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मोदी ने बड़प्पन दिखाया, अब पाकिस्तान सोचे...
भारत और पाकिस्तान के संबंधों में जारी खटास के बीच एक बार फिर 'बर्थडे डिप्लोमेसी' की चर्चा हो रही है.
दरअसल, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को जन्मदिन की बधाई दी.
ट्विटर संदेश के जरिए मोदी ने शऱीफ के स्वस्थ और लंबे जीवन की कामना की.
इसके पहले बीते साल भी मोदी अचानक नवाज़ शऱीफ के जन्मदिन के मौके पर लाहौर पहुंच गए थे. इसे भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहतर करने के लिए 'बर्थडे डिप्लोमेसी' के तौर पर देखा गया था.
हालांकि, कुछ दिन बाद जनवरी महीने में पठानकोट में हुए चरमपंथी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्ते पटरी से उतर गए और फिलहाल तल्खी बरकरार है.
रिश्तों में आई दरार के बीच मोदी के बधाई संदेश के क्या राजनयिक तौर पर भी कोई मायने हैं, पढ़िए पाकिस्तान की वरिष्ठ पत्रकार मरियाना बाबर का आंकलन
इन संदेशों के बहुत मायने हैं.
ट्विटर पर जन्मदिन की बधाई देना मोदी साहब का बड़प्पन है. नवाज़ शरीफ तो काफी शर्मिंदा होंगे. यहां वो चाहते थे कि ताल्लुकात बेहतर हों.
ऐसे लगा कि अभी यहां से बात उठेगी. एक दम पठानकोट की घटना हो गई. ये एक शर्मिंदगी थी पाकिस्तान की हुकूमत के लिए कि अगर आप अपनी सीमाओं को सुरक्षित नहीं रख सकते. उसकी निगरानी नहीं कर सकते. आपके यहां से जिहादी जाकर पास के मुल्क में दहशतगर्दी करते हैं. फिर आप कहते भी हैं कि लाहौर से टेलीफोन कॉल गए.
अभी पाकिस्तान का जो सुरक्षा संस्थान है, उसे सोचना चाहिए कि उन्हें क्या मिलेगा? अगर वो नॉन स्टेट एक्टर्स से दहशतगर्दी कराएंगे या होने देंगे. फिर भारत भी आपको किसी जरिए से तंग करेगा. ये तो एक देश का अधिकार है.
माहौल बेहतर होने के संकेत दोनों देशों के लिए बेहतर होंगे. नियंत्रण रेखा पर बीते करीब दस दिन से गोलीबारी थमी हुई है. वहां 2003 के समझौते का कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है.
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि वो बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं. लेकिन बातचीत के लिए माहौल बनाना होगा.
इसके पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी इशारा किया था कि बातचीत के लिए हम हमेशा तैयार रहते हैं लेकिन उसमें कश्मीर का मुद्दा शामिल होगा.
मुझे लगता है कि बीते दस दिनों में रूस, चीन और अमरीका जैसे देशों की ओर से दोनों देशों को कोई संकेत मिला है.
भारत सरकार के मंत्री भी आजकल ऐसी धमकी नहीं दे रहे कि ऐसा करोगे तो पाकिस्तान भेज देंगे.
इसके साथ ये भी अहम है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सेना के कोर कमांडर ने ये कहते हुए दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया कि अगर भारत चाहता है तो वो भी चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर में शामिल हो जाए.
एक संवेदनशील प्रांत में जिसे लेकर पाकिस्तान की सरकार कहती है कि वहां भारत अलगवादियों की मदद कर रहा है, वहां ये बहुत बड़ी बात है.
चीन ने भी इस पर तत्काल प्रतिक्रिया दी कि अगर पाकिस्तान चाहता है तो भारत को साथ आना चाहिए.
इस तरह के संदेश आ जा रहे हैं लेकिन ये काफी नहीं है. ये दोनों देश कुछ सालों में सौ साल के हो जाएंगे.
तरीका ये है कि न दहशतगर्दी यहां से की जाए न भारत तंग करे अपने खुफिया तंत्र को भेजकर.
भारत की फ़िल्मों का पाकिस्तान में प्रदर्शन शुरू हो गया है. उसका भी ख़ास विरोध नहीं हुआ.
तमन्ना यही है कि 2017 दोनों देशों के लिए बेहतर साल हो.
माहौल पहले भी बना है और बिगड़ गया है. इस बार बात न बिगड़े इसके लिए फ़ौरन कोई रास्ता नहीं दिखता. लेकिन पाकिस्तान में सुरक्षा तंत्र में बदलाव हुए हैं.
जनरल बाजवा सेना प्रमुख बने हैं. उन्होंने अब तक जनरल राहिल शरीफ की तरह भारत के प्रति आक्रमक रवैया नहीं दिखाया है. लेकिन ताली एक हाथ से नहीं बजती है. दोनों तरफ से कुछ न कुछ होना चाहिए.
जब मोदी सरकार की ओर से नवाज़ शरीफ को समर्थन मिलता है तो उसके जरिए पाकिस्तान में लोकतंत्र मजबूत होता है. जब नवाज़ शऱीफ की टांग खींची जाती है तो ऐसे लोग ताकतवर होते हैं जो नहीं चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हों.
साल 2017 में भारत को नेतृत्व करना चाहिए. भारत बड़ा देश है. बड़े भाई की तरह है. उसे पाकिस्तान में लोकतंत्र का समर्थन करना चाहिए. इससे यहां बदलाव आएगा. लोग चाहेंगे कि बदलाव आए.
(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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