उत्तर कोरिया के 'एटम बम' में कितना दम?

किम जोंग उन

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इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया ने पिछले साल कई परमाणु और मिसाइल परीक्षण किए हैं.

उत्तर कोरिया ने एक और मिसाइल का परीक्षण किया है. यह डोनल्ड ट्रंप के अमरीका के राष्ट्रपति बनने के बाद पहला परीक्षण है.

दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने कहा है कि एक मिसाइल जापान सागर की तरफ़ 500 किलोमीटर पूर्व की तरफ़ छोड़ी गई.

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की जाती रही है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कोशिशों के बावजूद उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम नहीं लगाई जा सकी है.

उत्तर कोरिया का दावा है कि अब तक पांच परमाणु परीक्षण किए गए हैं.

क्या उत्तर कोरिया के पास बम है ?

तकनीकी रूप से देखें तो उत्तर कोरिया के पास परमाणु बम है.

उत्तर कोरिया कई बार परमाणु बम परीक्षण कर चुका है. हालांकि पड़ोसी देशों पर परमाणु हमला करने के लिए उत्तर कोरिया को मिसाइल में लादने लायक परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करनी होगी.

उत्तर कोरिया का दावा है कि उसने परमाणु हथियारों के लघु रूप बना लिए हैं. हालांकि इस दावे की पुष्टि किसी स्वतंत्र स्रोत से नहीं हो पाई है.

उत्तर कोरिया के परमाणु संयंत्र

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उत्तर कोरिया के परमाणु बम कितने ताक़तवर हैं?

उत्तर कोरिया का दावा है कि 2006, 2009, 2013 और 2016 में जनवरी और सितंबर में सफल परमाणु परीक्षण किए हैं.

इस दौरान परमाणु बमों की क्षमता में बढ़ोतरी हुई हो सकती है.

सितंबर 2016 में हुए परीक्षण के बारे में मिले संकेतों से ये बम 10 से 30 किलोटन विस्फोटक की क्षमता वाला है. अगर ये सच है तो ये उत्तर कोरिया का सबसे ताकतवर परमाणु परीक्षण है.

एक दूसरा बड़ा सवाल है कि जिन बमों का परीक्षण किया जा रहा है वो एटमी बम हैं या हाइड्रोजन बम हैं?

उत्तर कोरिया का परीक्षण

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हाइड्रोजन बम ज़्यादा शक्तिशाली होते हैं जिनमें अणुओं का विलय होता है और बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है. जबकि एटमी बमों में अणुओं का विभाजन होता है.

2006, 2009 और 2013 में उत्तर कोरिया ने एटमी बमों का परीक्षण किया था.

उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि जनवरी 2016 में हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया था.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जितना बड़ा धमाका था इससे उत्तर कोरिया के दावे पर भरोसा करना मुश्किल है.

प्लूटोनियम या यूरेनियम?

विश्लेषक मानते हैं कि पहले दो परीक्षणों में प्लूटोनियम का इस्तेमाल किया गया.

लेकिन 2013 में परीक्षण शुरू करने के लिए प्लूटोनियम या यूरेनियम इस्तेमाल किया गया ये साफ़ नहीं है.

अगर उत्तर कोरिया के सफल परमाणु परीक्षण में यूरेनियम का इस्तेमाल किया गया है तो ये उत्तर कोरिया के लिए बड़ी सफलता होगी.

उत्तर कोरिया का प्लूटोनियम का भंडार सीमित है, लेकिन अगर यूरेनियम का संवर्धन करने में उत्तर कोरिया को कामयाबी मिलती है तो उसके लिए परमाणु हथियारों बड़ा ज़खीरा जमा करना आसान हो जाएगा.

प्लूटोनियम संवर्धन बड़े और आसानी से ढूंढ़े जा सकने वाले संयंत्रों में होता है लेकिन यूरेनियम संवर्धन का पता लगाना आसान नहीं है.

क्या उत्तर कोरिया सफल हो रहा है?

ये साफ़ नहीं है कि उत्तर कोरिया मिसाइल में लादे जा सकने लायक छोटे परमाणु हथियार बना रहा है.

किम जोंग उन

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इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया पर कई प्रतिबंध लगाए हैं.

मार्च 2016 में अमरीकी सैन्य मुख्यालय पेंटागन के प्रवक्ता पीटर कुक ने कहा कि अमरीका ने उत्तर कोरिया की परमाणु हथियार के लघुरूप बनाने की क्षमता नहीं देखी है.

इसके दो दिन बाद अमरीका के वायुसीमा की सुरक्षा के ज़िम्मेदार एडमिरल बिल गोर्टने ने अमरीकी सीनेट को बताया था कि ये मान लेने में समझदारी है कि उत्तर कोरिया अमरीका पर हमला कर सकता है, जबकि खुफ़िया एजेंसियां इसकी बहुत कम संभावनाएं देखती हैं.

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के विशेषज्ञ स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर सीगफ्राइड एस हेकर का कहना है कि हमें ये मानकार चलना चाहिए कि उत्तर कोरिया ने कम दूरी और मध्यम दूरी की मिसाइलों में लादे जा सकने वाले परमाणु हथियारों को डिज़ाइन और प्रदर्शित किया है.

2016 सितंबर में उन्होंने कहा था कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें तैनात करने की संभावना के सफल होने में अभी पांच से दस साल लगेंगे लेकिन अगर उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम बेरोक-टोक चलता रहा तो ये संभव है.

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के बारे में हम और क्या जानते हैं?

माना जाता है कि प्योंगयांग के उत्तर में योंगब्योन के पास पहाड़ी इलाके में एक जगह पर उत्तर कोरिया का परमाणु संयंत्र स्थित है.

दक्षिण कोरिया में विरोध प्रदर्शन

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इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दक्षिण कोरिया में चिंता रही है.

जबकि माना जाता है कि जनवरी और सितंबर 2016 में परमाणु हमले पंग्ये-री में किए गए थे.

योंगब्योन साइट से उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए प्लूटोनियम की आपूर्ति होती है.

अमरीका और दक्षिण कोरिया भी कह चुके हैं कि उत्तर कोरिया के पास परमाणु संवर्धन कार्यक्रम के लिए भी अतिरिक्त साइट हैं. ये भी माना जाता है कि उत्तर कोरिया में यूरेनियम की कच्ची धातु का विशाल भंडार है.

उत्तर कोरिया को रोकने के लिए क्या किया गया है?

अमरीका, रूस , चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने छह पक्षीय वार्ता में उत्तर कोरिया के साथ कई दौर की बातचीत हुई है.

निशस्त्रीकरण के लिए समझौतों की कई कोशिशों के बावजूद उत्तर कोरिया को रोकना संभव नहीं हो सका है.

2005 में एक ऐतिहासिक समझौते में उत्तर कोरिया आर्थिक प्रतिबंध हटाने और राजनीतिक छूट के बदले परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए तैयार हो गया था.

किम जोंग इल औऱ किम जोंग उन

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इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया के पूर्व शासक किम जोंग इल (दाएं) और अमरीका वार्ता शुरू करना चाहते थे.

इस समझौते के तहत 2008 में योंगब्योन का कूलिंग टावर भी ख़त्म कर दिया गया था.

लेकिन समझौता लागू करने में दिक्कतें आईं और 2009 में वार्ता रुक गई.

अमरीका को कभी विश्वास नहीं हुआ कि उत्तर कोरिया ने अपने सभी परमाणु संयंत्रों का ब्यौरा दिया है.

2010 में अमरीकी वैज्ञानिक सीगफ्राइड हेकर को उत्तर कोरिया ने योंगब्योन के यूरेनियम संवर्धन स्थल के बारे में बताया, उत्तर कोरिया ने दावा किया कि इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए है.

2012 में उत्तर कोरिया ने अचानक घोषणा कर दी कि वो अमरीका से मिलने वाली खाद्य सहायता के बदले अपनी सभी परमाणु गतिविधियों और मिसाइल टेस्ट को बंद कर देगा.

सियोल में वैज्ञानिक

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इमेज कैप्शन, 2009 में उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के कारण सियोल में भूकम्पीय तरंगे महसूस की गईं.

लेकिन उसी साल अप्रैल में उत्तर कोरिया ने एक रॉकेट लॉन्च करने की कोशिश की.

उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद मार्च 2013 में अमरीका से तीखी नोकझोंक और संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से नए प्रतिबंधों के बाद प्योंगयांग ने योंगब्योन संयंत्र को फिर से शुरू करने की कसम खाई.

उत्तर कोरिया का एकमात्र मित्र चीन उसका मुख्य व्यापार सहयोगी भी है.

2016 के परमाणु परीक्षण की दुनिया के कई देशों ने कड़ी निंदा की जिसमें चीन भी शामिल था, इसके अलावा उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध भी बढ़ा दिए गए.

हालांकि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर बीजिंग संभलकर बोलता रहा है.

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