पनामा: फ़ैसला जो नवाज़ शरीफ का राजनीतिक भविष्य तय करेगा

नवाज़ शरीफ़

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    • Author, श्रुति अरोड़ा
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

पनामा पेपर्स की वजह से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरी़फ और उनका परिवार चर्चा में हैं. नवाज़ शरीफ़ के खि़लाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं.

2018 में होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले सुर्खियों में आया ये मामला उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकता है.

मामला बीते साल हुए पनामा पेपर लीक मामले से जुड़ा है. इनमें कथित तौर पर नवाज़ शरीफ़ के बच्चों पर विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी होने के आरोप लगाए गए थे. नवाज़ शरीफ़ ने आरोपों से पहले ही इंकार किया था.

कैसे शुरु हुआ मामला?

नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम शरीफ़

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इमेज कैप्शन, नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम शरीफ़

पनामा में स्थित मोसाक फ़ोंसेका कंपनी से अप्रैल 2016 में लाखों कागज़ात लीक हो गए थे. इनमें कई पूर्व और मौजूदा नेताओं, सरकारी अधिकारियों, सेलेब्रिटी और खेल जगत के लोगों के छिपे हुए धन के बारे में जानकारी सामने आई थी.

इनमें से कुछ काग़ज़ात के अनुसार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बच्चों मरियम, हसन और हुसैन की हिस्सेदारी विदेशी कंपनियों में थी जिनके ज़रिए कथित तौर पर लंदन में मकान खरीदे गए थे.

मोसाक फ़ोंसेका

नवाज़ शरीफ़ ने भ्रष्टाचार और निजी फायदे के आरोपों से इंकार किया था और कहा था कि उनके राजनीति में आने से पहले से ही उनके परिवार ने वैध तरीके से अपनी संपत्ति कमाई है और उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया है.

पाकिस्तान में इस लीक ने एक बड़ी राजनीतिक आंधी को हवा दी और उनके विरोधियों ने उनके परिवार की जवाबदेही पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. मीडिया में भी ये मुद्दे छाए रहे.

विरोधियों के आरोप

तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान ख़ान

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पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान ख़ान और जमान-ए-इस्लामी के सिराज-उल-हक और अवामी मुस्लिम लीग के नेता शेख़ राशिद ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की और प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को पद के लिए अयोग्य घोषित करने की गुज़ारिश की.

याचिका में कहा गया था कि प्रधानमंत्री ने 16 मई को संसद में दिए अपने भाषण में और 5 अप्रैल के देश के अपने संबोधन में जनता को अपने बच्चों के विदेशी कंपनियों में हिस्सेदारी के बारे में गुमराह करने की कोशिश की.

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का तहरीक-ए-इंसाफ ने नेतृत्व किया है. यदि कोर्ट का फ़ैसला नवाज़ शरीफ़ के परिवार के ख़िलाफ़ आता है तो आने वाले चुनावों में इसका फायदा तहरीक-ए-इंसाफ को मिल सकता है.

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