अमरीका पेरिस समझौते से बाहर होगा: ट्रंप
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका पेरिस समझौते से बाहर निकल जाएगा.

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उन्होंने कहा कि वो नए सिरे से एक नया समझौता करेंगे जिसमें अमरीकी हितों की रक्षा उनका मकसद होगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वो एक ऐसा समझौता करना चाहेंगे जो अमरीका के औद्योगिक हितों की रक्षा करता हो और लोगों की नौकरियां बचाता हो.
पिछले साल राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने मतदाताओं से चुनाव जीतने पर अमरीका को जलवायु परिवर्तन समझौते से बाहर करने का वादा किया था.
ट्रंप के भाषण की मुख्य बातें-

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- अमरीका और उसके नागरिकों के हितों की रक्षा करने के अपने कर्तव्य को निभाते हुए मैं अमरीका को पेरिस समझौते से बाहर निकाल रहा हूं. लेकिन हम अमरीका के हितों का ध्यान रखने वाले नए समझौते के लिए बातचीत भी करेंगे. ऐसा समझौता जो अमरीका के उद्योगों, कामगारों और टैक्स देने वाले नागरिकों के हितों का ध्यान रखे. पेरिस समझौते से बाहर होना अमरीका की स्वतंत्रता में भविष्य में होने वाले दख़ल को भी रोकेगा.
- पेरिस समझौता ऐसा उदाहरण है जब वॉशिंगटन ने दूसरे देशों के फ़ायदे के लिए अमरीका के हितों को नुकसान पहुंचाया. अमरीका आज से ही गैर बाध्यकारी पेरिस समझौते को लागू करना बंद कर देगा.
- संयुक्त राष्ट्र का ग्रीन क्लाइमेट फ़ंड अमरीका से धन हथियाने की धोखाधड़ी है. हम अरबों डॉलर के इस फ़ंड को तुरंत ख़त्म कर रहे हैं.
- अमरीका के पास अपना व्यापक ऊर्जा स्रोत है और अमरीका दूसरे देशों पर निर्भर रहे बिना अपनी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी कर सकता है.
- हम नहीं चाहते कि दुनिया के नेता और देश हम पर हंसे. वो अब हम पर नहीं हंसेगे. मैं पीट्सबर्ग के नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया हूं न कि पेरिस का प्रतिनिधित्व करने के लिए. मैंने वादा किया था कि मैं हर उस समझौते को तोड़ दूंगा या फिर से बातचीत करूंगा जो अमरीका के हितों का ध्यान नहीं रखता है. जल्द ही कई व्यापार समझौतों पर फिर से बातचीत होगी.
- पेरिस समझौता चीन और भारत जैसे देशों को फ़ायदा पहुंचाता है. ये समझौता अमरीका की संपदा को दूसरे देशों में बांट रहा है. भारत अरबों डॉलर की विदेशी मदद लेकर समझौते में शामिल हुआ है.
ट्रंप का कहना था कि इससे उनके देश के तेल और कोयला उद्योग को मदद मिलेगी.
जबकि उनके विपक्षियों का कहना था कि समझौते से अलग होना एक अंतरराष्ट्रीय चुनौती के सामने अमरीकी नेतृत्व का समर्पण होगा.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने ट्रंप से पेरिस समझौता न तोड़ने की अपील की थी.

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हालांकि गुटेरस ने ये भी कहा था कि अमरीका के अलग हो जाने के बावजूद जलवायु परिवर्तन के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी.
गुटेरस ने बीबीसी से कहा, "ज़ाहिर तौर पर ये बहुत अहम फ़ैसला है क्योंकि अमरीका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है."
"लेकिन अमरीकी सरकार जो भी फ़ैसला ले, ये महत्वपूर्ण है कि बाक़ी सभी सरकारें मार्ग पर रहें."
"पेरिस समझौता हमारे साझा भविष्य के लिए बेहद अहम है और अन्य समाजों की तरह, अमरीकी समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है कि वो पेरिस समझौते को बरकरार रखने के लिए एकजुट हो."
इसी बीच, चीन और यूरोपीय संघ के नेता पेरिस समझौते को बरक़रार रखने के लिए साझा बयान पर तैयार हो गए हैं.
बयान के मसौदे में कहा गया है कि, "बढ़ते हुए तापमान से राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होती है और सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता आती है. स्वच्छ ऊर्जा इस्तेमाल करने से अधिक नौकरियां पैदा होती हैं और आर्थिक विकास होता है." बीबीसी ने इस मसौदे को देखा है.

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पेरिस समझौते में क्या हुआ था
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का मतलब है उद्योगों और कृषि कार्यों से उत्सर्जित होने वाली गैसों से पर्यावरण पर होने वाले नकारात्मक और नुक़सानदेह असर.
पेरिस समझौते का मक़सद गैसों का उत्सर्जन कम कर दुनियाभर में बढ़ रहे तापमान को रोकना था.
देशों ने निम्न बिंदुओं पर समझौता किया था
- वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और कोशिश करना कि वो 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक न बढ़े.
- मानवीय कार्यों से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को इस स्तर पर लाना की पेड़, मिट्टी और समुद्र उसे प्राकृतिक रूप से सोख लें. इसकी शुरुआत 2050 से 2100 के बीच करना.
- हर पांच साल में गैस उत्सर्जन में कटौती में प्रत्येक देश की भूमिका की प्रगति की समीक्षा करना.
- विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्तीय सहायता के लिए 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष देना और भविष्य में इसे बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्धता.
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