ट्रंप के हिंदू, मुस्लिम और सिख पावर ब्रोकर

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
अमरीका में अलग अलग धर्मों के तीन लोगों ने अपनी धर्म-बिरादरी की परवाह न करते हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनल्ड ट्रंप का साथ दिया है.
अब डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद वे अमरीका और भारत के बीच अहम कड़ी बन गए हैं.
शलभ कुमार, साजिद तरार और जेसी सिंह क्रमशः हिंदू, मुसलमान और सिख समुदाय से आते हैं. आइए जानते हैं वे कौन हैं?
शलभ शल्ली कुमार
वे भारतीय मूल के अमरीकी उद्योगपति हैं. उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के लिए प्रचार में लाखों डॉलर खर्च किए.

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तब उनकी बिरादरी के लोगों ने इसे 'फालतू' खर्च बताया था.
लेकिन आज वे नए प्रशासन में अपनी जगह बनाने के लिए बेताब भारतीय-अमरीकियों और ट्रंप की सहायता पाने की इच्छा रखने वाले भारतीय अधिकारियों तथा डोनल्ड ट्रंप के बीच एक अहम कड़ी बन गए हैं.
भारत के टीवी चैनल एनडीटीवी ने अपने एक शो में उन्हें 'ट्रंप तक पहुंचने का सीधा जरिया' बताया. तो एक शीर्ष वेबसाइट 'अमरीकन बाज़ार' ने उन्हें डीसी का 'सबसे प्रभावशाली भारतीय-अमरीकी पावर ब्रोकर' कहा.
कुमार कहते हैं, "मैं भारत और ट्रंप के बीच कड़ी बनना चाहता हूं. मैंने भारतीय अधिकारियों और ट्रंप की टीम के बड़े अधिकारियों के बीच दो बड़ी बैठकों की व्यवस्था की है."

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कुमार वित्त से जुड़े ट्रांजिशन टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं.
वे अमरीका और भारत के बीच के व्यापार को तीन गुना बढ़ाने और दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए काम कर रहे हैं.
चुनाव नतीजे आने के बाद से वे भारत तीन बार आ चुके हैं. उनके ट्विटर अकाउंट पर भारतीय योगगुरु बाबा रामदेव से गले लगाते हुए एक तस्वीर है. लिखा है कि वे अमरीका में योग से जुड़े 100,000 नौकरियों की संभावना पर बात कर रहे हैं.
इस ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप और उनके ट्रेजरी सचिव पद के उम्मीदवार स्टीवन नुचिन, पूर्व प्रवक्ता न्यूट गिनरीच को टैग किया गया है.
उनके मुताबिक वे सार्वजनिक नीतियों पर पुरजोर तरीके से हिंदू-अमरीकी आवाज की वकालत करते रहे हैं.
क्या वे ट्रंप की सरकार में कोई स्थान पाना चाहते हैं.
वो कहते हैं, "मैं पिछले 44 सालों से अपनी कंपनी का मालिक हूं. लेकिन हां, यदि मुझे सेवा का मौका मिला तो मुझे खुशी होगी.''
साजिद तरार
पाकिस्तानी मूल के अमरीकी साजिद तरार मुसलमान हैं. वे रियल स्टेट कारोबारी हैं.

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मुसलमान विरोधी बयान के वक्त तरार ने ट्रंप का समर्थन किया था. इसके लिए उन्हें उनके समुदाय के लोगों ने कटघरे में भी खड़ा किया.
तरार को फेसबुक पर लोगों ने बुरे बुरे मैसेज भेजे गए. उन्हें 'पाकिस्तान और इस्लाम' के लिए शर्म बताया गया.
लेकिन जब 9 नवंबर की सुबह आई तो फोन पर बधाइयों सिलसिला थम नहीं रहा था. उन्हें ट्रंप की जीत पर 80 से अधिक मैसेज मिले.
मैसेज में कहा गया कि उन्होंने पाकिस्तान का नाम ऊंचा किया है.
एक दिन पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारी उनके पास आए. उनसे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और होने वाले नए राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर बात करने में मदद करने के लिए कहा.
तरार बताते हैं, "मैंने कुछ मेल किए. इसके बाद दोनों के बीच फोन पर बातचीत हुई. राजदूत ने बाद में मुझे बुलाकर धन्यवाद कहा."
अमरीका में मुसलमान अपने रिज्यूमे के साथ नौकरी के लिए उनसे मिलने आने लगे हैं.
जेसी सिंह

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सिख-अमरीकी जेसी सिंह ने जब राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के वक्त ट्रंप का साथ दिया तो उन्हें इसके लिए "गद्दार" कहा गया.
उनका दावा है कि निजी समारोह में सिख समुदाय के लोगों ने उन पर "निजी हमले भी किए".
वे कहते हैं, "मुझे पहले से भरोसा था कि ट्रंप की जीत होगी. मैं जानता था कि यदि ट्रंप जीते तो हमारा समुदाय उनके निशाने पर कहीं नहीं होगा. इसलिए अपने लोगों की आपत्ति के बावजूद मैंने ट्रंप का समर्थन जारी रखा."
सिंह की बिरादरी के लोग भी उन्हें ट्रंप और सिख समुदाय के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखने लगे हैं. वे ट्रंप प्रशासन में नौकरियां पाने के लिए उनकी सिफारिश चाहते हैं.

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कुमार, तरार और सिंह ट्रंप के लिए चुनाव प्रचार के दौरान अगल अलग समुदायों के समर्थन का हाइप्रोफाइल उदाहरण हैं.
लेकिन ये सवाल बाकी है कि क्या आने वाले दिनों में ट्रंप की सरकार में उनकी खास भूमिका बनी रहेगी?












