जी7 में रूस को शामिल करना चाहते हैं ट्रंप

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि जी7 देशों के समूह में रूस को भी शामिल किया जाए.
उनका कहना है कि रूस एक प्रमुख औद्योगिक देश है और इसे दोबारा इस समूह में जगह दी जानी चाहिए.
2014 में क्रीमिया पर कब्ज़े के बाद रूस को जी8 देशों के समूह से निकाल दिया गया था जिसके बाद ये समूह जी7 बन गया था.
ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात का मलाल है कि बैठक में शामिल होने वाले देशों की संख्या कम हुई है और कई मुद्दों पर जी7 देशों के नेता उनसे समहत नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "आप पसंद करें या नहीं, या फिर ये राजनीतिक तौर पर सही हो या नहीं, हमें दुनिया चलानी है और जी7 जिसमें पहले रूस भी था उन्होंने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया. उन्हें रूस को फिर से इसमें शामिल होने देना चाहिए."
इस मुद्दे पर इटली के नए प्रधानमंत्री जूसेपे कोन्टे ने ट्रंप का समर्थन किया और ट्वीट किया कि "सभी के हितों की रक्षा के लिए रूस को शामिल किया जाना चाहिए."
हालांकि कनाडा, फ्रांस और ब्रिटेन ने तुरंत इस बात की ओर इशारा किया कि वो ट्रंप की राय से सहमत नहीं है.


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जी7 देशों के समूह के नेता हाल के वर्षों में अब तक के अपने सबसे उग्र समझे जाने वाले सम्मेलन के लिए कनाडा में मुलाक़ात कर रहे हैं.
ट्रंप ने हाल के दिनों में स्टील और एल्युमीनियम पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क को बढ़ा दिया था. कनाडा में हो रही इस मुलाक़ात से ठीक पहले फ्रांस और कनाडा के नेता और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच व्यापार पर लगाए गए अधिक शुल्क को ले कर तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई.



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बयानबाज़ी
जी7 देशों के समूह में शामिल कनाडा, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जापान और जर्मनी की बैठक शुक्रवार को क्युबेक के ले मेलबे शहर में आयोजित हो रही है.
दुनिया की दौलत के करीब 60 फीसदी हिस्से के मालिक इन देशों के नेता सालाना तौर पर मुलाक़ात करते हैं. इस सम्मेलन में आर्थिक समझौते और चुनौतियां चर्चा का मुख्य मुद्दा होती हैं लेकिन हाल के वर्षों में इनमें दुनिया के सामने खड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी बात हो रही है.
शुक्रवार हुई बैठक के पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच तीखी जुबानी लड़ाई शुरू हो गई.
एक ट्वीट में मैक्रों ने कहा कि अगर ट्रंप अलग-थलग रहना चाहते हैं तो अन्य देश साथ मिल कर अपने बीच समझौता करने के लिए तैयार हैं "क्योंकि ये छह देश मूल्यों की बात करते हैं, ये उस बाज़ार का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसका लंबा इतिहास रहा है और अब ये असल मायनों में अंतरराष्ट्रीय ताकत बन चुके हैं."
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कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो भी ट्रंप के 'भाईचारे वाले प्यार' से नाराज़ हैं और हाल के दिनों में उनसे विवादों में उलझते नज़र आए हैं, खास कर उत्तर अमरीकी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रुकने के बाद से वो नाराज़ दिखे.
उन्होंने ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनीयम पर शुल्क लगाने के समर्थन में राष्ट्रीय सुरक्षा की दलील को उन्होंने 'हास्यास्पद' कहा.
ट्रंप ने भी एक के बाद एक ट्वीट कर जस्टिन ट्रूडू पर 'गुस्सा करने' और कनाडा और यूरोपीय यूनियन पर वर्षों तक अमरीका के ख़िलाफ़ 'भारी व्यापार शुल्क लगाने और बिना लाभ वाले व्यापार बाधाएं खड़े करने' का आरोप लगाया.
उन्होंने लिखा "अपनी लगाई शुल्क और बाधाएँ हटाओ या फिर हम आपकी बराबरी करने के लिए बाध्य होंगे."
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ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे एक और समझौता करने के लिए तैयार दिख रही हैं. उनका कहना है कि वो चाहती हैं कि अमरीका के लगाए व्यापार शुल्कों के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ संयम के साथ काम करे.
इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने यानी ब्रेक्सिट के बाद के ख़ास व्यापार सौदे भी उनके एजेंडे में ऊपर होंगे.

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क्युबेक में और क्या-क्या हो सकता है?
- ट्रंप का कहना है कि वो शुक्रवार को सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और इसके बाद शनिवार को सिंगापुर रवाना हो जाएंगे जहां वो उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन से मुलाक़ात करने वाले हैं.
- इस साल के जी7 देशों में समूह की थीम है - सम्मिलित आर्थिक विकास, लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण, विश्व शांति और सुरक्षा, भविष्य में नौकरियां, जलवायु परिवर्तन और दुनिया के समंदर.
- ऐसी उम्मीद जताई जा रही थी कि इस सम्मेलन में ईरान के साथ परमाणु समझौते और जलवायु परिवर्तन पर भी बात होगी.
- लीडर्स प्रोग्राम के अनुसार ट्रंप सम्मिलित आर्थिक विकास के मुद्दे पर बात करने के लिए सम्मेलन में होंगे लेकिन शनिवार को होने वाले लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण और जलवायु परिवर्तन पर बात करने के लिए वो मौजूद नहीं होंगे.
- बीते साल इटली में आयोजित हुए जी7 देशों के सम्मेलन में भी ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर हुई चर्चा में हिस्सा नहीं लिया था.
- हाल में ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते को रद्द करने का फ़ैसला लिया था जबकि इस समझौते में शामिल अन्य देश इसके विरोध में थे. इस कारण अन्य देश ट्रंप से नाराज़ हो गए थे.

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सम्मेलन के विरोध में प्रदर्शन
सम्मेलन से पहले करीब 700 प्रदर्शनकारियों क्युबेक में अमरीका और अन्य देशों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.
इन प्रदर्शनकारियो ने पूंजीवाद के ख़िलाफ़ नारे लगाए और एकीकृत मुक्त व्यापार का विरोध किया.
विरोधियों की दलील है कि इसके कारण कई समुदायों को नुक़सान हुआ है और अमीरों का फ़ायदा हुआ है.
हालांकि इसका समर्थन करने वालों का कहना है कि इसेक कारण नौकरियां बढ़ी हैं, मजदूरी बेहतर मिली है और कीमतों में कमी आई है.
क्युबेक में हो रहे इस सम्मेलन में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 8000 सुरक्षाकर्मी और पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया है.

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