ब्लॉगर एक्टिविस्ट नावाल्नी, जो बन गए हैं पुतिन का सिरदर्द

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रूस में भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने वाले लगभग 900 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की अमरीका ने निंदा की है.
प्रदर्शन के दौरान मुख्य विपक्षी नेता एलेक्सी नावाल्नी को भी गिरफ़्तार किया गया था.
अमरीका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार प्रेक्षकों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक मूल्यों का अनादर है.
उन्होंने रूसी सरकार से प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने की अपील की.
कौन हैं एलेक्सी नावाल्नी?

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भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाने वाले रूस के मुख्य विपक्षी नेता एलेक्सी नावाल्नी लंबे समय से राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के सामने सबसे प्रमुख विपक्षी चेहरा रहे हैं.
पिछले साल उन्होंने 2018 में राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा होने की घोषणा की थी.
लेकिन रूसी अदालत द्वारा धोखाधड़ी के मामले में सज़ा दिए जाने के बाद उनकी उम्मीदवारी पर संशय छा गया है.
हालांकि उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया है और कानूनी मुश्किलों को सरकार की तीख़ी आलोचना का तोहफ़ा बताया था.
रूसी राजनीति में उनका उदय तब हुआ जब 2008 में सरकार नियंत्रित बड़े बड़े निगमों में भ्रष्टाचार और लापरवाही पर ब्लॉग लिखना शुरू किया.
इसके लिए उन्होंने बड़ी तेल कंपनियों, बैंक और मंत्रालयों में शेयर ख़रीदे और फिर सरकारी वित्तीय लेनदेन के बारे में सवाल करने का तरीक़ा अपनाया.
अपने संदेशों को पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना उनके राजनीतिक स्टाइल के रूप में चर्चित हुआ.
पुतिन के कट्टर विरोधी

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वो राष्ट्रपति पुतिन के वफ़ादार सत्ताधारियों का मज़ाक उड़ाते रहे और उनकी तीख़ी भाषा लोकप्रिय हुई.
नौजवानों की बड़ी संख्या सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ गई.
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान ने नावाल्नी को निगमों के आलोचक से सीधे रूस की सत्तारूढ़ पार्टी यूनाइटेड रशिया का प्रमुख विपक्षी बना दिया.
2011 के चुनावों में वो खड़े तो नहीं हुए लेकिन उन्होंने अपने पाठकों से यूनाइटेड रशिया के अलावा किसी भी पार्टी को वोट देने की अपील की थी.
उन्होंने यूनाइटेड रशिया को 'धोखेबाज़ों और चोरों की पार्टी' कहा था. यह मुहावरा चल पड़ा.
इस चुनाव में ये पार्टी तो जीत गई लेकिन चुनाव में धोखाधड़ी के तमाम आरोपों के कारण कई शहरों में प्रदर्शन शुरु हो गए. जीत का अंतर भी बहुत कम हुआ.
आपराधिक जांच

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जब पांच दिसंबर को पहली बार प्रदर्शन हुआ तो नावाल्नी को गिरफ़्तार कर लिया गया और 15 दिन तक जेल में रखा गया.
लेकिन चुनाव बाद मॉस्को में हुई सबसे बड़ी रैली को वो संबोधित करने पहुंच गए, जिसमें क़रीब सवाल लाख लोग शामिल थे.
दोबारा हुए चुनाव में पुतिन आसानी से जीत गए और नावाल्नी के ख़िलाफ़ आपराधिक जांच शुरू की गई.
उनके वकील होने पर भी सवाल खड़े किए गए और उनके अतीत को खंगाला जाने लगा.
जब किरोव शहर में धोखाधड़ी के मामले में जुलाई 2013 में उन्हें कुछ समय के लिए जेल भेजा गया तो पांच साल की सज़ा को राजनीतिक कार्रवाई के रूप में देखा गया.
'अगले चुनाव से रोकने की कोशिश'

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हालांकि उन्हें मॉस्को के मेयर चुनाव में प्रचार के लिए रिहा किया गया, जिसमें उन्हें 27 प्रतिशत वोट मिले और पुतिन समर्थक सरगेई सोबियानिन की जीत हुई.
यह उनकी बहुत बड़ी सफलता थी क्योंकि सरकारी टीवी तक उनकी पहुंच नहीं थी.
बाद में उनकी सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया. यूरोपियन कोर्ट ऑफ़ ह्यूमन राइट्स ने पाया था कि सुनवाई सही तरीक़े से नहीं हुई थी.
लेकिन इस साल दोबारा सुनवाई हुई और उन्हें फिर सज़ा सुनाई गई.
हालांकि नावाल्नी का क़द पूर्व नेता मिखाइल खोदोरकोवस्की जैसा नहीं रहा, जो एक दशक तक रूस की जेल में रहे.
उन्हें 2010 में फिर से लंबी सज़ा दी गई थी.
खोदोरकोवस्की स्विट्ज़रलैंड में है, लेकिन नावाल्नी ने पुतिन से सीधी टक्कर लेने का फैसला किया है.
नावाल्नी लगातार कहते रहे हैं कि दोबारा सुनवाई, असल में उन्हें 2018 के चुनाव में जाने से रोकने की कोशिश है.
नावाल्नी के विरोधी

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हालांकि पुतिन विरोधियों में भी नावाल्नी के विरोधी मौजूद हैं जो उऩके रूसी राष्ट्रवाद से चिंतित हैं.
नावाल्नी कट्टर राष्ट्रवादी कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और उदारवादियों के बीच इसे शक की तरह देखा जाता है.
रूसी राष्ट्रवादी भी उनके अमरीकी कनेक्शन को लेकर संदेह में हैं.
नावाल्नी ने 2010 में येल विश्वविद्यालय में एक समेस्टर गुज़ारा था.
पुतिन और शतरंज चैंपियन गैरी कास्परोव की आलोचना के बाद भी अक्टूबर 2012 में विपक्ष ने नावाल्नी को अपना नेता चुना था.












