एफ़बीआई पर आरोप, ट्रंप के ख़िलाफ़ किया ताकत का दुरुपयोग

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अमरीकी कांग्रेस ने एक विवादित ज्ञापन को सार्वजनिक कर दिया है जिसमें अमरीकी ख़ुफ़िया विभाग एफ़बीआई पर अपनी ताकत का दुरूपयोग करने का आरोप लगाया गया है.
ये मामला 2016 में हुए अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में रूस के कथित दख़ल के संबंध में मौजूदा अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की जांच से जुड़ा है.
इस ज्ञापन को रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने तैयार किया है और इसमें कथित तौर पर 2016 में ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ख़ुफ़िया निगरानी से संबंधित जानकारी शामिल होने की बात कही गई है.

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डेमोक्रेटिक पार्टी इस ज्ञापन के सार्वजनिक किए जाने के सख़्त ख़िलाफ़ है. पार्टी का कहना है कि खुफ़िया जानकारी पर आधारित इस ज्ञापन को सार्वजनिक कर ट्रंप के ख़िलाफ़ चल रही जांच को भटकाने की कोशिश की जा रही है.
डेमोक्रेट्स के विरोध के बीच सदन के स्पीकर रिपब्लिकन पार्टी के पॉल रायन के कहा है कि स्पेशल काऊंसलर रॉबर्ट मूलर के नेतृत्व में हो रही जांच पर इस ज्ञापन के सार्वजनिक किए जाने का कोई असर नहीं पड़ेगा.
उनका कहना है कि कांग्रेस का कर्तव्य है वो इस बात सुनिश्चत करें कि किसी अमरीकी नागरिक पर निगरानी करने संबंधी ताकतों का दुरूपयोग ना किया जाए.
एफ़बीआई का कहना है इसमें कई तथ्यात्मक जानकारियों के बारे में नहीं बताया गया है जो इसकी सटीकता प्रभावित करते हैं.

रिपब्लिकन कांग्रेस कर्मचारियों द्वारा लिखे गए विवादित ज्ञापन पर पिछले कुछ दिनों से विवाद जारी है. एफ़बीआई समेत न्याय विभाग, विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इसके सार्वजनिक करने को लेकर विरोध जताया था.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने आला अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि वो एफ़बीआई और न्याय विभाग के द्वारा की जा रही जांच का राजनीतिकरण कर रहे हैं और इसके ज़रिए रिपब्लिकन पार्टी की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.

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शुक्रवार को डोनल्ड ट्रंप ने इस विवादित ज्ञापन को सार्वजनिक करने की अनुमति दी और इसे "शर्मनाक़" कहा.
दस्तावेज़ में दी गई जानकारी के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि "कई लोगों को खुद पर शर्म आनी चाहिए."
ये गुप्त दस्तावेज़ आखिर है क्या?

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सोमवार को हाउस ऑफ़ इंटेंलिजेंस कमिटी ने इस ज्ञापन को मंज़ूर किया था, बाद में शुक्रवार को ट्रंप ने इसको सार्वजनिक करने की इजाज़त दी.
रिपब्लिकन पार्टी के तैयार किए गए इस ज्ञापन में न्याय विभाग और एफ़बीआई की तरफ से ट्रंप के निकट सहयोगी कार्टर पेज के खिलाफ़ निगरानी करने के लिए वारंट की मांग की "वैधता" पर सवाल खड़े किए गए हैं.
इसमें "अमरीकी नागरिकों को बचाने के लिए बनाई गई कानूनी प्रक्रियाओं का दुरूपयोग किए जाने का ब्योरा है, जो चिंतित करने वाला है."

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इस ज्ञापन में कहा गया है कि एफ़बीआई और न्याय विभाग ने जज को यह नहीं बताया कि वॉरंट के अनुरोध के लिए दी गई दलील एक विवादित दस्तावेज़ (ट्रंप डोसियर) पर आधारित था.
इस विवादित दस्तावेज़ का संकलन पूर्व ब्रितानी ख़ुफ़िया एजेंट क्रिस्टोफर स्टील ने किया था और इसके लिए ज़रूरी धन का कुछ हिस्सा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रही डेमोक्रेटिक नेता हिलेरी क्लिंटन के अभियान के माध्यम से आया था. इसका उद्देश्य ट्रंप के चुनावी अभियान और रूस के बीच कथित संबंधों के बारे में आंकड़ों की पड़ताल करना था.
विवाद में शामिल महत्वपूर्ण लोग कौन हैं?

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कार्टर पेज - 46 वर्षीय कार्टर पेज को एफ़बीआई ने इलेक्ट्रोनिक सर्वीलांस पर रखा गया था. ट्रंप के चुनाव प्रचार में वो विदेश नीति सलाहकार की भूमिका में थे और उन्होंने 2016 में कई बार रूस का दौरा किया.
ट्रंप से संबंधित विवादित डोसियर में उन्होंने दृढ़ता से इन आरोपों से इनक़ार किया है कि उन्होंने रूसी अधिकारियों और ट्रंप के प्रचार के लिए मध्यस्थता की थी.

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डेविन न्यूनेस - 44 साल के डेविन हाऊस इंटेलिजेंस पैनल के अध्यक्ष हैं. डेविन पर इस ज्ञापन को बनाने का ज़िम्मा था जिसे अब सार्वजनिक कर दिया गया है.
वो काफ़ी समय से राष्ट्रपति ट्रंप के दावे की जांच कर रहे थे कि ओबामा प्रशासन उनकी निगरानी करवा रहा था.

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रॉड रॉज़ेन्सटाइन - 53 वर्षीय के रोड रॉज़ेन्सटाइन को पिछले साल अप्रैल में डिप्टी अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया था.
वो किसी नागरिक पर निगरानी करने के लिए आवेदनों की अनुमति के विभिन्न चरणों में शामिल थे.
सीएनएन ने रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में राष्ट्रपति ट्रंप ने उनकी ईमानदारी पर सवाल खड़े किए थे.
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