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पाकिस्तान पर सख़्त नीति बनाने की ट्रंप को सलाह
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
वॉशिंगटन के कुछ जानेमाने थिंक टैंक्स ने ट्रंप प्रशासन को पाकिस्तान पर एक ऐसी नीति अपनाने की सलाह दी है जिससे उसे "क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों की कीमत चुकानी पड़े".
18 पन्नों की इस रिपोर्ट में ये भी सलाह दी गई है कि पाकिस्तान को ये पैग़ाम दिया जाए कि वो फ़ौरन अफ़गान तालिबान और हक्क़ानी नेटवर्क को मदद देना बंद करे और अगर ऐसा नहीं किया गया तो उसे आतंकवाद को प्रायोजित करनेवाला देश घोषित किया जा सकता है.
सूत्रों के अनुसार ये रिपोर्ट नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल, ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए, पेंटागन और विदेश विभाग को भेजी जा चुकी है और ये ख़ासी अहमियत रखती है क्योंकि इसे हेरिटेज फांउडेशन और हडसन इंस्टिट्यूट की तरफ़ से जारी किया है जो ट्रंप प्रशासन के काफ़ी क़रीबी माने जा रहे हैं.
इसे मुख्य रूप से अमरीका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्क़ानी और दक्षिण एशिया मामलों की जानकार लिसा कर्टिस ने लिखा है. वॉशिंगटन में लिसा कर्टिस के बारे में संभावनाएं जताई जा रही हैं कि वो विदेश विभाग में किसी अहम ओहदे पर भी नियुक्त की जा सकती हैं.
रिपोर्ट में प्रशासन से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव में और तेज़ी के लिए भी तैयार रहने को कहा गया है और परमाणु हथियारों से लैस दोनों देशों के बीच युद्ध की नौबत न आए उसके लिए पहले से ही योजना बनाने की सलाह दी गई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी अधिकारी बंद दरवाज़ों के पीछे अक्सर ये दलील देते हैं कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे गुट काफ़ी ताकतवर हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी हैं, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई आसान नहीं है.
उसके अनुसार, "अमरीका को इन गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न करने के इन बहानों से संतुष्ट होने की बजाए ये स्पष्ट कर देना चाहिए कि उनकी ज़मीन पर सक्रिय सभी आतंकवादी गुटों के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा."
इसमें सलाह दी गई है कि अगर पाकिस्तान की तरफ़ से समुचित कार्रवाई न हो तो फिर अमरीका को पाकिस्तानी फ़ौज और आईएसआई के उन अधिकारियों की एक सूची बनानी चाहिए जिनका आतंकवादी गुटों से संबंध रहा है और उनके अमरीका आने पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि इस रिपोर्ट में वॉशिंगटन में दक्षिण एशियाई मामलों के कई बड़े नाम, ख़ासतौर से ब्रूकिंग्स इंस्टिट्यूट के ब्रूस राइडल, हडसन इंस्टिट्यूट की अपर्णा पांडेय, मिडल-ईस्ट इंस्टिट्यूट के मार्विन वेनबॉम, जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की क्रिस्टीन फ़ेयर और सीएसआईएस के डेविड सेडनी ने भी योगदान दिया है.
साथ ही इसमें कही गई कई बातें ओबामा प्रशासन के दौरान कांग्रेस में भी सुझाई जा चुकी हैं. नए प्रशासन के कई अधिकारियों की राय भी इससे मिलती-जुलती है.
पाकिस्तान सरकार की दलील रही है कि उन्होंने आतंकवाद के ख़िलाफ़ जितना किया है उतना किसी और ने नहीं किया और उनकी क़ुर्बानियों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.
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