परमाणु बम के लिए पैसे कहां से लाता है उत्तर कोरिया

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साल 1950 के दशक तक उत्तर कोरिया एशिया के सबसे अधिक औद्योगिक देशों में से एक था. लेकिन आज उसकी अर्थव्यस्था पस्त नज़र आती है.
एक ऐसे समय जब वहां के नागरिकों का जीवन जोखिम में है, उत्तर कोरिया की अमरीका और अन्य देशों से तनातनी चल रही है. यह तनातनी परमाणु कार्यक्रम और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने को लेकर है.
उत्तर कोरिया ने अपने संस्थापक राष्ट्रपति किम इल-सुंग की 105वीं जयंती पर 15 अप्रैल को राजधानी प्योंगयांग में आयोजित परेड में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया.
इसमें नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल और पनडुब्बी का प्रदर्शन शामिल था. अमरीका और दक्षिण कोरिया के मुताबिक़ इसके अगले ही दिन उत्तर कोरिया ने एक मिसाइल का परीक्षण किया, जो कि नाकाम रहा.
उत्तर कोरिया पिछले पांच साल से परमाणु परीक्षण और मिसाइल परीक्षण कर रहा है.
मिसाइल क्षमता

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माना जाता है कि उसके पास अलग-अलग क्षमता की एक हज़ार से अधिक मिसाइलें हैं. इनमें ऐसी भी मिसाइलें हैं, जो अमरीका तक में निशाना साध सकती हैं.
दुनिया के कुछ ही देश इतनी विकसित और महंगी तकनीक विकसित कर पाए हैं.
आइए जानते हैं कि अपने मिसाइल कार्यक्रम पर कितना और कहां से पैसे खर्च करता है उत्तर कोरिया.
पहली बात यह कि इसके लिए विदेशी मुद्रा की ज़रूरत होगी.
कई लोगों का यह मानना है कि उत्तर कोरिया ने बहुत सी विदेशी तकनीकों को हासिल किया है. इनमें से कुछ सेना की ज़रूरतों के लिए हैं.
उत्तर कोरिया दुनिया के कुछ उन गिने-चुने देशों में है जिसकी अर्थव्यवस्था पर वहां की केंद्र सरकार का नियंत्रण है.
अर्थव्यवस्था का आकार

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अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए की वेबसाइट में अनुमान लगाया गया है कि उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था क़रीब 40 अरब डॉलर की है. यह क़रीब उतनी ही बड़ी अर्थव्यवस्था है जितनी की होंडुरास का.
उत्तर कोरिया का कुल निर्यात क़रीब पौने चार अरब अमरीकी डॉलर का है. क़रीब इतने का ही निर्यात मोज़ांबिक और एक बहुत छोटा-सा यूरोपीय देश सैन मारीनो करता है.
जिन चीज़ों का निर्यात उत्तर कोरिया करता है, उनमें खनिज, धातुओं से बने सामान, युद्ध का साजो-सामान, कपड़े, कृषि उत्पाद और मछलियां शामिल हैं.
लेकिन सवाल यह है कि लातिन अमरीका के ग़रीब देशों की अर्थव्यवस्था वाला एक देश परमाणु कार्यक्रम का खर्च कैसे उठा सकता है.
उत्तर कोरिया की प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति क़रीब 1800 सौ अमरीकी डॉलर है, जो रवांडा और हेती जैसे देशों के बराबर है.
इस मामले में वह दुनिया के 230 देशों की सूची में 208 वें नंबर पर है.
अकाल से उबरी अर्थव्यवस्था

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उत्तर कोरिया में 1990 के दशक में भारी अकाल आया था. इससे उबरने में उसकी अर्थव्यवस्था को काफी समय लगा.
साल 2009 तक यह उसके लिए काफ़ी कठिन था, जबतक कि उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भरपूर खाद्य सहायता नहीं मिली.
आज यह माना जाता है कि उसके घरेलू कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है.
अब सवाल यह उठता है कि उत्तर कोरिया के उत्पादों के खरीदार कौन हैं.
चीन उत्तर कोरिया का मुख्य राजनीतिक सहयोगी है. चीन उसके कुल उत्पाद का 54 फ़ीसद खरीद लेता है. इस मामले में दूसरा स्थान अल्जीरिया का है, जो कि उत्तर कोरिया का 30 फ़ीसद सामान खरीदता है.
इसके अलावा उत्तर कोरिया के निर्यात का 16 फ़ीसद हिस्सा दक्षिण कोरिया को जाता है.
पड़ोसी से टकराव

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हालांकि अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया के साथ उत्तर कोरिया का बहुत पुराना टकराव भी है.
इतना टकराव द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया के किसी भी देशों के बीच नहीं देखा गया है. इसके बाद भी दोनों देशों ने अपने आर्थिक हितों को बढ़ाया है.
उत्तर कोरिया में दक्षिण कोरिया का निवेश उसके विदेश मुद्रा के महत्वपूर्ण स्रोत में से है.
दक्षिण कोरिया का सबसे महत्वपूर्ण निवेश केसांग इंडस्ट्रीयल कांप्लेक्स में हुआ है.
लेकिन इन दिनों इसका भी भविष्य अधर में है. बुधवार को दक्षिण कोरिया की सरकार ने घोषणा की कि मिसाइल परीक्षणों के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए उसने अपनी सहभागिता स्थगित कर दी है.
दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह नहीं चाहता है कि इस इंडस्ट्रीयल कांप्लेक्स से पैदा हुआ संसाधन उत्तर कोरिया की सैनिक परियोजना पर खर्च हो.
इसके अलावा कुछ देशों की ओर से उत्तर कोरिया पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से भी उसकी अर्थव्यवस्था को कमज़ोर होगी. सबसे ताज़ा प्रतिबंध जापान ने लगाया है.
उत्तर कोरिया के नेता किन जोंग उन जबतक अपने नागरिकों से त्याग की उम्मीद करते हैं, तब तक उम्मीद की जाती है कि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमता का विस्तार करता रहेगा, जैसा कि एक छोटी अर्थव्यवस्था से की जाती है.












