You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
गज़ाः यरूशलम में अमरीकी दूतावास खुलने पर हिंसा, 55 की मौत
गज़ा सीमा पर इसराइली सैनिकों के साथ फलस्तीनियों की झड़प में में कम से कम 55 फलस्तीनी मारे गए हैं.
फलस्तीनी अधिकारियों के मुताबिक़ इस हिंसक झड़प में 2700 लोग घायल भी हुए हैं.
यरूशलम में अमरीकी दूतावास के उद्घाटन के पहले ये हिंसा हुई है. इस दूतावास को लेकर फलस्तीनी नाराज़ बताए जा रहे थे.
फलस्तीनी इसे यरूशलम पर इसराइली कब्ज़े को अमरीकी समर्थन के तौर पर देख रहे रहैं. फलस्तीनी लोग यरूशलन के पूर्वी इलाक़े पर अपना दावा जताते हैं.
सोमवार को अमरीका ने यरूशलम में अपना दूतावास खोल दिया.
इस कार्यक्रम में अमरीकी अधिकारियों के साथ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बेटी और दामाद ने शिरकत की.
राष्ट्रपति ट्रंप ने वीडियो पर इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस घड़ी का लंबे समय से इंतज़ार था.
गज़ा में क्या चल रहा है
गज़ा पर शासन करने वाले मुस्लिम संगठन हमास ने पिछले छह हफ़्तों से इसे लेकर विरोध प्रदर्शन छेड़ रखा है.
इसराइल का कहना है कि प्रदर्शनकारी सीमा पर लगे बाड़ को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे. इसराइल इस बाड़ की कड़ाई से सुरक्षा करता है.
हमास के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सोमवार को हुई हिंसा में मारे गए लोगों में बच्चे भी हैं.
गज़ा से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक़ वहां फलस्तीनियों ने पत्थर फेंके और आग लगाने के काम आने वाले बम चलाए.
इसके जवाब में इसराइल की ओर से स्नाइपरों ने गोलियां चलाईं. इसराइल की सेना का कहना है कि 35 हज़ार फलस्तीनी सीमा पर लगे बाड़ के पास दंगा कर रहे थे.
इसराइल का कहना है कि इस विरोध प्रदर्शन का मक़सद सीमा पर लगी बाड़ को तोड़ना और इससे लगे उसके रिहाइशी इलाकों पर हमला करना था.
इसराइल की सेना ने बताया कि रफ़ा में सुरक्षा बाड़ के पास विस्फोटक लगाने की कोशिश कर रहे तीन लोगों को उसने मार दिया.
यहां तक कि इसराइल ने जबालिया में हमास की सैनिक चौकियों को पर भी हवाई हमले किए हैं.
फलस्तीनियों का नक़बा
14 मई, 1948 को इसराइल की स्थापना के समय विस्थापित हुए फलस्तीनियों की याद में यहां हर साल मातम मनाया जाता है. फलस्तीनी इसे नक़बा कहते हैं.
इसी सिलसिले में फलस्तीनी हर हफ़्ते इसराइलियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. जब से ये विरोध प्रदर्शन शुरू हुए हैं, कई लोग मारे जा चुके हैं और हज़ारों घायल हुए हैं.
इसराइल के साथ संघर्ष कर रहे इस्लामी संगठन हमास ने कहा है कि वो विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला और तेज़ करेगा.
उसका कहना है कि इससे दुनिया का ध्यान फलस्तीनियों की तरफ़ जाएगा कि हमारे लोग किस तरह से अपने पुरखों की ज़मीन पर लौटने के हक़ के लिए लड़ रहे हैं.
गज़ा में एक साइंस टीचर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "आज एक बड़ा दिन है. आज हमने सीमा पर लगे बाड़ को पार किया और इसराइल और दुनिया को ये बता दिया कि हम पर ये कब्ज़ा हमेशा नहीं रहने वाला है."
अमरीकी दूतावास का मुद्दा इतना विवादास्पद क्यों?
यरूशलम की स्थिति इसराइल फलस्तीन संघर्ष के केंद्र में है. यरूशलम पर इसराइल की संप्रभुता को दुनिया स्वीकार नहीं करती है.
1993 में फलस्तीन और इसराइल के बीच एक समझौता हुआ था. इसके तहत यरूशलम के मुद्दे को आगे की बातचीत के जरिए सुलझाने पर रजामंदी हुई थी.
साल 1967 के मध्य-पूर्व संघर्ष के समय इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर कब्ज़ा कर लिया था.
दिसंबर, 2017 में ट्रंप की घोषणा से पहले तक किसी भी देश ने यरूशलम पर इसराइल के कब्ज़े को मान्यता दी थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)