ट्रंप के अटॉर्नी जनरल पर बढ़ा इस्तीफ़े का दबाव

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अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अटॉर्नी जनरल जेफ़ सेशंस के रूसी अधिकारियों से मुलाक़ात का मामला तूल पकड़ता जा रहा है और उनके इस्तीफ़े की मांग हो रही है.
अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने इस बात की पुष्टि की है कि जेफ़ सेशंस ने पिछले साल जुलाई और सितम्बर में रूस के सेर्गेई किसल्याक से मुलाक़ात की थी.
हालांकि जेफ़ ने रूसी अधिकारियों के साथ 'किसी भी तरह की बातचीत से इनकार' किया था. उन्होंने ये बात राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही थी.
चुनावों में रूसी हस्तक्षेप के दावों ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को काफ़ी परेशान कर रखा है.
अमरीकी ख़ुफ़िया जगत का मानना है कि डेमोक्रेटिक संगठनों की कथित रूसी हैकिंग दरअसल डेमोक्रेट उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को हराने में ट्रंप की मदद के लिए की गई थी.

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पिछले महीने ही ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ़्लिन को हटा दिया गया था क्योंकि उन्होंने किसल्याक के साथ हुई बातचीत के बारे में व्हाइट हाउस को गुमराह किया था.
ताज़ा डेवलपमेंट के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने ये कहते हुए आक्रोश व्यक्त किया. डेमोक्रेट सदस्यों का कहना है कि जेफ़ सेशंस को कम से कम हैंकिंग से जुड़ी एफ़बीआई जांच से अलग हो जाना चाहिए.
जेफ सेशंस इस एफ़बीआई जांच की निगरानी कर रहे हैं.
बीती 10 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान जेफ़ सेशंस से डेमोक्रेट सीनेटर अल फ्रैंकन ने ये सवाल किया था. तब जेफ़ ने कहा था कि उन्होंने रूसी अधिकारियों से कोई बातचीत नहीं की थी.

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व्हाइट हाउस ने सेशंस का बचाव किया है और 'डेमोक्रेट सदस्यों द्वारा ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ ताज़ा हमले की निंदा' की है.
डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर नैंसी पेलोसी ने सेशंस पर 'शपथ लेकर झूठ बोलने' का आरोप लगाया और उनके इस्तीफ़े की मांग की.












