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मिस्र में चर्चों पर हमला, धमाकों में 45 की मौत
मिस्र में ईस्टर से पहले के रविवार को हुए दो धमाकों में कॉप्टिक ईसाइयों को निशाना बनाया गया. अधिकारियों का कहना है कि इन धमाकों में कम से कम 45 लोग मारे गए हैं.
अलेक्जेंडरिया में सेंट मार्क कॉप्टिक चर्च के बाहर एक धमाका हुआ और इसमें 16 लोग मारे गए. मिस्र के सरकारी मीडिया का कहना है कि कॉप्टिक चर्च के प्रमुख पोप टावाड्रोस 2 भी यहां के धार्मिक समारोह में शरीक हुए थे और सुरक्षित हैं.
इससे पहले, नील डेल्टा में तांता शहर के सेंट जॉर्ज कॉप्टिक चर्च में धमाका हुआ था और इसमें 29 लोग मारे गए. कथित इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.
यह समूह मिस्र में कॉप्टिक चर्चों को निशाना बनाता है. इजिप्ट इंडिपेंडेंट वेबसाइट की ख़बर के मुताबिक एक पुलिस ऑफिसर एक आत्मघाती हमलावर की डिवाइस को चर्च के भीतर विस्फोट करने से रोक रहा था तभी वह भी मारा गया.
पहला धमाका मिस्र का राजधानी काहिरा से 94 किलोमीटर उत्तर तांता में हुआ. मिस्र के प्रांतीय गवर्नर अहमद डीफ ने सरकारी टीवी नील न्यूज़ चैनल से कहा, ''बम प्लांट किया गया था या किसी ने ख़ुद को उड़ा लिया अभी तक पता नहीं चला है. इस मामले में पड़ताल जारी है. आसपास के इलाक़े में और विस्फोटक हो सकते हैं.''
मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल सीसी ने पूरे देश में सेना की तैनाती के आदेश दिए हैं.
सरकार ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है.
पोप फ्रांसिस इस महीने के बाद मिस्र जाने वाले हैं. उन्होंने इस हमले की निंदा की है. हाल के वर्षों में इस्लामिक चरमपंथियों के हमले अल्पसंख्यक ईसाइयों पर बढ़े हैं.
पिछले साल दिसंबर में काहिरा के कॉप्टिक कैथेड्रल चर्च में एक धमाका हुआ था और इसमें 29 लोग मारे गए थे.
ये हमले ख़ासकर 2013 के बाद और बढ़े हैं, जब सेना ने चुनी हुई सरकार को अपदस्थ कर दिया और इस्लामिक कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू की.
इसमें कुछ अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी के समर्थक भी हैं जो मुस्लिम ब्रदरहुड से ताल्लुक रखते हैं. आरोप लगते रहे हैं कि ईसाइयों ने चुनी हई सरकार को बेदखल करने में मदद की है.
फ़रवरी में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने ईसाइयों पर हमले की धमकी दी थी. मिस्र की आबादी में ईसाई करीब 10 फ़ीसदी हैं. यह हमला तब हुआ है जब कॉप्टिक ईसाई ईस्टर से पहले के रविवार को एकजुट हुए थे. यह ईसाई कैलेंडर में पवित्र दिनों में से एक है.