BBC SPECIAL: मोदी से मिलने मोशे इसराइल से भारत आ रहा है

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवादाता, अफुला (इसराइल)
मुंबई में 2008 में हुआ चरमपंथी हमला याद है? इस हमले में एक दो साल का यहूदी बच्चा मोशे यतीम हो गया था. बंदूकधारियों ने उसके माता पिता को उसकी नज़रों के सामने मार डाला था.
उस दिल को दहला देने वाले मंज़र में नज़र आने वाला वो दो साल का रोता बच्चा मोशे होल्ट्ज़बर्ग अब 11 साल का विश्वास से भरा बालक बन चुका है.
मैं इसराइल के शहर अफुला में उसके घर उससे मिलने गया. वो अपने स्कूल गया था. वैसे भी उसकी परवरिश करने वाले उसके नाना-नानी नहीं चाहते थे कि वो मीडिया वालों के सामने आए क्योंकि उसे सदमे से निकलने में सालों लग गए थे.

हमले से पहले उसके पिता ग़ाबी और मां मुंबई के एक यहूदी केंद्र चबाड हाउस में सात साल से काम कर रहे थे. मोशे का जन्म उसी घर में हुआ था. एक तरह से वो मुंबई का बच्चा है.
नैनी की भूमिका
हमला करने वालों ने बेबी मोशे की जान बख़्श दी थी. उस वक्त उसकी नैनी ने उसे बचाने में अहम भूमिका अदा की थी.
उस हमले के बाद सोमवार को वो पहली बार मुंबई के उसी घर में लौट रहा है. वो इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के साथ आए डेलिगेशन का हिस्सा होगा. उसके साथ उसकी आया सैंड्रा और नाना-नानी भी शामिल होंगे.

मोशे एक धार्मिक यहूदी परिवार का बच्चा है और उसकी परवरिश उसी माहौल में हो रही है. उसके पिता एक रैबाई यानी धर्मगुरु थे. उसके नाना भी एक रैबाई हैं.
नाना रैबाई रोज़ेन्बर्ग मुझे मोशे के कमरे ले गए जहां उसके बिस्तर के ऊपर दीवार पर उसके माता-पिता की तस्वीर लगी थी. उन्होंने कहा, "मोशे बॉय रोज़ रात को सोने से पहले इस तस्वीर को देखता है और उन्हें गुड नाइट कहके सो जाता है. सुबह उठने के बाद पहले उन्हें प्रणाम करता है."
ज़ाहिर है वो अपने माता-पिता की कमी को बहुत महसूस करता है. उनकी मौत के बारे में उसे धीरे-धीरे बताया गया. अब उसे सारी तफ़सील पता है.
मोशे की ज़िंदगी तीन लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है. नाना-नानी और नैनी सैंड्रा सैम्यूअल. सैंड्रा गोवा की रहने वाली हैं, लेकिन अब वो येरूशलम में रहती हैं.

पिता की लाश के बीच
सैंड्रा ने ही हमले में अपने जान पर खेल कर मोशे की जान बचाई थी. दो साल का मोशे अपने माता और पिता की लाशों के बीच खड़ा रो रहा था.
सैंड्रा बेस्मेंट में छिपी थी क्योंकि बंदूकधारी अब भी इमारत के अंदर गोलियाँ चला रहे थे. बच्चे के रोने की आवाज़ सुनकर सैंड्रा तहख़ाने से निकली और बच्चे को वहाँ से उठाकर घर के दूसरे कोने में छिप गई.
मोशे के नाना कहते हैं अगर सैंड्रा ने दिलेरी ना दिखाई होती तो आज उनका नाती भी ज़िंदा ना होता. वो कहते हैं, "सैंड्रा हमारे परिवार का हिस्सा है."
इसराइल की सरकार ने सैंड्रा को वहां रहने की इजाज़त दी है. अगले हफ़्ते सैंड्रा और मोशे एक बार फिर उसी घर में होंगे और बुधवार को नेतन्याहू का वहाँ स्वागत करेंगे.
सैंड्रा ने ये कह कर हमसे बात नहीं की कि उसे मीडियावालों से बात करने को मना किया गया है. लेकिन रोज़ेन्बर्ग कहते हैं कि सैंड्रा और मोशे के लिए मुंबई का सफ़र एक भावुक यात्रा होगी.
मोशे के नाना के अनुसार मोशे मुंबई की यात्रा को लेकर काफ़ी उत्साहित है.

मोदी से कहा था- आई लव यू
हमने बहुत कोशिश की हमरी मुलाक़ात मोशे से हो जाए लेकिन उसकी नानी ने सलाह दी कि हम उससे ना मिलें. उसके नाना हमें मोशे के कमरे में ज़रूर ले गए.
वहाँ उसकी ख़ुद की तस्वीरें थीं जब वो दो बरस का था. उसकी हाल की तस्वीरें भी थीं. और उसके पिता के बचपन की तस्वीरें भी दीवारों पर लगी थीं. दिलचस्प बात ये थी कि उन तस्वीरों में उसके पिता बिलकुल आज के मोशे की तरह लग रहे थे. लेकिन सबसे अहम तस्वीर उसके सिरहाने उसके माता-पिता की तस्वीर थी जिसे वो रोज़ देखता है.
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीछे साल के मध्य में इसराइल के दौरे पर आए थे. तब वो मोशे से मिले थे. मोशे के नाना कहते हैं, "मोशे बॉय ने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा आई लव यू."
मोशे से मिलने के बाद प्रधानमंत्री ने उसे और सैंड्रा सहित उसके परिवार को भारत आने का न्योता दिया था.

इमेज स्रोत, MEAINDIA @Twitter
आज मोशे अपने माता-पिता के साथ हुए हादसे के सदमे से बाहर आ चुका है. उसके नाना कहते हैं वो हँसमुख और आत्मविश्वास से भरा है. लेकिन जब उसे मुंबई से इसराइल लाया गया था तो उसकी हालत ठीक नहीं थी.
उन दिनों को याद करते हुए वो कहते हैं, "नौ साल पहले वो जब अफुला अपने घर वापस आया तो दिन भर रोता रहता था. वो कहता था मुझे मां चाहिए. मेरे पापा कहां हैं. मेरी मम्मी कहां हैं."
वो हर वक़्त सैंड्रा से चिपका रहता था. धीरे-धीरे उसने नाना और नानी के साथ बात करना शुरू किया.
रैबाई रोज़ेन्बर्ग के लिए ये कुछ ऐसा था जैसे वक्त की सुई वापस घूम गई हो. पहले उन्होंने मोशे के पिता की परवरिश की लेकिन तब वो ख़ुद जवान थे. और अब वो मोशे की परवरिश कर रहे हैं लेकिन अब वो जवान नहीं रहे. शायद इसीलिए उन्होंने मज़ाक़ में कहा, "उसकी परवरिश करने से मेरी जवानी वापस आ गई है."

सैंड्रा अब हफ़्ते में एक बार आती है और सारा दिन मोशे के साथ गुज़ारती है. आने में कभी देर हो जाए तो नाना के अनुसार मोशे उतावला हो जाता है.
वो बताते हैं "मोशे फ़ोन करके कहता है सैंड्रा तुम कहाँ हो. देर क्यों हुई. आ रही हो ना? तुम क्यों जल्दी नहीं आती?"
मोशे के पिता और नाना दोनों रैबाई बने थे. क्यो मोशे भी रैबाई बनेगा?
इस सवाल पर मोसे के नाना कहते हैं, "अभी वो छोटा है. जब 20-22 साल का हो जाएगा तो हो सकता है वो अपने पिता की तरह रैबाई बनकर मुंबई के चबाड़ हाउस में जाए और लोगों की सेवा करे."













