कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व का लाभ भी बीजेपी को

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शुक्रवार को हुई राहुल गांधी की अयोध्या यात्रो को कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड के तौर पर देखा जा रहा है.

लेकिन कांग्रेस को समझना होगा की वे राहुल की यात्रा को सॉफ्ट हिंदुत्व से जोड़ें या हार्ड हिंदुत्व से या फिर एग्रेसिव हिंदुत्व से, इस सारे हिंदुत्व जोड़-घटाव का फ़ायदा बीजेपी को ही मिलेगा.

उत्तर प्रदेश की राजनीति जाति पर बंट कर चलती है. कांग्रेस का लक्ष्य तो ब्राहम्ण वोट रहे हैं. वो अभी मुस्लिम वोट पर ध्यान दे रहे हैं.

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क्योंकि कांग्रेस बहुत अच्छे से जानती है कि मुस्लिम ही ऐसे वोट हैं जो दाएं-बाएं जा सकते हैं. और पिछले चुनाव में यही मुस्लिम वोटर मुलायम सिंह यादव के साथ थे.

लेकिन मुज्ज़फ्फर नगर दंगे में जिस तरह से मुसलमानों के साथ व्यवहार किया गया उससे वो मुलायम सिंह से नाराज़ हैं.

दंगा कैंप से जिस तरह मुसलमानों को हटाया गया, जिस तरह से कैंप में रह रहे मुसलमानों के साथ व्यवहार किया गया, बदसलुकियां हुईं, उन्हें कैंप से उजाड़ा गया मुसलमानों के साथ व्यवहार किया गया, ये सब मुलायम के ख़िलाफ़ हैं.

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उसके बाद मुलायम का यह कहना कि ''अयोध्या में कार सेवकों पर गोली चलाकर हमने बड़ी ग़लती की,'' जैसे स्टेटमेंट्स के बाद मुसलमानों में मुलायम सिंह के खिलाफ़ संदेह उत्पन्न हो गया है.

इससे पहले 2009 में भी जब कांग्रेस को लोकसभा में 21 सीटें मिलीं थीं, उसका कारण मुलायम सिंह का कल्याण सिंह से हाथ मिलाना.

तब भी मुस्लिम वोट बड़ी तादाद में कांग्रेस की तरफ मुड़े थे, तब कांग्रेस ने सोचा ही नहीं था कि उन्हें इतनी सीटें मिलेंगी. इस समय कई ऐसे कैंडीडेट थे जिन्हें ये लगता था कि उनकी ज़मानत ज़ब्त हो जाएगी, वो जीते और सांसद भी बने.

ये सारे उलट फेर वहीं-वहीं हुए जहां ज्यादा तादाद में मुस्लिम वोट थे.

लेकिन अब बीजेपी तक को एहसास है कि अयोध्या के नाम पर वोट नहीं मिलते हैं. पिछली बार मोदी ने भी चुनाव में अयोध्या का नाम नहीं लिया था.

अयोध्या का फ़ायदा जब बीजेपी को नहीं मिल रहा है तो कांग्रेस को राहुल के दौरे से क्या फ़ायदा मिलेगा?

(वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान से वात्सल्य राय की बातचीत पर आधारित)

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