स्कूली छात्राओं का अपहरण करके उनका क्या करता है बोको हराम?

छात्राएं

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    • Author, आदर्श राठौर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

साल 2014 के अप्रैल महीने में बोको हराम के चरमपंथियों ने चिबोक क़स्बे के एक स्कूल पर हमला किया, 276 लड़कियों को ट्रकों में भरा और ग़ायब हो गए.

कुछ लड़कियां भाग निकलीं तो कुछ को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने बातचीत करके छुड़ाया. मगर अभी भी 100 से ज़्यादा लड़कियां लापता हैं.

इस घटना के चार साल बाद एक बार फिर 110 छात्राओं का योब प्रांत से अपहरण कर लिया गया है. माना जा रहा है कि पिछले हफ़्ते हुई इस घटना के पीछे भी बोको हराम का हाथ है.

स्कूली लड़कियों निशाने पर क्यों?

बोको हराम ने अफ़्रीका के सबसे घनी आबादी वाले देश नाइजीरिया में बम धमाकों, हत्याओं और अपहरणों से कोहराम मचाया हुआ है. यह संगठन सरकार को उखाड़कर इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना चाहता है.

इसका आधिकारिक नाम है- जमात एहल अस-सुन्ना लिद-दावा वल-जिहाद. इसका अर्थ हुआ- 'पैग़ंबर की शिक्षाओं और जिहाद के प्रसार के लिए प्रतिबद्ध लोग.' लेकिन उत्तर-पूर्वी शहर मैदुगुरी में, जहां इसका गढ़ है, इसे बोको हराम कहा जाता है. बोको हराम का अर्थ हुआ- पश्चिमी शिक्षा हराम है.

योब प्रांत के दबाची क़स्बे में इसी स्कूल से हुआ छात्राओं का अपहरण

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इमेज कैप्शन, योब प्रांत के दबाची क़स्बे में इसी स्कूल से हुआ छात्राओं का अपहरण

जेएनयू के सेंटर फ़ॉर अफ़्रीकन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर अजय कुमार दुबे कहते हैं कि जैसा इस समूह का नाम है, वैसा ही इसका काम भी है.

वह बताते हैं, "बोको हराम का मतलब होता है- नो टू वेस्टर्न एजुकेशन. आज लड़कियां आधुनिक शिक्षा पाना चाहती हैं. ऐसे में यह संगठन लोगों को यह बताना चाहता है कि आप लड़कियों को पढ़ाओगे तो हम उन्हें उठा लेंगे क्योंकि यह हमारे धर्म के ख़िलाफ़ है. इसीलिए वे लड़कियों पर हमले करते हैं."

क्या किया जाता है इन लड़कियों के साथ?

ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि बोको हराम अपने क़ब्ज़े में आए ग्रामीणों से मज़दूरी करवाता है. लड़कों को हथियारबंद लड़ाके बना दिया जाता है और लड़कियों को इन लड़ाकों की पत्नी बना दिया जाता है. किडनैप की गई छात्राओं को सेक्स स्लेव से लेकर आत्मघाती हमलावर तक बनाने में इस्तेमाल किया जाता है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ अफ़्रीकन स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार बताते हैं कि ख़ास तौर पर नाबालिग स्कूली छात्राओं का अपहरण करने के पीछे तीन कारण हैं.

वह कहते हैं, "नाइजीरिया के पूर्वोत्तर में बोको हराम का नियंत्रण है जहां चाड और नाइजर के साथ सीमा लगती है. दूसरे देशों में हथियार सप्लाई करने के लिए या फिर जो एक टेररिस्ट रूट है, वहां पर इन लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता है. दूसरा, बोको हराम का ड्रग्स का बड़ा कारोबार भी है. वहां भी इन लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता है. तीसरा, इन नाबालिग बच्चियों को धर्म के आधार पर पश्चिमी शिक्षा के ख़िलाफ़ किया जाता है, ताकि वे उनके लिए काम करें."

प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, चिबोक से अगवा हुई सभी लड़कियां अभी तक लौटी नहीं हैं

सरकार बेबस क्यों?

2014 वाली घटना के बाद एक बार फिर दबाची क़स्बे से छात्राओं का अपहरण हो जाना दिखाता है कि कहीं न कहीं नाइजीरिया की सरकार ख़ुद को इस संगठन के आगे बेबस पा रही है.

बोको हराम आख़िर कितना ताकतवर है जो यह स्कूलों से छात्राओं को उठा लेता है और कोई कुछ नहीं कर पाता?

डीयू के प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार बताते हैं, "नाइजीरिया में छह प्रांत बोको हराम के नियंत्रण में हैं और सरकार का यहां कोई प्रभाव नहीं. स्थानीय स्तर पर बोको हराम का ही प्रशासन चलता है. यहां पर इन्होंने इस्लामिक व्यवस्था के आधार पर राज चलाया है. लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है, तब भी गांव के ग़रीब लोग जान का ख़तरा होने के कारण कुछ नहीं बोलते. उन्हें चाहे-अनचाहे बोको हराम का समर्थन करना पड़ता है."

कुछ लड़कियां घर लौट आई हैं
इमेज कैप्शन, चिबोक से लापता हुईं कुछ लड़कियां घर लौट आई हैं

एक तरफ़ जहां ग़रीब लोग बेबस हैं, वहीं इस संगठन को समर्थन भी जनता से ही मिलता है. 1903 में उत्तरी नाइजीरिया, नाइजर और दक्षिणी कैमरून के इलाक़े जब ब्रेटिन के नियंत्रण में आ गए थे, तभी से मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में पश्चिमी शिक्षा का विरोध शुरू हो गया था.

100 साल से ज़्यादा का वक़्त बीत गया, लेकिन कई मुस्लिम परिवार अपने बच्चों को पश्चिमी शिक्षा वाले स्कूलों में नहीं भेजना चाहते. लेकिन ऐसा क्यों है? जेएनयू के प्रोफ़ेसर दुबे इसके लिए वहां की ग़रीबी को ज़िम्मेदार बताते हैं.

वह कहते हैं, "नाइजीरिया प्राकृतिक संपदा से भरपूर है. लेकिन बहुत-सी आर्थिक संपदा होने के बाद भी वहां बड़े समुदाय के पास आजीविका के साधन नहीं हैं. वे ग़रीब हैं. नाइजीरिया शुरू से ही धर्म और जनजातियों के नाम पर बंटा हुआ है. ग़रीबी ने इस विभाजन को और बढ़ा दिया है."

"बोको हराम यहां की ग़रीबी और अशिक्षा के कारण उपजा है, इसी के नाम पर पनप रहा है और धर्म के नाम पर समर्थन जुटाता है. यही कारण है कि नाइजीरिया के कई प्रांतों में आज शरिया कानून चलता है."

बोको हराम

कैसे दूर होगा संकट?

दिल्ली विश्वविद्लाय के प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार बताते हैं कि बोको हराम आज एक बहुत बड़ा आर्थिक गिरोह बन गया है.

वह कहते हैं, "आज खरबों डॉलर तेल का व्यापार इसके माध्यम से हो रहा है. साथ ही पश्चिमी अफ़्रीका से होते हुए सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान तक फैले हथियारों के नेटवर्क में बोको हराम भी एक सीढ़ी है. इसने अन्य आतंकी संगठनों के साथ भी गिरोह बनाया हुआ है."

नाइजीरिया की सरकार ने सैन्य कार्रवाई से बोको हराम को कुछ हद तक कमज़ोर तो किया है, लेकिन उसे ख़ास सफलता नहीं मिल रही.

प्रोफ़ेसर दुबे बताते हैं, "बोको हराम से मुक़ाबले के लिए अफ्रीकी यूनियन और अमरीका ने भी अपनी सेनाएं भेजी थीं, लेकिन उन्हें ज़्यादा क़ामबायी नहीं मिली क्योंकि उन्हें स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं मिला."

"नाइजीरिया में ईसाइयों का वर्चस्व है, लेकिन वे मोहम्मद बुहारी का समर्थन करते हैं, ताकि वह बोको हराम के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें तो विरोध न हो. मगर यह मामला सेना का नहीं, ग़रीबी और अशिक्षा का है. इसी कारण बोको हराम बना हुआ है."

बोको हराम से बरामद गोला बारूद

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डीयू के प्रोफ़ेसर सुरेश कुमार बताते हैं कि नाइजीरिया में बोको हराम के ज़रिये जब तक खरबों डॉलर का तेल का कारोबार चलता रहेगा, तब तक उसे हटाना मुश्किल होगा.

वह कहते हैं, "मोहम्मद बुहारी की सरकार ने एयरस्ट्राइक के ज़रिए इसके नियंत्रण को कम किया है लेकिन वास्तविकता यह है कि वहां की राजनीति और आर्थिक शक्ति बोको हराम के नियंत्रण में हैं. इसलिए वह कमज़ोर हो नहीं रहा. खरबों डॉलर के तेल का यह कारोबार यूं ही चलेगा तो इसमें कई लोगों के हित निहित हैं. फिर वे पश्चिमी देशों के या दूसरे देशों के हों, इसी कारण इसमें सफलता नहीं मिल पा रही."

वीडियो कैप्शन, अग़वा हुई लड़की की आपबीती

नाइजीरिया में बोको हराम जैसे चरमपंथी संगठन को एक तरफ़ जहां ग़रीबी और अशिक्षा से ताकत मिल रही है. वहीं, दूसरी तरफ़ तेल और हथियारों के अवैध कारोबार से यह और मज़बूत होता जा रहा है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे लेकर गंभीर रुख़ अपनाना होगा.

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