You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कश्मीर में पैर पसारने की कोशिश में है इस्लामिक स्टेट
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, दिल्ली
चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) भारत प्रशासित कश्मीर में जारी अस्थिरता के दौर का फ़ायदा उठाकर अपने पांव पसारने की कोशिशों में जुटा है.
इसी सिलसिले में संगठन ने इलाके के युवाओं से संगठन से जुड़ने की अपील की है. ये संगठन की कई भाषाओं में छपने वाली मैगज़ीन रुमैया के उर्दू संस्करण के जून अंक में छपा है.
इस अंक में 'कश्मीर के लोगों के लिए ख़लीफ़ा की ज़मीन से संदेश' शीर्षक से एक लेख छपा है.
इसमें आईएस में शामिल होकर काफ़िरों यानी भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की बात कही गई है.
इस्लामिक स्टेट इराक़ और सीरिया में सक्रिय है और अब उसकी कोशिश अपनी विचारधारा दूसरे देशों के हिस्से में पहुंचाने की है.
कश्मीर में अस्थिरता को कैसे देखता है इस्लामिक स्टेट?
आईएस ने साल 2016 के जनवरी महीने में कश्मीर की पहचान एक ऐसी जगह के रूप में की थी जहां वो अपना विस्तार कर सकता है.
संगठन ने ये भी कहा था कि इसने कश्मीर से कुछ लड़ाके भर्ती किए हैं और कुछ ख़ास काम चल रहा है जिससे जल्द ही ख़ुशखबरी आएगी.
आईएस ने अपने हालिया अपील में 'काफ़िरों के ख़िलाफ़ कश्मीरी लोगों के संघर्ष' की बात की है लेकिन ये भी कहा गया है कि ये ग़लत रास्ते पर चला गया है.
आईएस ने ये भी कहा है कि राजनेताओं और चरमपंथी संगठनों ने कश्मीरी लोगों के संघर्ष का फ़ायदा उठाकर ख़ुद को फ़ायदा पहुंचाया है.
इसके साथ ही कहा गया है कि आईएस इन सबसे बेहतर विकल्प देगा.
इस संगठन ने भारत और पाकिस्तान की सरकार को 'तानाशाह' और 'ख़ुद का धर्म छोड़ने वाला' बताया है. इसके साथ ही इन देशों की सशस्त्र सेनाओं को निशाना बनाते हुए उन पर हमला बोलने का आग्रह किया है.
आईएस ने कश्मीर घाटी में सक्रिय चरमपंथी संगठनों की निंदा करते उन्हें पाकिस्तानी एजेंट बताया है. इस तरह आईएस ने ख़ुद को इन संगठनों से अलग किया है.
संगठन ने कश्मीरियों से उनके साथ शामिल होकर जिहाद छेड़ने की अपील की है.
कश्मीर में आईएस का इतिहास
आईएस का ये संदेश उस वक्त आया है जब कश्मीर राजनीतिक अस्थिरता के चक्र से गुजर रहा है जो धीरे-धीरे हिंसक होता जा रहा है.
कश्मीर में हिंसा का ये दौर साल 2016 में चर्चित चरमपंथी कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षाबलों द्वारा एनकाउंटर से शुरू हुआ था.
इसके बाद शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में 70 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. कुछ प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों से टक्कर लेते वक्त आईएस के झंडे के साथ भी नजर आए हैं.
कश्मीर के मौजूदा हालातों को देखें तो इस्लामिक स्टेट उन कश्मीरी युवाओं को अपनी ओर लाना चाहता है जो इस क्षेत्र के प्रमुख चरमपंथी संगठनों के प्रति अविश्वास का भाव रख रहे हैं.
इस तरह इस्लामिक स्टेट उपमहाद्वीप में पैर पसारने की कोशिशों में जुटा है.
आईएस की रुमियाह पत्रिका
इस्लामिक स्टेट की मैगज़ीन रुमैया पूर्वी एशिया में जिहाद शीर्षक के साथ सात जून को 11 भाषाओं में जारी हुई थी. इन भाषाओं में अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, इंडोनेशिया, कुर्दिश,पश्तो, रूसी, बोसनियान, तुर्की, वीगर और उर्दू में शामिल है.
ये मैगजीन मैसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर जारी की गई थी.
इस मैगज़ीन की ज़्यादातर सामग्री संगठन के साप्ताहिक अरबी अखबार अल-नाबा से ली गई है लेकिन कुछ भाषाओं में विशेष पाठकों के लिए खास सामग्री दी गई है.
इस मैगजीन का नाम रुमैया रोम पर कब्जा करने से जुड़ी एक भविष्यवाणी से निकलकर आया है.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)