You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कैटवॉक में हिजाब से नाराज़ मुस्लिम महिलाएं
कई अंतरराष्ट्रीय फ़ैशन ब्रांड और बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिजाब पहने हुए महिलाओं को विज्ञापनों में दिखा चुकी हैं, लेकिन कई मुस्लिम महिलाएं फ़ैशन हिजाब के इस ट्रेन्ड से नाख़ुश दिख रही हैं.
डॉयचे एंड गबाना, एच एंड एम, नाइकी और पेप्सी ऐसे कुछ ब्रांड हैं जिन्होंने विज्ञापनों में हिजाब वाली महिलाओं का इस्तेमाल किया है.
महिला अधिकारों के हितौषियों, धार्मिक रूढ़िवादियों और धर्मनिरपेक्ष लोगों के बीच हिजाब एक बहस का मुद्दा रहा है.
लेकिन इस बार इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई मुस्लिम महिलाएं विज्ञापनों में हिजाब वाली महिलाओं की तस्वीरों पर सवाल उठा रही हैं.
केंडाल और पेप्सी
हाल ही में दुनियाभर में मशहूर कंपनी पेप्सी के एक विज्ञापन ने बहुत से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.
इसमें अमरीकी टीवी स्टार और मॉडल केंडाल जेनर एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए फ़ोटोशूट छोड़ देती हैं. विज्ञापन में प्रदर्शन के लिए पुलिस बल का भारी इंतजाम दिखाया गया है.
अपना तनाव दूर करने के लिए वो टहलते हुए पुलिसलाइन की ओर जाती हैं और एक पुलिस वाले को पेप्सी का एक केन थमाती हैं. यह देखकर लोग ताली बजाने लगते हैं.
ऑनलाइन मैगेज़ीन गुड में एक पत्रकार तसबीह हरवीस ने हाल ही में इस विज्ञापन के बारे में एक लेख लिखा था.
विज्ञापन के सामने आने के बाद लोगों ने आरोप लगाया कि इसमें हाल के दिनों में अमरीकी सड़कों पर हुए विरोध-प्रदर्शनों को कमतर बताने की कोशिश की गई है.
लेकिन मुस्लिम महिलाओं ने इस बात को लेकर विरोध जताया था कि विज्ञापन में हिजाब पहनी हुई महिला रैली की तस्वीरें खींचती दिखाई गई हैं.
हरवीस बीबीसी ट्रेंडिंग रेडियो को बताती हैं, " अरबों की एक कंपनी ने मुस्लिम महिला की एक प्रगतिशील तस्वीर पेश करने की कोशिश की, हो सकता है कि ये इस उम्मीद पर ख़रा न उतरे,"
ब्रांड पावर
पेप्सी के अलावा कई और कंपनियां हैं जो कई तरह से हिजाब की बात कर रही हैं.
नाइकी ने हाल ही में स्पोर्ट्स हिजाब का नए डिज़ाइन सामने रखा है , 2018 में ये हिजाब बाज़ार में उतारे जाएंगे.
एच एंड एम ने सबसे पहले हिजाब वाली मुस्लिम मॉडल को विज्ञापन में दिखाया था जबकि रमज़ान के महीने में मुस्लिम ख़रीदारों को रिझाने के लिए कई फ़ैशन कंपनियां 'रमादान कलेक्शन' लॉन्च कर चुकी हैं.
हरवीस कहती हैं, '' मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों से कंपनियां अपनी प्रगतिशील और समाहित करने की छवि को ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं. राजनितिक माहौल को देखते हुए ये एक तरह से ज़रूरी हो गया है कि अलग-थलग हुए समुदायों के साथ तालमेल साधा जाए और कई लोगों के लिए मुस्लिम महिलाएं इसकी प्रतिनिधि बनकर उभरी हैं.''
दबाव
हिजाब पहनने वाली महिलाओं को ध्यान में रखकर कथित हिजाबी फ़ैशन ब्लॉगरों और मेक-अप सिखाने वाले ट्यूटोरियलों की लोकप्रियता भी विवादों में है.
इन ब्लॉग्स और मेक-अप ट्यूटोरियल्स को लाखों को लोग देखते-पढ़ते हैं लेकिन कुछ महिलाओं का मानना है कि इससे हिजाब उतारकर फ़ैशनेबल दिखने का दबाव बढ़ता है.
मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि व्यावसायीकरण के नीचे एक पवित्र सी चीज़ (हिजाब) दब रही है.
ऑनलाइन मैगेज़ीन अनदर लेन्ज़ की संपादक ख़दीजा अहमद ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए लिखा है कि वो दो साल तक हिजाब पहनती थी लेकिन बाद में उन्होंने हिजाब पहनना बंद कर दिया.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि सोशल मीडिया पर विज्ञापनों को देखकर उन्हें दबाव महसूस होता है.
ख़दीजा अहमद कहती हैं, " मैं समझती हूं कि ये ब्रांड हमारी कोई मदद नहीं कर रहे हैं. हमें अपनी पहचान को लेकर मुख्यधारा की कंपनियों से स्वीकृति नहीं चाहिए. "
वो कहती हैं, " ये विज्ञापन हिजाब को कमतर आंकने के अलावा मुस्लिम समुदाय के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं. हिजाब को मैं इबादत का एक ज़रिया मानती हूं, इसे एक महज़ फ़ैशन स्टेटमेंट बनाया जा रहा है. "
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)