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वाममोर्चे से 'संबंध' पर ममता को आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल में आम चुनाव के दौरान ही कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गठबंधन के बीच मतभेद सामने आ गए हैं. कांग्रेस ने चुनाव के बाद गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में वाम मोर्चे से संबंध बनाने की राह खोल रखी है जो कि तृणमूल कांग्रेस को नागवार गुज़री है. ममता बनर्जी ने इस बारे में कहा है कि कांग्रेस ने अगर सरकार बनाने के लिए वामपंथी दलों का समर्थन लिया या कोई समझौता किया तो उनकी पार्टी का कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं होगा. पश्चिम बंगाल में सरकार चला रहे वाम मोर्चे को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-तृणमूल कांग्रेस गठबंधन से तगड़ी चुनौती मिल रही है. मगर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने बंगाल दौरों में कहा था कि सरकार बनाने के लिए वाम मोर्चे का समर्थन लेने का विकल्प कांग्रेस के लिए खुला हुआ है. उनके इन बयानों से तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी काफ़ी नाराज़ हैं क्योंकि उनका पूरा ध्यान पश्चिम बंगाल से वामपंथी दलों को हटाने पर लगा है. समझौता बर्दाश्त नहीं ममता बनर्जी ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "अगर कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए वाममोर्चे से समर्थन लिया या कोई समझौता किया तो हम समझौता तोड़ लेंगे. हमे कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं है" पिछले हफ़्ते तक ममता अपने कार्यकर्ताओं से कह रहीं थीं कि अगर उनके गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया तो वह केंद्र पर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए दबाव डालेंगी और उसके बाद राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होंगे. चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "एक बार हमने ऐसा कर दिया तो यहाँ वाममोर्चे की सरकार गिर जाएगी." लेकिन अब नहीं लगता कि ममता बनर्जी का कोई साथी बचा है. दरअसल भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्त्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से तृणमूल कांग्रेस के बाहर आने की वजह से भाजपा भी अब उनकी विरोधी हो चुकी है. कांग्रेस भी अब चुनाव बाद की परिस्थितियों के लिए वाममोर्चे के साथ बातचीत की इच्छुक दिख रही है क्योंकि उन्हें लगता है कि सरकार बनाने के लिए उसे वाममोर्चे के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी. बयान से नाराज़ प्रधानमंत्री की ओर से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को अच्छा इंसान और अपना अच्छा दोस्त बताने से भी ममता बनर्जी ख़ासी परेशान दिख रही हैं. इसके जवाब में ममता बनर्जी ने कहा है, "बुद्धदेव के हाथ किसानों के ख़ून से रंगे हुए हैं ऐसे में वे अच्छे इंसान कैसे हो सकते हैं." इस तरह वामपंथियों के प्रति कांग्रेस के व्यवहार को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के मतभेद सतह पर आ गए हैं. इसके साथ ही दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच भी मिले-जुले संकेत जा रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस के एक समर्थक मनीष रॉय का कहना है कि इससे समर्थकों में अस्पष्ट सा संदेश जा रहा है मगर साथ ही वह उम्मीद करते हैं कि ये गठबंधन विजयी हो पाएगा. उनकी मित्र माला सेनगुप्ता कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहती हैं, "उनका हमेशा से वाममोर्चे के साथ गुप्त समझौता रहा है, दीदी (ममता बनर्जी) को उनपर विश्वास हीं नहीं करना चाहिए था." वहीं वाम मोर्चे का कहना है कि वे कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन नहीं देंगे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी महासचिव प्रकाश कराट ने पत्रकारों से कहा, "भारतीय राजनीति में हम ग़ैर कांग्रेसी और ग़ैर भाजपा विकल्प पर काम कर रहे हैं." अब पश्चिम बंगाल में जो लोग वामपंथी मोर्चे को हटाना भी चाहते हैं वे थोड़ी असमंजस की स्थिति में हैं और अभी जबकि राज्य में दो चरणों का मतदान बाक़ी है वाममोर्चे को इससे शायद ही परेशानी हो. |
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