पंजाब में आप पिछड़ी तो कौन आगे निकला?

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- Author, जगतार सिंह
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
पूर्व क्रिकेटर और राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू ने नया फ़ोरम आवाज़-ए-पंजाब बनाने का ऐलान किया है.
फ़ोरम की घोषणा करते हुए उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी पर भी निशाना साधा है
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पंजाब के दौरे पर हैं.
सिद्धू के ऐलान के बाद पंजाब के राजनीतिक मैदान में पांच मोर्चे सक्रिय हो गए हैं. पहले मुख्य मुक़ाबला अकाली दल-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस के बीच होता रहा था.
तीसरे मोर्चे के तौर पर आम आदमी पार्टी ने एंट्री ली. आम आदमी पार्टी से नाराज़ सुच्चा सिंह छोटेपुर भी नया गठबंधन बनाने की तैयारी में है और अब सिद्धू ने पांचवां मोर्चा बना लिया है.

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पंजाब में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बने पांच फ्रंटों में मेरे ख्याल से आपस में कोई गठबंधन नहीं होने जा रहा है.
आम तौर पर पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल के बीच टकराव होता था. लेकिन इस बार मुख्य तौर पर जिन दो ध्रुवों के बीच चुनावी लड़ाई होती दिख रही है, वो है मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के ख़िलाफ़ एंटी इंकबेंसी फैक्टर और दूसरा दिलचस्प पहलू आम आदमी पार्टी के आने से सामने आया है.
आप के आने से बाहरी बनाम पंजाबी की बहस छिड़ गई है. आप की जो टीम दिल्ली से पंजाब आई है, उसमें 54 लोग थे. लोगों का गुस्सा इन लोगों पर निकल रहा है. लोगों का कहना है कि इन बाहरी लोगों को बाहर से लाकर उनके ऊपर बैठा दिया गया है.
अब इसमें दिल्ली और पंजाब में सेक्स स्कैंडल और भ्रष्टाचार के मामले भी जुड़ गए हैं. इसका सीधा असर आप पर पड़ रहा है.

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नवजोत सिंह सिद्धू की बात इनके साथ नहीं बनी. उनका कहना है कि आप के लोग उनका इस्तेमाल किसी शोपीस के तौर पर करना चाहते थे.
उधर, अरविंद केजरीवाल ने लुधियाना में एक बयान दिया है कि जब तक वो प्रकाश सिंह बादल को अंदर नहीं कर देते तब तक वो आराम से नहीं बैठेंगे.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यही बात 2002 के चुनाव में कही थी. उन्होंने तो प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल के ऊपर भ्रष्टाचार की मुकदमा भी कर दिया था लेकिन जब अकाली दल की दोबारा से सरकार बनी तो यह मुकदमा रफा-दफा हो गया.
यह कोई नई बात केजरीवाल ने नहीं कही है. वो पंजाब के लिए क्या करना चाहते हैं, ये किसी को नहीं पता.
जहां तक बात सिद्धू की है तो छह महीने के समय में कोई नई पार्टी बनाकर टक्कर देना मुझे लगता नहीं कि संभव है.

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भले ही वो आने वाले दिनों में नई पार्टी की घोषणा कर दें लेकिन पार्टी का ढांचा खड़ा करने में वक़्त लगता है.
जब तक आप ऊपर थी तब तक अकाली गठबंधन और कांग्रेस दोनों नीचे थे. अब ऐसा नहीं है. मुझे नहीं लगता कि अकाली दल वापस रेस में शामिल हो पाएगी और बीजेपी तो पंजाब में नाम मात्र की है.
अकाली दल के ख़िलाफ़ लोगों को बहुत गुस्सा है. इसलिए कांग्रेस अगर जोर लगाती है तो वो उस स्थिति में पहुंच सकती है कि उसे 35-40 सीटें आ जाएं.
बाकी फ्रंट जिसमें सुच्चा सिंह छोटेपुर और नवजोत सिंह सिद्धू जैसे शामिल हैं, भी अगर थोड़ी-बहुत सीटें ले आए तो हो सकता कि चुनाव बाद इनमें गठबंधन हो जाए और ये सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएं, हालाँकि ये दूर की कौड़ी लगती है.
(वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह की बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)
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