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पाकिस्तानी इंसानियत का भारत ने तीन सैनिकों को मारकर दिया जवाब: पाक मीडिया
- Author, उपासना भट्ट
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
पाकिस्तानी मीडिया ने कुलभूषण जाधव के परिवार के साथ बदसलूकी के भारत के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
पाकिस्तान में क़ैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव की सोमवार को इस्लामाबाद में उनके परिवार से मुलाक़ात हुई थी. जिसके बाद भारत ने आरोप लगाए थे कि वहां जाधव की मां और पत्नी से चूड़ी और मंगलसूत्र उतरवा लिए गए थे और उन्हें मातृभाषा मराठी में भी बात करने नहीं दिया गया.
पाकिस्तानी अख़बारों ने भारत सरकार की ओर से की गई आलोचना को पहले पन्ने पर जगह दी है.
कुछ अख़बारों ने तो ये भी कहा है कि पाकिस्तान के इस सहानुभूति संकेत का भारत ने नियंत्रण रेखा पर तीन पाकिस्तानी सैनिकों का क़त्ल करके जवाब दिया है.
भारत की ओर से कहा गया था कि 'मुलाक़ात के दौरान माहौल धमकाने जैसा था' और इस 'मुलाक़ात की प्रक्रिया में भरोसे' की कमी थी. पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेज़ी और उर्दू अख़बारों ने अपने संपादकीयों में कहा है कि ये मुलाक़ात मानवीय आधार पर करवाई गई थी.
पाकिस्तान के अख़बार डेली टाइम्स ने शीर्षक लगाया, 'पाकिस्तान ने जाधव परिवार का अपमान कियाः भारत', डॉन ने लिखा, "जाधव परिवार पर लगी बंदिशों ने नया विवाद खड़ा किया."
द न्यूज़ ने लिखा, "भारत का आरोप जाधव की मां और बहन का पाकिस्तान में हुई बदसलूकी", द नेशन ने लिखा, "भारत ने जाधव परिवार की मुलाकात पर शिकायत की"
सेना समर्थक 'पाकिस्तान ऑब्ज़र्वर' ने लिखा
"बावजूद इसके कि भारतीय नौसेना के कमांडर कुलभूषण जाधव कोई सामान्य क़ैदी या अपराधी नहीं है बल्कि एक जासूस और हत्यारे हैं, पाकिस्तान ने न सिर्फ़ उनके परिवार की मुलाकात की अनुमति दी बल्कि उनकी मां और पत्नी के साथ मुलाक़ात का इंतज़ाम किया और चालीस मिनट की मुलाकात के बाद दोनों संतुष्ट होकर भारत लौटीं. पाकिस्तान की ओर से एकतरफ़ा संकेतों की भी एक सीमा है. पाकिस्तान की सरकार अपनी लोकप्रियता की क़ीमत पर ये क़दम उठा रही है क्योंकि पाकिस्तान के लोग पाकिस्तान और देश के सम्मान के साथ किसी भी समझौते के ख़िलाफ़ हैं.
'द न्यूज़' ने लिखा
"छोटी सी मुलाक़ात जिसे आयोजित करने में भारत के साथ कई महीने वार्ता हुई, एक दुर्लभ सद्भावना संकेत हैं, वो भी ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच द्वपक्षीय रिश्ते लगभग ख़त्म हो हो गए हैं. जाधव की परिवार से मुलाक़ात करवाना न सिर्फ़ एक सही काम था बल्कि इससे भारत का रुख नरम होना चाहिए था. लेकिन जिस तरह से भारत ने इसकी निंदनीय व्याख्या की है उससे लगता है कि जैसे पाकिस्तान ने मुलाक़ात जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत में अगली सुनवाई से पहले सिर्फ़ कुछ प्वाइंट स्कोर करने के लिए करवाई है."
उर्दू अख़बार'जंग' ने लिखा
पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले जंग अख़बार ने लिखा, "जाधव और उसके परिवार की मुलाक़ात करवाने के पाकिस्तान के मानवीय पक्ष का भारत ने नियंत्रण रेखा पर तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मारकर दिया है. इससे साबित होता है कि भारत इस क्षेत्र में शांति नहीं चाहता है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत की आक्रामकता का संज्ञान लेना चाहिए और कश्मीर के मुद्दे का संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत समाधान करवाने के लिए काम करना चाहिए."
सेना समर्थक उर्दू अख़बार 'जहां पाकिस्तान' ने लिखा
सेना समर्थक उर्दू अख़बारों में भी ऐसी ही भावनाएं व्यक्त की गईं. अख़बार में लिखा गया कि एक ओर जहां पाकिस्तान मुलाकात करवाकर मानवीय संवेदना का उदाहरण पेश कर रहा था, दूसरी ओर बर्बर भारतीय सेना ने कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी करके तीन पाकिस्तानी सैनिकों की जान ले ली. अख़बार ने लिखा, "भारत इस भ्रम में है कि वो अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान को अस्थिर कर सकता है और अमरीका के समर्थन से इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व क़ायम कर सकता है."
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