फ़ेसबुक कैसे रखता है कंटेंट पर नज़र?

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आपकी फ़ेसबुक टाइमलाइन पर क्या दिखे और क्या न दिखे ये फ़ेसबुक कैसे तय करता है?
ब्रिटेन के अख़बार द गार्डियन के मुताबिक फ़ेसबुक के लीक हुए आंतरिक दस्तावेज़ों में इस सवाल का जवाब मिला है.
फ़ेसबुक की नियमावली के तहत ये तय किया जाता ही कि पोस्ट बहुत हिंसक, सेक्सुअल, नस्लभेदी, नफ़रत फैलाने वाली या आतंक का समर्थन करने वाली तो नहीं है.
द गार्डियन के मुताबिक फ़ेसबुक के मोडरेटरों के पास काम बहुत ज़्यादा है और किसी भी पोस्ट पर निर्णय लेने के लिए उनके पास बस कुछ सेकंड का समय होता है.
ब्रिटेन के सांसदों ने हाल ही में कहा है कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां हानिकारक कंटेंट से निपटने में नाकाम हो रही हैं.
अख़बार का कहना है कि उसके पास सौ से ज़्यादा नियमावलियां है जिनका इस्तेमाल फ़ेसबुक के मॉडरेटर ये तय करने में करते हैं कि फ़ेसबुक पर क्या प्रकाशित किया जा सकता है और क्या नहीं.
इन नियमवालियों में भड़काऊ भाषण, रिवेंज पोर्न, आत्महत्या, धमकियां या हिंसक गतिविधियों से जुड़े कंटेंट की निगरानी के नियम हैं.

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अख़बार ने फ़ेसबुक में काम करने वाले जिन कंटेंट मॉडरेटरों के साक्षात्कार किए हैं उनका कहना है कि फ़ेसबुक के कंटेंट का आंकलन करने की नीतियां "असंगत" और "अजीब" हैं.
उनका कहना था का सेक्स से जुड़े कंटेंट पर फ़ैसला लेना सबसे उलझाने वाला होता है.
फ़ेसबुक की ग्लोबल पॉलिसी मैनेजमेंट की प्रमुख मोनिका बिकेर्ट ने कहा, "हम अभिव्यक्ति की आज़ादी का ख्याल रखते हुए फ़ेसबुक को सभी के लिए सुरक्षित बनाने का प्रयास करते हैं."
फ़ेसबुक पर मानव मॉडरेटर संभावित विवादित पोस्टों पर नज़र रखते हैं. इसके अलावा आर्टिफ़ीशिलय इंटेलिजेंस के आधार पर पोस्ट किए जाने वाले कंटेंट पर नज़र रखी जाती है.
फ़ेसबुक ने हाल ही में कहा था कि कंटेंट पर नज़र रखने के लिए तीन हज़ार लोगों की भर्ती की जा रही है.












