कमलनाथ का नाम पहले भी सिख दंगों से जुड़ा

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
कमलनाथ प्रकरण से इतना तो साफ़ हो गया है कि एक के बाद एक राज्यों में हार का सामना कर रही कांग्रेस पार्टी में रणनीतिकारों की कमी है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिना सोचे समझे, बिना विचार विमर्श किये आनन फ़ानन में कमलनाथ को आल इण्डिया कांग्रेस कमिटी का पंजाब प्रभारी बनाना ग़लत निर्णय था.
ऐसा इसलिये क्योंकि 1984 के सिख दंगों में कमलनाथ पर आरोप लगे थे. हालांकि कमलनाथ इन आरोपों से इंकार करते हैं.

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बहरहाल, कमलनाथ को शायद समझ में आ गया कि उनको चुना जाना सही फ़ैसला नहीं था और उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष को भेज दिया.
यूपीए के शासनकाल में मंत्री रहे मनोहर सिंह गिल ने तो कहा था कि कमलनाथ की नियुक्ति दरअसल 'सिखों के ज़ख्मों पर नमक छिड़कने' के जैसा है.

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कमलनाथ के इस्तीफ़े की पुष्टि की है.
पंजाब के पूर्व मुख्य मंत्री कैप्टेन अमरेंद्र ने भी सोनिया गांधी से मुलाक़ात की थी. कहा जा रहा है कि उन्होंने भी कमलनाथ की नियुक्ति के बारे में विस्तार से चर्चा की.
अपने दो पन्नों के इस्तीफ़े में उनका कहना है कि उनका '1984 के दंगों से कोई लेना देना नहीं है'.
उनका यह भी कहना है कि वर्ष 1984 से लेकर वर्ष 2005 तक उनके खिलाफ़ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया.
कारवान पत्रिका के राजनीतिक सम्पादक हरतोष सिंह बल का कहना है कि कांग्रेस ने कमलनाथ को पंजाब का प्रभारी बनाके अपने 'एरोगेंस' का परिचय दिया है.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं कि स्वाभाविक है कि इस क़दम से कांग्रेस को नुक़सान होना तय ही था.
वो कहते हैं: "चुनावी नफ़ा नुक़सान अपनी जगह मगर कांग्रेस ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के लिए अभी तक माफ़ी नहीं माँगी है. यह क्या दर्शाता है ? यह पार्टी का अक्खड़पन नहीं दर्शाता तो और क्या? कांग्रेस तो आप ही लाई है मुश्किलों के बादल."

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नियुक्त किये जाने के साथ ही साथ कमलनाथ पर आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने निशाना साधा और आरोप लगाया कि सिख विरोधी दंगों में शामिल किसी को पंजाब का प्रभारी कैसे बना सकती है कांग्रेस.
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का कहना था कि ऐसा कर कांग्रेस ने सिखों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.
जबकि आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि कमलनाथ को कांग्रेस 'दंगों के लिए इस तरह पुरुस्कृत' कर रही है.

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कमलनाथ पर आरोप है कि दिल्ली के रक़ाबगंज गुरुद्वारे पर हुए हमले में वो भी शामिल थे.
आम आदमी पार्टी के नेता और जाने माने वकील एचएस फूलका ने वर्ष 2006 में एक गवाह अदालत के सामने पेश किया जिसका नाम मुख्त्यार सिंह बताया जाता है.

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इस गवाह के बयान के आधार पर ही कमलनाथ का नाम सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में शामिल किया.
एनडीए शासनकाल में सिख विरोधी दंगों की जांच कर रहे नानावटी कमीशन के सामने कमलनाथ की पेशी भी हुई थी.
उससे भी पहले न्यायमूर्ति रंगनाथ मिसरा की कमिटी के सामने भी कमलनाथ की पेशी हो चुकी है जब पत्रकार संजय सूरी बतौर एक गवाह उपस्थित हुए थे और उन्होंने कमलनाथ की पहचान की थी.
कमलनाथ ने पार्टी को भेजे गए पत्र में सफ़ाई देने की कोशिश करते हुए आरोप लगाया कि एच एस फूलका अब आम आदमी पार्टी में हैं, इसलिए वे फिर से उनपर आरोप लगा रहे है.

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चिट्ठी में उन्होंने आगे लिखा है कि राजनीतिक हितों की वजह से कुछ लोग उन्हें दंगों से जोड़ रहे हैं.
वो कहते हैं : ''मेरे खिलाफ़ 2005 तक इस बारे में एक भी एफआईआर नहीं थी. इस मामले में पहली बार मेरा नाम 1984 की घटना के 21 साल बाद उछला गया है.
पिछली एनडीए सरकार द्वारा गठित नानावटी कमीशन की जांच के बाद मेरे खिलाफ़ किसी भी प्रकार का कोई सबूत नहीं मिला. मगर कमलनाथ ने आश्चर्य जताया है कि तब किसी ने उनका विरोध नहीं किया जब वो दिल्ली प्रदेश के प्रभारी थे.
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