दो औरतों की प्रेम कहानी

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    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"वो हाथ को हल्के से छू देती है. ये हाथ वापस नहीं खींचती.

तो वो हाथ और कस के पकड़ लेती है. उंगलियों से खेलने लगती है."

ये स्क्रीनप्ले है दो औरतों की प्रेम कहानी का.

‘द अदर लव स्टोरी’ (<link type="page"><caption> http://theotherlovestorywebseries.com/</caption><url href="http://theotherlovestorywebseries.com/" platform="highweb"/></link>) यानि ‘एक दूसरी प्रेम कहानी’.

भारत के बेंगलूरू शहर में फ़िल्माई गई ये कहानी शनिवार को एक वीडियो सीरीज़ के तौर पर इंटरनेट पर रिलीज़ की गई.

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पर भारत में समलैंगिक यौन संबंध अब भी ग़ैरक़ानूनी हैं. ऐसे में ये फ़िल्म बनाने के लिए पैसे देने को कोई प्रोड्यूसर तैयार नहीं था.

फ़िल्म की निर्देशक रूपा राव के मुताबिक़ कुछ को फ़िल्म में सेक्स सीन चाहिए थे और कई परेशान थे कि शायद दर्शक इसे पसंद ना करे.

रूपा बताती हैं, “आइडिया सबको पसंद आता था, पर कोई कहता था कि फ़िल्म बैन होने का ख़तरा है तो एक ने पलटकर कहा कि उनके मां-बाप ने ऐसी फ़िल्म में पैसे लगाने से मना कर दिया है”.

आखिरकार रूपा ने अपने प्रोजेक्ट को एक ‘क्राउडफ़ंडिंग’ वेबसाइट पर डाला. ‘क्राउडफ़ंडिंग’ यानि आम लोगों से पैसे इकट्ठा करने का तरीक़ा.

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इससे उन्हें पैसे तो मिले पर अपनी सीरीज़ उन्हें यूट्यूब पर छोटे-छोटे एपिसोड्स के ज़रिए रिलीज़ करनी पड़ी. यानि इससे पैसे वापस कमाने की उम्मीद ना के बराबर है.

साल 1998 में भारत में पहली बार किसी समलैंगिक रिश्ते को एक मुख्यधारा की फ़िल्म में दिखाया गया था.

लेकिन इस फ़िल्म, ‘फ़ायर’ का कई दक्षिणपंथी गुटों ने हिंसक विरोध किया था.

उस प्रकरण से समलैंगिकता और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सार्वजनिक बहस तो छिड़ी पर 18 साल बाद भी इस मुद्दे पर सिनेमा में खुल कर बात नहीं हो रही.

इसी साल समलैंगिकों के प्रति ‘फ़ोबिया’ या डर पर बनी एक और सीरिज़ आई – ‘ऑल अबाउट सेक्शन 377’. (<link type="page"><caption> https://www.youtube.com/channel/UCFzWoc9pT9E18gscS5ghElg</caption><url href="https://www.youtube.com/channel/UCFzWoc9pT9E18gscS5ghElg" platform="highweb"/></link>)

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ये भारत में समलैंगिक यौन संबंधों को ग़ैरक़ानूनी बताने वाली आईपीसी की धारा 377 और उसके समाज पर असर पर बनी है.

पर ये भी प्रोड्यूसर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की कमी को चलते इंटरनेट पर ही रिलीज़ हुई.

ये ऑडियंस को पसंद आई तो अब एक सीक्वेल तैयार हो रही है और ऐडवर्टाइज़र्स ढूंढे जा रहे हैं.

‘एजेंट्स ऑफ़ इश्क’ नाम की वेबसाइट चलानेवाली पारोमिता वोहरा के मुताबिक़ इस सबके लिए समाज में जिज्ञासा है पर प्रोड्यूसर्स नए काम में पैसा लगाने का ख़तरा उठाना नहीं चाहते.

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इसीलिए अपनी वोबसाइट को वो प्यार, यौन संबंध और रिश्तों पर खुली बातचीत का ज़रिया बना रही है.

वो कहती हैं, "रूढ़िवादी सोच से ज़्यादा, पैसा, मार्केट को देखकर लगाया जाता है, प्रोड्यूसर्स ज़्यादातर वहीं पैसा लगाना चाहते हैं जहां उन्हें मुनाफ़े और तय ऑडियंस की उम्मीद है, वो पका-पकाया खाना चाहते हैं नई रेसिपी से घबराते हैं."

भारत में समलैंगिक यौन संबंध ग़ैर-क़ानूनी होने के बावजूद, ये समुदाय अपनी आवाज़ बुलंद कर रहा है.

बदलती तकनीक इनकी कहानियां कहने के नए रास्ते तो निकाल रही है पर नज़रिया बदलने पर ही ये रास्ते आर्थिक रूप से व्यावहारिक बन पाएंगे.

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