ट्रंप ने बदला मुफ़्त गर्भनिरोधक नियम, क्या होगा असर?

महिला प्रदर्शनकारी

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इमेज कैप्शन, मार्च की इस तस्वीर में महिलाएं सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन कर रही हैं. ओबामा काल के इस नियम के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई थी.

अमरीका में ट्रंप प्रशासन ने महिलाओं को मुफ़्त गर्भनिरोधक मुहैया कराने के नियम में बदलाव किया है.

इस बदलाव का असर लगभग छह करोड़ अमरीकी महिलाओं पर होगा.

अमरीका के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि कंपनियों के मालिक और इंश्यूरेंस कंपनियां अब अपनी महिला कर्मचारियों को मुफ़्त गर्भनिरोधक मुहैया कराने के लिए बाध्य नहीं होंगे.

ओबामा काल के इस नियम के तहत कंपनियों को महिलाओं के मुफ़्त गर्भ निरोधक मुहैया कराने होते थे.

ये कंपनियां जन्म नियंत्रण के लिए मुहैया करायी जाने वाली गर्भनिरोधक गोलियों और दूसरे तरीकों से 'धार्मिक' और 'नैतिक' आधार पर छूट पा सकती हैं.

ट्रंप प्रशासन ने कहा कि इस बदलाव के बावजूद ज़्यादातर महिलाओं की गर्भनिरोधक तक पहुंच रहेगी.

राष्ट्रपटि ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में इस नियम को ख़त्म करने का वादा किया था.

महिला प्रदर्शनकारी

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इमेज कैप्शन, ननों ने ओबामाकाल के इस नियम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

अमरीका की सिविल लिबर्टीज़ यूनियन और नेशनल वूमेन लॉ सेंटर ने कहा है कि वह नियम में इस बदलाव को क़ानूनी चुनौती देंगे.

सीनेटर मैगी हसन ने ट्वीट करते हुए कहा, "जनवरी में दसियों लाख महिलाओं ने सड़क पर अपनी आवाज़ बुलंद की थी. वो ऐसी महिला विरोधी नीतियों के लिए नहीं खड़ी होंगी."

ट्रंप प्रशासन के फ़ैसले का बचाव करते हुए वाइस हाउस की प्रेस सचिव साराह सेंडर्स ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बारे में हुए पहले संशोधन और धर्म के अधिकार का समर्थन किया. मैं समझ नहीं पा रही हूं कि ये मुद्दा ही क्यों है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को वैध ठहराया है. राष्ट्रपति ट्रंप ऐसे इंसान हैं, जो संविधान में यकीन करते हैं. अगर लोगों को संविधान की कोई बात पसंद नहीं, तो उन्हें कांग्रेस से उसे बदलने के लिए कहें."

कांग्रेस में वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता सदन के अध्यक्ष पॉल रायन ने इस फ़ैसले की तारीफ़ करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता के लिए ऐतिहासिक दिन कहा है.

क्यों लिया गया ये फ़ैसला

नियमों में बदलाव का ऐलान करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एक शोध का हवाला दिया है जिसमें बताया गया है कि गर्भनिरोधक तक आसान पहुंच की वजह से लोग 'सेक्स के दौरान जोख़िम उठा रहे हैं.

स्वास्थ्य विभाग ने उन रिपोर्टों को भी नकारा है जिनमें कहा गया है कि नियम में बदलाव की वजह से दसियों लाख महिलाओं की पहुंच गर्भनिरोधकों तक नहीं रहेगी.

अधिकारियों का तर्क है कि नए नियम के बाद बहुत कम नियोक्ता ही गर्भनिरोधक मुहैया कराना बंद करेंगे.

हालांकि कई स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंपनियां अपने कर्मचारियों के गर्भनिरोधकों के लिए पैसा नहीं ख़र्च करना चाहेंगी वो नए नियमों का फ़ायदा उठा सकती हैं.

गर्भावस्था की जांच कराती महिला

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महिलाओं पर हमला?

राष्ट्रपति के विरोधी इसे महिला अधिकारों पर हमला मान रहे हैं. अमरीका में गर्भनिरोधकों को कई वजह से इस्तेमाल किया जाता है. अनचाहा गर्भ रोकना उनमें से एक है. इनका इस्तेमाल एंडोमेट्रियोसिस या पोलिसिस्टिक ओवोरियन सिंड्रोम जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी किया जाता है.

द अमेरिकन कांग्रेस ऑफ़ ऑब्स्टेट्रीसियंस एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स ने इसका कड़ा विरोध किया है. संगठन का कहना है कि इस फ़ैसले से मरीज़ों के हित प्रभावित होंगे और इसका असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर होगा.

न्यूयॉर्क में बीबीसी संवाददाता नादा तौफ़ीक के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप की महिलाओं के जिस्म और स्वास्थ्य का राजनीतिकरण करने को लेकर आलोचना हो रही है.

क्या ट्रंप को राजनीतिक क़ीमत चुकानी पड़ेगी?

ट्रंप प्रशासन के इस फ़ैसले का धार्मिक समूह स्वागत करेंगे. हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के ईसाई समर्थकों के बाहर इसका विरोध हो सकता है.

कुछ अनुमानों के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने जब ये नियम लागू किया था तब पहले साल में ही महिलाओं के गर्भ निरोधकों पर होने वाले ख़र्च में 1.4 अरब डॉलर की बचत महिलाओं के लिए हुई थी.

इस नए नियम का असर अमरीका की महिलाओं की वित्तिय हालत पर पड़ सकता है. महिलाएं अगली बार वोट देने जाएंगे तब वो ये बात याद रखेंगी.

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