पाकिस्तान को लेकर भूल-भुलैया में मोदी सरकार

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
‘मेज़बान की थाली बिन छुए’ इस्लामाबाद से लौटे भारतीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह.
अटकलबाज़ियों का दौर था. फिर आई संसद की बारी.
संसद में सार्क गृहमंत्री सम्मेलन का ब्योरा देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वो ‘पाकिस्तान लंच करने के लिए नहीं’ गए थे.
राजनाथ सिंह ने सम्मेलन में दिए अपने भाषण का भी ब्योरा दिया जिसमें अच्छे आतंकवादी-बुरे आतंकवादी के फ़र्क की ग़लत नीति, स्टेट और नॉन स्टेट एक्टर्स के ख़िलाफ़ सख़्ती से निपटने और वांटेड क़रार दिए गए लोगों के प्रत्यर्पण की बात शामिल थी.
इसे भारतीय मीडिया का एक हिस्सा पाकिस्तान को करारा संदेश बता रहा था.
हालांकि राजनाथ सिंह ने पाकिस्तानी सरकार के ज़रिए अपने भाषण को <link type="page"><caption> ब्लैक आउट</caption><url href="http://www.dnaindia.com/india/report-saarc-meet-pakistan-blacks-out-rajnath-singh-s-speech-at-saarc-conference-say-reports-2241101" platform="highweb"/></link> करनेवाली बात पर ज़रा सतर्कता बरती और महज़ इतना कहा कि ‘जब वो इस्लामाबाद सार्क सम्मेलन में भाषण दे रहे थे तब दूरदर्शन, पीटीआई और एएनआई को अंदर प्रवेश की इजाज़त नहीं दी गई.’
राजनाथ सिंह का बयान तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन के सवाल पर दिया था जिसमें पूछा गया था कि भारतीय गृहमंत्री की स्पीच को ब्लैक आउट किए जाने पर दो जो तरह की बातें सामने आ रही हैं, उस पर राजनाथ सिंह स्थिति स्पष्ट करें.

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ब्रायन का कहना था कि एक तरफ़ भारतीय मीडिया के कुछ हिस्सों को कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग नहीं करने देने की बात हो रही है, जबकि कुछ जगहों पर कहा जा रहा है कि भारतीय गृहमंत्री के स्पीच को ब्लैक आउट किया गया. वहीं कुछ जगहों पर कहा जा रहा है कि सबकुछ परंपरा के मुताबिक़ हुआ.
राजनाथ सिंह ने कहा, ".. जहां तक मेरे भाषण को ब्लैकआउट करने की बात है मुझे पिछले सार्क सम्मेलनों में अपनाई गई परंपरा के बारे में जानकारी नहीं है. मुझे इस बारे में विदेश मंत्रालय से बात करनी होगी. मैं नहीं कह सकता कि पाकिस्तान ने कवरेज की इजाज़त नहीं देके सही किया या ग़लत किया है."
नरेंद्र मोदी सरकार के दो विभागों में ही पाकिस्तान के विरूद्ध रणनीति को लेकर कितना बड़ा अंतर है ये इस बात से साफ़ हो जाता है कि ब्लैक आउट के मुद्दे को भारतीय मीडिया में कुछ इतनी प्रमुखता मिली कि शायद विदेश मंत्रालय को इस मामले में दख़ल देना पड़ा.
कई अख़बारों और उन चैनलों में भी जहां ब्लैक आउट की ख़बर छपी थी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि <link type="page"><caption> ये ख़बरें भ्रम पैदा करनेवाली</caption><url href="http://www.ndtv.com/india-news/in-islamabad-rajnath-singh-raises-glorification-of-terrorists-as-martyrs-1440177" platform="highweb"/></link> हैं और ये परंपरा रही है कि सार्क में उद्घाटन भाषण के अलावा किसी भी स्पीच की फ़िल्मिंग नहीं की जाती रही है.
इस मामले की तो सोशल मीडिया पर भी खिल्ली उड़ रही है.
कई जगहों पर ये भी पूछा जा रहा है कि सरकार जिस मुल्क को अपनी सीमा के भीतर और सीमा पर होनेवाली लगभग हर गड़बड़ी के लिए ज़िम्मेदार बताती है उससे निपटने की सरकार की कोई साफ़ नीति नहीं दिखती.
हाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजनाथ सिंह से ही सवाल किया गया था कि क्या हाफ़िज़ सईद का संगठन जमात उद दावा भारत के प्रतिबंधित संगठनों की सूची में है, तो ये साफ़ हुआ था कि इस संगठन का वहां नाम ही नहीं है.

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भारत 2008<link type="page"><caption> मुंबई हमलों </caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2009/08/090801_chidambaram_pak_pp.shtml" platform="highweb"/></link>के लिए हाफ़िज़ सईद के संगठन को ज़िम्मेदार बताता रहा है.
भारत प्रशासित कश्मीर में मारे गए चरमपंथी बुरहान वानी की मौत पर पाकिस्तान में शहीद दिवस के आयोजन में हाफ़िज़ सईद का संगठन बढ़ चढ़कर शामिल हुआ था.
पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से देने वाले नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ-ग्रहण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को दावत दी और अपनी कूटनीतिज्ञ कौशल पर ख़ूब वाहवाही बटोरी.
फिर कश्मीर सीमा पर गोलीबारी को लेकर दोनों मुल्कों के बीच बातचीत तक रूक गई, जो लंबे वक़्त तक रुकी रही.
अफ़ग़ानिस्तान यात्रा पर गए प्रधानमंत्री फिर अचानक से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के यहां एक निजी समारोह में हिस्सा लेने चले गए थे.
क्या पाकिस्तान पर रणनीति को लेकर ये भ्रम सरकार के शीर्ष से ही तो नीचे की ओर नहीं जाता?
जवाब अधूरा सा...
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