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यरूशलम में नए अमरीकी दूतावास का उद्घाटन आज
इसराइल के विवादित शहर यरूशलम में सोमवार को नया अमरीकी दूतावास खुलने जा रहा है. इसके उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका और दामाद जेरेड कुशनर इसराइल पहुंचे हैं.
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और विवादित नीतिगत फ़ैसला लेते हुए अमरीकी दूतावास को राजधानी तेल अवीव से ऐतिहासिक शहर यरूशलम शिफ़्ट करने का फ़ैसला लिया था.
हालांकि दूतावास के उद्घाटन समारोह में ख़ुद डोनल्ड ट्रंप मौजूद नहीं रहेंगे.
अमरीका के इस फ़ैसले की मध्य-पूर्व के मुस्लिम देशों समेत दुनियाभर के कई देशों ने आलोचना की थी.
इसराइल यरूशलम को अपनी 'चिरकालीन और अविभाजित' राजधानी मानता रहा है जबकि फ़लस्तीनी 1967 के युद्ध में इसराइल के क़ब्ज़े में आए पूर्वी यरूशलम को अपने प्रस्तावित राष्ट्र की राजधानी मानते हैं.
अन्य देशों से आग्रह
इसराइल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने अन्य देशों से भी अपने दूतावास तेल अवीव से यरूशलम शिफ़्ट करने का आग्रह किया है.
रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप का अमरीका के दूतावास को यरूशलम लाना एक महान फ़ैसला है. ये सच को सच मानने जैसा है. हम जानते हैं कि यरूशलम पिछले तीन हज़ार सालों से यहूदी लोगों की राजधानी रहा है और ये पिछले 70 सालों से हमारे देश की राजधानी भी है. और ये हमेशा हमारी ही राजधानी बना रहेगा."
इसी कार्यक्रम में बोलते हुए अमरीकी उप-विदेश मंत्री जॉन सुलीवन ने कहा कि ये इस क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सही दिशा में उठाया गया क़दम है.
राष्ट्रपति का वादा
अमरीकी उप-विदेश मंत्री ने कहा, "यहाँ मौजूद हम सभी लोग ये बात समझते हैं कि यरूशलम में अमरीकी दूतावास खुलना बहुत दिनों से लंबित एक सच्चाई है. जैसा कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ये इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए भी ज़रूरी है. हम अपने राष्ट्रपति के वादे को अधिकारिक रूप देकर गर्व महसूस कर रहे हैं."
वहीं फ़लस्तीनी लोग अमरीका के इस क़दम का कड़ा विरोध कर रहे हैं. फ़लस्तीनी उम्मीद करते हैं कि इसराइल के क़ब्ज़े वाले पूर्वी यरूशलम में एक दिन उनके देश की राजधानी होगी.
कौन-कौन ख़िलाफ़?
रामल्ला में फ़लस्तीनी लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन के एक वरिष्ठ नेता वासेल अबु यूसुफ़ ने कहा कि वो अरब देशों से उस देश का बहिष्कार करने की अपील करते हैं जो अपने दूतावास को यरूशलम लाए.
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि कई फ़ैसले लिए जाने की ज़रूरत है. सबसे पहले पवित्र शहर में हमारे फ़लस्तीनी लोगों को मज़बूत किया जाए. इसके साथ ही अरब देश एक सहमति बनाएं कि वो उन सभी देशों का बहिष्कार करेंगे जो अपने दूतावास यरूशलम लाने की बात करते हैं."
यूरोपीय संघ ने भी अमरीका के इस क़दम का विरोध किया है और यूरोप के अधिकतर देशों के राजदूत सोमवार को होने वाले उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करेंगे.
हालांकि माना जा रहा है कि हंगरी, रोमानिया, चेक गणराज्य के प्रतिनिधि इस समारोह में शामिल हो सकते हैं.
आगे क्या?
ग्वाटेमाला और पराग्वे के राष्ट्रपति भी समारोह में शामिल होंगे. दोनों ही देश अपने दूतावासों को यरूशलम ला रहे हैं.
गज़ा में मार्च के आख़िर से ही अमरीका के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें अब तक 40 से ज़्यादा फलस्तीनी लोगों की मौत हो चुकी है.
इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच चल रहे लंबे विवाद के जड़ में यरूशलम है और अमरीका के इस क़दम से ये विवाद और ग़हरा हो सकता है.