वुसअतुल्लाह ख़ान का ब्लॉग: 'क्या वो वाजपेयी को भी पाकिस्तान भेज देंगे'

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    • Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

कभी ब्रिटिश इंडिया के गद्दारों मगर देशभक्तों की नज़र में हीरो दिखने वाले हिंदुस्तानियों को सज़ा के तौर पर 'काले पानी' भेजा जाता था. फिर न भारत में अंग्रेज़ रहे, न अंडमान की काले पानी की जेल. अब ख़तरनाक बंदियों को यहीं कहीं नागपुर या दिल्ली की तिहाड़ जेल में पहुंचा दिया जाता है.

लेकिन जब से मोदी जी सत्ता में आए हैं, एक नया काला पानी दरयाफ़्त हो गया है और इसका नाम है पाकिस्तान.

शाहरुख ख़ान को फलां बात करने की जुर्रत कैसे हुई, इसे पाकिस्तान भेज दो. आमिर ख़ान की पत्नी किरण राव को आज के भारत में रहते हुए डर लगता है न, भेजो पाकिस्तान ऐसे एहसान फ़रामोशों को फ़ौरन पाकिस्तान. संजय लीला भंसाली को खिलजी पर फ़िल्म बनाने का शौक़ है तो जाओ पाकिस्तान जाकर फिल्म बनाओ और जो ये जेएनयू के लौंडे अफ़जल गुरु के हित में नारे लगाते रहते हैं, इन सब को भी फ़ौरन रवाना करो पाकिस्तान.

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वंदेमातरम न गाने वाले सभी देशद्रोहियों पाकिस्तान चले जाओ. ये पाकिस्तान नहीं भारत है, यहां लव जिहाद नहीं चलेगा. यूपी के स्कूलों में पढ़ने वाले मुसलमान बच्चों को उनके क्लास फ़ेलो कहते हैं - अबे ओ पाकिस्तानी, तू यहां क्या कर रहा है.

जिसे हिंदुत्व पसंद नहीं या जिसे मोदी नहीं भाते, वो सब पाकिस्तान चले जाएं.

अच्छा तो तू देशी गर्ल होकर अमरीकी टीवी में चंद डॉलरों की ख़ातिर किसी हिंदू को आतंकवादी कहकर देश से गद्दारी करेगी...अरी ओ प्रियंका, पाकिस्तान में जाकर बस जा, फिर जो मर्ज़ी वाही-तबाही करना. वापस मुंबई में कदम नहीं रखने का, सुन रही है न तू.

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मेरा दोस्त अब्दुल्ला पनवाड़ी जिसे 24 घंटे टीवी देखने की बीमारी है, वो ऐसी ख़बरें सुन-सुनकर मेरा सर खाता है.

कल उसने मुझे फिर रोक लिया..."भाई जी, जरा समझाओ तो ये भारत में लोग किस तरह की बातें कर रहे हैं, क्या ये सबको पाकिस्तान भेजना चाहते हैं, प्रियंका, शाहरुख़ और आमिर वगैरा तो ठीक हैं पर कहीं ये लोग आडवाणी जी को तो पाकिस्तान नहीं भेज देंगे जिन्होंने कराची में जिन्ना की मज़ार पर हाजिरी दी थी.

और वाजपेयी जी को कहीं उसी बस में बिठाकर तो हमारी तरफ़ नहीं हकाल देंगे जिससे उतरकर वो सीधे मीनार-ए-पाकिस्तान गए थे जहां पर 1940 में मुस्लिम लीग ने भारत के बंटवारे की मांग का प्रस्ताव पेश किया था, भाई जी नेहरू जी की अस्थियों तो पाकिस्तान नहीं भेज देंगे जिन्होंने छह में से तीन दरियाओं पर पाकिस्तान का हक़ मान लिया था.

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मैंने अब्दुल्ला को तसल्ली दी कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला है तुम ज़्यादा परेशान मत हो, ये सब सियासत चमकाने का चक्कर है. मोहब्बत को कोई वीज़ा नहीं देता और नफ़रत को वीज़े की ज़रूरत नहीं.

इस पर अब्दुल्ला ने सिर हिलाते हुए कहा - बात अपने पल्ले बिल्कुल नहीं पड़ी भाई जी पर बात आपने बहुत बढ़िया की है.

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