मूसल का युद्ध: कितना हुआ नुकसान-कितने लोग मरे

इराक़

इमेज स्रोत, Getty Images

इराकी सेना बीते आठ महीनों से कथित इस्लामिक स्टेट को मूसल से बाहर निकालने के लिए सैन्य अभियान चला रही है. अब ये अभियान अपने अंतिम दौर में है.

इराकी सेना बीती जनवरी में ही पूर्वी मूसल को चरमपंथियों से हासिल कर चुकी है. इसके बाद आईएस लड़ाकों को भारी आबादी वाले पुराने मूसल में जाने के लिए मजबूर कर दिया गया है.

इराकी सेना के कमांडरों के मुताबिक, जल्द ही जीत की घोषणा की जा सकती है.

बीते अक्तूबर के बाद से इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मूसल से लाखों लोग भाग चुके हैं. लेकिन सयुंक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, तकरीबन 20 हज़ार आम लोग अभी भी मूसल में फंसे हो सकते हैं.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

इसके साथ ही चेतावनी जारी की गई है कि ये संभव है कि आईएस इनमें से कुछ लोगों को मानव ढाल के रूप में भी इस्तेमाल कर रहा हो.

आखिर मूसल में चल क्या रहा है?

इराक़ी सेना के हज़ारों सैनिक, कुर्दिश पेशमर्गा लड़ाके, सुन्नी अरब आदिवासी और शिया विद्रोही लड़ाके मूसल को आईएस के कब्जे से छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

इन सुरक्षाबलों को अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के युद्धक विमानों और सैन्य सलाहकारों का सक्रिय समर्थन हासिल है.

साल 2014 में आईएस लड़ाकों ने इराक और सीरिया में बढ़त बना ली थी. इसके बाद बीते साल 17 अक्टूबर, 2016 को ये अभियान शुरू किया गया.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

इस अभियान की शुरुआत बेहद तेज़ थी.

सुरक्षाबलों ने उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिशाओं से बढ़त लेते हुए तमाम कस्बों और गांवों को भारी संघर्ष के बावजूद चरमपंथियों से आज़ाद करा लिया.

लेकिन शहर की सीमाओं में घुसने के बाद ये रफ़्तार धीमी पड़ गई क्योंकि यहां इराकी सेना स्नाइपर्स, आत्मघाती हमलावरों और शेलफ़ायर का निशाना बन रही थी.

इराक की सरकार ने पिछले जनवरी में ही पूर्वी मूसल के पूरी तरह से आज़ाद होने की घोषणा कर दी थी. लेकिन पश्चिमी मूसल की संकरी सड़कों पर सुरक्षाबलों को भारी चुनौती का सामना करना पड़ा.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

आईएस के कब्ज़े में कितनी जगह?

आईएचएस कॉन्फिलेक्ट मॉनिटर के विश्लेषण के मुताबिक, आईएस लड़ाकों ने अभियान शुरू होने के बाद से अपने क्षेत्र के एक अहम हिस्से को गंवा दिया है.

हालांकि, पश्चिमी मूसल में इराकी सेना को कड़ी चुनौती मिलने के बाद उनका नुकसान होना कम हो गया है.

लेकिन जुलाई की शुरुआत में इराकी सेना ने चरमपंथियों को मूसल शहर के एक कोने में धकेल दिया है जहां वे अपना आखिरी मोर्चा संभाल रहे हैं.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

ये संभव है कि इस हिस्से में कुछ दर्जन चरमपंथी ही हों लेकिन संकरे रास्तों और घरों से स्नाइपर्स और आत्मघाती हमलावरों को सेना को निशाना बनाने का मौका मिलता है.

इस क्षेत्र से आ रहीं विरोधाभासी ख़बरों से भी इराकी सेना की प्रगति का आकलन करना मुश्किल है.

सैटेलाइट तस्वीरों से मूसल शहर के आधारभूत ढांचे, खासकर एयरपोर्ट, पुलों और पुरातात्विक साइटों को भारी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है.

मूसल शहर को कितना नुकसान पहुंचा?

जेहादियों ने शहर के प्रमुख रास्तों पर बैरीकेड बनाए हैं और इमारतों को ढहा दिया है ताकि सुरक्षाबलों को आते हुए देखा जा सके.

इराकी सुरक्षाबलों के मुताबिक, मूसल की अल-नूरी मस्ज़िद को आईएस ने नेस्तनाबूद कर दिया है.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

वहीं, आईएस का कहना है कि ये मस्जिद अमरीकी हवाई हमले का शिकार हुई है.

अमरीका की भू-राजनीतिक खुफ़िया कंपनी स्ट्रेटफॉर ने अक्टूबर 2016 में दिखाया था कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने किस तरह शहर के हवाई-अड्डों को नष्ट करके उनमें गढ्ढे कर दिए हैं.

तस्वीरों से ये भी पता चला है कि जेहादियों ने किस तरह शहर के मुख्य रास्तों, खासकर एयरपोर्ट के उत्तर में, बैरिकैड बना दिया है.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

स्ट्रेटफॉर के विश्लेषक के मुताबिक, ये बैरीकेड ढहाए गए घरों की दीवारों से निकले कंक्रीट ब्लॉक्स और मलबे से बनाए हैं.

इसी बीच गठबंधन सेनाओं ने हवाई हमला करके टिगरिस नदी के किनारे मूसल शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को मिलाने वाली इमारतों को नेस्तनाबूद कर दिया है ताकि जेहादी एक बार फिर पूर्वी मूसल में अपने पैठ न बना सकें.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

गठबंधन सेनाओं ने बीती अक्टूबर और नवंबर में शहर के बीचो-बीच स्थित पांच में से चार पुलों को पूर्वी मूसल पर जेहादियों के बीच पकड़ सीमित करने के उद्देश्य से ध्वस्त कर दिया था.

इसके बाद दिसंबर में अमरीकी हवाई हमले में मूसल शहर के पुराने पुल को ध्वस्त कर दिया गया.

अमरीकी हवाई हमले ने अल-हुर्रया पुल को बीते अक्टूबर में तोड़ दिया था लेकिन आईएस ने पश्चिमी ओर एक बैरियर लगा दिया .

नवंबर 2016 में अमरीकी हवाई हमले में चौथे पुल को भी नुकसान पहुंचाया लेकिन इसके बाद नुकसान पहुंचाकर पुल को चलने लायक नहीं छोड़ा गया.

मूसल

इराकी सेना के इंजीनियरों ने पूर्वी मूसल पर कब्ज़ा हासिल करने के बाद मई में टिगरिस नदी पर एक बहता हुआ पुल बनाया था जिससे इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ आख़िरी लड़ाई के लिए सैनिकों की तैनाती की जा सके.

शहर के पुनर्निर्माण में लगेंगे 1 बिलियन डॉलर

सयुंक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस शहर के आधारभूत ढांचे को दोबारा विकसित करने में एक बिलियन अमरीकी डॉलर से ज़्यादा का खर्च आएगा.

पेयजल, सीवर, बिजली सेवाओं के साथ-साथ स्कूलों और अस्पतालों को दोबारा खोलने में शुरुआती आकलन से दोहरा खर्च होगा.

अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी संस्था ने बताया है कि आठ लाख से ज्यादा लोग मूसल में अपने घर को छोड़कर चले गए हैं.

इनमें से ज़्यादातर लोगों ने नज़दीकी कैंपों में शरण ली है. वहीं, दूसरे लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ रहने चले गए हैं.

जनवरी में पूर्वी मूसल शहर पर कब्जे के बाद, बढ़ते पेयजल और खाद्य संकट को लेकर चिंता जताई गई थी.

मूसल

इमेज स्रोत, Getty Images

यूएन ने बीती जनवरी में कहा है कि मूसल में मरने वाले आधे से ज़्यादा लोग आम नागरिक हैं.

अक्तूबर से अब तक इस क्षेत्र में 2,463 लोग मारे जा चुके हैं और 1,661 घायल हुए हैं.

सयुंक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा था कि जून में उन्हें पश्चिमी मूसल से भाग रहे लोगों के इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों द्वारा मारे जाने की पुख़्ता जानकारी मिली थी. खबरों के मुताबिक, दर्जनों लोग इराकी और अमरीकी नेतृत्व वाले हवाई हमलों में मारे गए हैं.

इसके साथ ही मूसल से भागने वाले कई लोगों ने परिजनों, दोस्तों और पड़ोसियों को मरते हुए देखा और इस सदमे से गुजर रहे हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)