अमरीका ने कहा, क़तर के लिए अरब देशों की मांगें मानना कठिन

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अमरीकी सरकार ने क़तर का समर्थन करते हुए राजनयिक संकट खत्म करने के लिए अरब देशों की मांगों को मानना कठिन बताया है.
अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा है कि अरब देशों ने क़तर के सामने जो मांगें रखीं हैं उन्हें पूरा करना क़तर के लिए कठिन होगा.
सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और सयुंक्त अरब अमीरात ने क़तर से 10 दिनों के अंदर ईरान के साथ संबंध कम करने और तुर्की के सैन्य अड्डे को बंद करने की मांग रखी थी.

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इन मांगों में न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा को बंद करने की बात भी शामिल है जिसे क़तर सरकार आर्थिक मदद देती है. .
क़तर के विदेश मंत्री बीते शनिवार को ही सऊदी अरब, मिस्र, सयुंक्त अरब अमीरात और बहरीन की ओर से रखी गईं 13 मांगों को मानने से इनकार कर चुके हैं.
अमरीका का आग्रह - साथ बैठकर बात करें अरब देश
टिलरसन ने अरब देशों को साथ बैठकर चरमपंथ का हल निकालने और चरमपंथ के खिलाफ़ जरूरी कदम उठाने के लिए कहा है.

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हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि ये प्रस्ताव राजनयिक संकट के दौरान इन देशों के बीच बातचीत का रास्ता खोलता है.
क़तर पर लग रहे आरोपों पर टिलरसन ने कहा, "क़तर के संबंध में पाले गए पूर्वाग्रह को लेकर जो बयानबाजी जारी है उसे कम किया जाए तो तनाव कम होगा."
क़तर ने दिया है जवाब
न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा ने क़तारी विदेश मंत्री के हवाले से कहा, "अमरीकी विदेश मंत्री ने क़तर पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों से उन शिकायतों को सामने रखने को कहा था जो कि तार्किक और दूर करने लायक हों."

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अल-थानी ने कहा, "ब्रितानी विदेश सचिव ने भी मांगों के सोची-समझी और यथार्थवादी होने की बात कही थी. मांगों की ये सूची इस आधार पर खरी नहीं उतरती."
उन्होंने कहा है कि क़तर के सामने रखी मांगे चरमपंथ का सामना करने के लिए नहीं बल्कि क़तर की संप्रभुता और हमारी विदेश नीति को बाहर से चलाने के लिए हैं.
अल-जज़ीरा ने कहा - ये है बोलने की आज़ादी पर हमला
क़तर के न्यूज़ चैनल अल-जज़ीरा ने इन मांगों के जरिए चारों देशों पर उसकी बोलने की आज़ादी पर हमला करने का आरोप लगाया है.

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चैनल ने कहा, "ये हमारा अधिकार है कि हम पेशेवर तरीके से किसी सरकार और प्रशासन के सामने झुके बिना अपनी पत्रकारिता करें."
क़तर ने मांगे न मानीं तो क्या?
सयुंक्त अरब अमीरात इस संकट के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है. सयुंक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री ने शनिवार को कहा कि अगर क़तर इन मांगों को मानने से इनकार करता है तो हमारे रास्ते अलग हो जाएंगे.
उन्होंने कहा, "अब मामला आगे नहीं बढ़ेगा बल्कि अब रास्ते अलग हो जाएंगे. ये बड़ा मुश्किल है कि हम एक समूह बनकर रहें और इसी समूह का एक सदस्य सक्रिय रूप से चरमपंथ और चरमपंथी उद्देश्यों को बढ़ावा देता रहे."
क़तर पर प्रतिबंध लगने के बाद से अरब देशों ने अपने हवाई क्षेत्रों और सभी सीमाओं को क़तर के लिए बंद कर दिया है. ऐसी स्थिति में ईरान और तुर्की क़तर की मदद के लिए आगे आए हैं.
अब तक क़तर ने खुद को किसी भी आर्थिक संकट से बचाए रखा है लेकिन पड़ोसी देशों में रहने वाले क़तारी नागरिक इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
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