त कारण हैं. बग़दादी उनका असली नाम नहीं है लेकिन दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है.
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