संकट क़तर-सऊदी अरब का, फंस गया पाकिस्तान?

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- Author, श्रुति अरोड़ा और वसीम मुस्ताक़
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
खाड़ी देशों में क़तर के अलग-थलग होने से उपजे संकट के बीच पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि पाकिस्तान को इस मामले में तटस्थ रहना चाहिए.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और आर्मी चीफ़ क़मर जावेद बाजवा 12 जून को इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत के लिए सऊदी अरब पहुंचे हैं.
पाकिस्तानी मीडिया को उम्मीद है कि नवाज़ शरीफ़ के सऊदी दौरे से मुस्लिम देशों के बीच संबंधों में सुधार की स्थिति बनेगी.
खाड़ी देशों में संकट की शुरुआत पांच जून को उस वक़्त हुई जब सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने क़तर से सारे संबंध ख़त्म कर दिए.
इन देशों ने कहा कि क़तर अतिवादी ग्रुपों को समर्थन दे रहा है और इससे मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ रही है. क़तर ने इन आरोपों को सिरे ख़ारिज कर दिया है.

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12 जून को नवाज़ शरीफ के सऊदी अरब दौरे को लेकर पाकिस्तानी मीडिया में काफ़ी हलचल रही.
टीवी चैनलों पर कई विशेषज्ञों का पैनल बैठा और अख़बारों में भी 13 जून को इस मुद्दे पर बड़े-बड़े संपादकीय लिखे गए.
'पाक की भूमिकासमझौता कराने वाले की हो'
रूढ़िवादी डेली नवा-ए-वक़्त ने ज़ोर देकर कहा है, ''पाकिस्तान को चाहिए इस मामले में वो अहम भूमिका अदा करे और मानवीय संकट पैदा होने से पहले इस संकट का समाधान खोज लिया जाए.''
इस उर्दू अख़बार ने आगे लिखा है, ''पाकिस्तान इस संटक में अहम भूमिका निभा सकता है.''
पाकिस्तान के अग्रणी अंग्रेज़ी अख़बार डॉन ने भी लिखा है कि मध्य-पूर्व के हालिया संकट की कई परतें हैं लेकिन पाकिस्तान को इस मामले में उलझना नहीं चाहिए.
डॉन ने लिखा है कि मध्य-पूर्व के संकट में उलझकर पाकिस्तान उसे संभाल नहीं सकता है.

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पाकिस्तान टुडे को उदारवादी अग्रेज़ी अख़बार माना जाता है.
उसने लिखा है, ''पाकिस्तान के क़तर और सऊदी दोनों से अच्छे संबंध हैं. ऐसे में किसी एक का पक्ष लेना उसके लिए मुश्किल भरा क़दम होगा. पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह मुस्लिम देशों के बीच समझौता कराने वाले की भूमिका अदा कर संकट को ख़त्म करने की कोशिश करे न कि किसी एक का पक्ष ले.''
'पाकिस्तान इस संकट में फंस सकता है'
जिहादी समर्थक उर्दू अख़बार डेली उम्मत ने भी लिखा है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ़ की सऊदी यात्रा से क़तर विवाद को सुलझाने में मदद मिलेगी.
अख़बार ने उम्मीद जताई कि इस मसले पर गंभीर कोशिश से विवाद को सुलझाया जा सकता है.

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सरकार समर्थक उर्दू भाषी जीओ टीवी के एंकर शहज़ेब ख़ानज़ादा ने कहा कि पाकिस्तान मुस्लिम देशों के बीच संबंधों को ठीक करने की कोशिश कर रहा है.
शहज़ेब ने उम्मीद जताई कि शरीफ़ क़तर और अन्य मुस्लिम देशों की यात्रा पर भी जाएंगे.
मुजीबुर रहमान शामी ने उर्दू भाषा के दुनिया टीवी पर कहा, ''पाकिस्तान इस संकट में पुल का काम कर सकता है और क़तर और सऊदी के बीच कलह के ख़त्म करने में अहम भूमिका अदा कर सकता है.''
जाने-माने पत्रकार नुसरत जावेद ने डॉन न्यूज़ टीवी पर चेतावनी देते हुए कहा, ''अगर यह मध्यस्थता नहीं परामर्श है तो सऊदी में पाकिस्तान के हितों को नुक़सान पहुंच सकता है क्योंकि सऊदी अरब पाकिस्तानी सेना की मदद की फ़र्माइश कर सकता है. जनरल बाजवा प्रधानमंत्री के साथ इसलिए गए हैं क्योंकि सैन्य मसलों पर भी बातचीत होनी है.''

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पश्चिम देश मतभेदों को हवा दे रहे हैं
दुनिया अख़बार ने क़तर संकट को लेकर अमरीका की आलोचना की है. उसने लिखा है कि खाड़ी के देशों में अमरीका मतभेदों को उकसा रहा है.
इस उर्दू भाषा के अख़बार ने लिखा है कि पश्चिम के देश अपना हित साधने के लिए अरब देशों में मतभेद पैदा कर रहे हैं.
जंग अख़बार की पाकिस्तान में अच्छी पहुंच है. जंग के एक लेख में क़तर संकट में अमरीका को घेरा गया है. इसमें लिखा है कि 'ईसाई पश्चिमी शक्तियां' मुस्लिम देशों के बीच फूट डाल रही हैं.
इस लेखक ने अपने आलेख में उम्मीद जताई है कि पाकिस्तान इस मामले में सकारात्मक भूमिका अदा करेगा और वह मुस्लिम देशों के ख़िलाफ़ हो रही साजिश को ख़त्म करेगा.

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उर्दू भाषा के एक और उदारवादी अख़बार डेली एक्सप्रेस ने लिखा है, ''कुछ ताक़तें मुस्लिम देशों के बीच मतभेद पैदा करने में लगी हैं. ये ताक़तें इस विवाद में पाकिस्तान को भी घसीटना चाहती हैं. पाकिस्तान को संकट में बिना बात के ही नहीं फंसना चाहिए.''
जिहादी समर्थक उर्दू अख़बार ऑसाफ ने लिखा है, ''विदेशी ताक़तें खाड़ी के देशों में उपजे इस संकट का फायदा उठाना चाहती हैं. ये ताक़तें मुस्लिम देशों में फूट डालने की कोशिश कर रही हैं. मुस्लिम देशों के बीच पारस्परिक मतभेदों से अमरीका को फ़ायदा होगा.''
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