अर्णब गोस्वामी पर क्यों बरस पड़ीं बरखा दत्त?

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करगिल विजय दिवस पर मंगलवार को अंग्रेज़ी चैनल टाइम्स नाउ पर डिबेट के बाद उसके एंकर अर्णब गोस्वामी सोशल मीडिया में ट्रेंड करने लगे.
दरअसल अर्णब गोस्वामी ने टाइम्स नाउ के प्राइम टाइम न्यूज़ आवर कार्यक्रम में न केवल करगिल युद्ध में मारे गए भारतीय सेना के जवानों और उनकी वीरता का गुणगान किया बल्कि उन्होंने भारतीय मीडिया के एक ख़ास वर्ग को भी आड़े हाथों लिया, जिसे वो राष्ट्रविरोधी मानते हैं.
सोशल मीडिया में अर्णब के इन बयानों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई.
एनडीटीवी में उनकी पूर्व सहकर्मी बरखा दत्त ने ट्विटर पर लिखा, "टाइम्स नाउ मीडिया अन्य पत्रकारों पर रोक लगाने और उनके खिलाफ़ मुकदमा चलाने और सज़ा दिलाने की वकालत कर रहा है. क्या अर्णब पत्रकार हैं? मुझे शर्म आती है कि मैं उसी पेशे से हूं जिससे वे जुड़े हैं."

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उन्होंने लिखा है, "वो पाकिस्तान परस्ती के बारे में लगातार बोलते हैं और जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी के बीच गठबंधन, पाकिस्तान और हुर्रियत से बात करने के समझौतों पर, एक शब्द नहीं बोलते हैं."
उन्होंने आगे लिखा, "लेकिन अर्णब गोस्वामी सरकार पर क्यों चुप हैं? क्या ये चमचागिरी है? कल्पना करिए, एक पत्रकार असल में मीडिया के एक हिस्से को चुप कराने के लिए सरकार को प्रोत्साहित करता है, ग़लत तरीक़े से उनकी तुलना आईएसआई के एजेंट और आतंक के समर्थकों से करता है और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता है."
अर्णब ने अपने कार्यक्रम में मीडिया से जुड़े कुछ लोगों को छद्म उदारवादी करार दिया और कहा कि ऐसे पत्रकारों को खुद से पूछना चाहिए कि क्या वे करगिल युद्ध के शूरवीरों पर बोलने और लिखने के काबिल भी हैं? उन्होंने ये भी कहा कि मीडिया से जुड़े कुछ लोग जम्मू कश्मीर में काम कर रहे सेना के जवानों को भला-बुरा कह रहे हैं.
अर्णब की इन टिप्पणियों के बाद कई भारतीय पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ़ एकजुट होने की अपील की है.
न्यूज़ 18 से जुड़े ज़का जैकब ने ट्विटर किया, "अति राष्ट्रवादी और सरकार समर्थक लोग खुद को पत्रकार बता रहे हैं. शर्मनाक!"
वहीं एस रुक्मिणी ने लिखा, "डराने वाली बात, और ये बातें भारत में सबसे ज़्यादा देखे जानेवाले अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल से आ रही हैं."
प्रेम पणिक्कर ने लिखा, "मुझे बहुत अफ़सोस है कि मैं अर्णब को एक मज़ाक की तरह लेता था और उन पर हंसता था. लेकिन वो तो दिल के दौरे की तरह हैं."
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें मुंबई हमलों के कथित मास्टर माइंड हाफ़िज़ सईद बरखा दत्त और कांग्रेस की तारीफ़ करते नज़र आ रहे हैं.

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हाफ़िज़ सईद वीडियो में कहते हैं, "हमें भारत में होनेवाली चरमपंथी गतिविधियों के लिए अक्सर जिम्मेदार ठहराया जाता है और भारत में एक तबका लगातार ये काम कर रहा है, जबकि बरखा दत्त जैसे अच्छे लोग भी भारत में मौजूद हैं." उन्होंने कांग्रेस पार्टी की भी तारीफ़ की और कहा, "कांग्रेस ने बीजेपी से कहा है कि चरमपंथी घटनाओं के लिए आप दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने की बजाए अपने घर को देखो".
इस पर बीजेपी नेता संबित पात्रा ने अर्णब गोस्वामी के कार्यक्रम में बिना नाम लिए बरखा दत्त और कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि, "हाफ़िज सईद एक चरमपंथी हैं जिनसे हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी संपर्क में था."
संबित पात्रा के कहने का आशय ये था कि ऐसा व्यक्ति अगर किसी पत्रकार और पार्टी की तारीफ़ करता है तो ये चिंता की बात है.
वहीं ट्विटर पर कुछ लोग अर्णब गोस्वामी की तारीफ़ करते भी नज़र आ आए. अभिषेक चक्रवर्ती ने लिखा, "अर्णब गोस्वामी ने कुछ पत्रकारों को उनका सही चेहरा दिखा दिया है."
प्रसन्न विश्वनाथन ने लिखा, "अर्णब गोस्वामी का कार्यक्रम देखा जिसमें वो लगातार बोल रहे थे. लेकिन उन्होंने देश के मूड को सही तरीके से व्यक्त किया है."
धवल पटेल ने ट्विटर पर लिखा, "अर्णब गोस्वामी ने बरखा जैसे छद्म पत्रकारों और उनके पूरे लुटियन गैंग का सच सामने ला दिया है."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने ट्वीट किया, "मैं अर्णब की कही ज़्यादातर बातों से सहमत नहीं हूं, पर जम्मू कश्मीर के मीडिया कवरेज के बारे में उनकी बात में कुछ सच्चाई है."
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