ग्राउंड रिपोर्ट: सबसे ख़तरनाक कोरियाई सीमा का हाल

- Author, ऐना फोस्टर
- पदनाम, रेडियो 5 लाइव
यहां देर रात के एक बजे हैं और सियोल की चमकदार गगनचुंबी इमारतों की रौशनी में लोग तंदूर घेरकर बैठे ठिठोली कर रहे हैं और वहां की देसी शराब सोजू पीते हुए बातें कर रहे हैं.
लगता नहीं कि यहां किसी के दिमाग में यह बात है कि ये जगह दुनिया की सबसे ख़तरनाक सरहदों में से एक से सिर्फ 56 किलोमीटर दूर है.
बीते सोमवार को ही उस सरहद पर अमरीका और दक्षिण कोरियाई सेनाओं ने अपने बमवर्षक और लड़ाकू जहाज़ों के साथ युद्ध का अभ्यास किया है.
यह उत्तर कोरिया के ताज़ा मिसाइल परीक्षणों के जवाब में ताक़त का प्रदर्शन था. लेकिन दुनिया के दूसरे हिस्सों में जैसा डर है, वह यहां बहुत नज़र नहीं आता.
हाल के समय में दक्षिण कोरिया में मूड के बारे में सबसे विचित्र बात यही है.
फिर बीते कुछ महीनों में यहां के लिए दुनिया का ध्यान और डर क्यों बढ़ा है?
जोख़िम भरी ज़िंदग़ी

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यहां के लोग ख़तरे को जानते हैं, पहचानते हैं और लंबे समय से उसके साथ जी रहे हैं.
दक्षिण और उत्तर के बीच विवाद नया नहीं है. तकनीकी रूप से दोनों देश युद्ध जैसे हालात में रहे हैं और अब युद्धविराम जैसी स्थिति में रहते हैं.
सियोल में उत्तर कोरियाई ख़तरे से लोग पीढ़ियों से दो-चार रहे हैं. वे नौजवान जिन्होंने कभी जंग नहीं देखी, उनके लिए यह एक कोरी धमकी है. चूंकि वे इसे देख नहीं सकते तो इसका उनके अपने जीवन पर कोई असर नहीं है और उस बारे में सोचते हुए वो अपना बहुत समय ज़ाया नहीं करते.
दो दुनिया का टकराव

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कोरियाई प्रायद्वीप विषमता वाली जगह है. कुछ ही दशकों में दक्षिण करिया भारी तबाही से उबरकर एशिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.
आधी रात के बाद भी दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग की इमारत की आधी बत्तियां जल रही हैं और बहुत सारे लोग अब भी डेस्क पर काम कर रहे हैं. यह सारी समृद्धि कड़ी मेहनत से आती है.

लेकिन उत्तर कोरिया में समृद्धि के प्रकट संकेत नहीं मिलते. फोन पर 'मैप्स' एप्लीकेशन से देखने पर एक जैसा विस्तार दिखता है. सड़कें नहीं हैं, शहर नहीं हैं. सरहद के उस पार एक अंधेरा रहस्य है.
सीमा के पास ड्राइव करते हुए आप दक्षिण कोरियाई सेना के युद्धाभ्यास की गर्जना सुन सकते हैं. यह दो दुनिया का टकराव है.
आपात स्थिति में बंकर में शरण

असैन्यीकृत इलाक़े से सबसे क़रीब जो शहर है, वह दोनों देशों को बांटने वाली बाड़ से करीब पांच किलोमीटर दूर है. यहां के निवासियों के पास यहां खेती करने की विशेष अनुमति है.
77 साल के मिस्टर ओंग ने मुझे वह जगह दिखाई, जहां उन्होंने एक बारूदी सुरंग में अपने दाएं पांव की सारी उंगलियां खो दी थीं.
उस दिन को याद करते हुए वह बताते हैं कि उन्होंने एक 'क्लिक' की आवाज़ सुनी और नीचे देखा तो उनके पांव की उंगलियां गायब थीं. लेकिन वह भाग्यशाली थे. गांव के नौ लोग बारूदी सुरंग के धमाके का शिकार हुआ, लेकिन वह इकलौते थे जिनकी जान बच पाई.

सियोल के लोग आपात स्थिति में सबवे स्टेशन और रिहाइशी इलाकों के बेसमेंट में शरण लेते हैं. लेकिन यहां इसके लिए ख़ास बंकर बनाए गए हैं. ज़मीन के नीचे दो फ़्लोर हैं और इसकी दीवारें 20 सेंटीमीटर मोटी हैं.
कोने में एक आलमारी है, जिसमें पारदर्शी पॉलीथीन में प्राथमिक उपचार, हथौड़े, टॉर्च और सीटियां रखी हुई हैं. आपात स्थिति में इनका इस्तेमाल किया जाएगा.
लेकिन सब कुछ व्यवस्थित है. गांव के सबसे बुज़ुर्ग शख़्स और इस बंकर के प्रभारी ली कहते हैं, "अब तक कोई असल आपात स्थिति हमार सामने नहीं आई है. अगर हमें उनकी (इमरजेंसी किट) ज़रूरत पड़ी तो यहां दीवार पर इन्हें इस्तेमाल करने के सारे निर्देश लिखे हैं."
'उन्हें अमरीका से ही समस्या है'

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आपात स्थिति नहीं है तो क्या युद्ध के ख़तरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है?
ली कहते हैं, "मुझे चिंता हो रही है. पिछले ही हफ़्ते शहर से कोई जांच करने आया था."
हालांकि कई जानकार मानते हैं कि उत्तर कोरिया की निगाहें इस दक्षिणी सीमा से कहीं आगे किसी बड़ी चीज़ पर हैं.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री माइकल फैलन ने कहा था कि प्योंगयांग से लॉस एंजेलिस के मुकाबले लंदन क़रीब है.
इस बारे में पूछे जाने पर दक्षिण कोरियाई पत्रकार जॉन्जेन किम हैरान हो जाते हैं. वह कहते हैं, "मुझे याद नहीं आता कि एक भी बार किम जोंग-उन ने ब्रिटेन को धमकी दी हो. उन्हें अमरीका से ही समस्या है."
इस बारे में कोई शक नहीं है.
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