'मुस्लिम, सिख, ईसाई कैसे बोलें ओम'

21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर आयुष मंत्रालय की ओर से जारी एक बुकलेट में योग करते वक्त ‘ओम’ और कुछ संस्कृत श्लोकों का जाप करने के ज़िक्र पर विवाद पैदा हो गया है.
जहां कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को 'असंवेदनशील' बताया है, जनता दल यूनाइटेड ने इसे 'सांप्रदायिक एजेंडा थोपने' की एक और कोशिश बताया है.
कांग्रेस प्रवक्ता पीसी चाको ने कहा, “योग प्राचीन भारत की एक महान धरोहर है. ये भाजपा की जागीर नहीं है. इसे आम लोगों के लिए स्वीकारयोग्य बनाने की ज़रूरत है. शायद ये सरकार इन संवेदनशील मुद्दों को लेकर चिंतित नहीं है.”

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा है, “ये भारतीयों पर सांप्रदायिक एजेंडा लादने की एक और कोशिश है. हम इसका विरोध करते हैं. आप एक मुसलमान, सिख, ईसाई से ‘ओम’ कहने को कैसे कह सकते हैं. मैं हिंदू हूं और मुझे इससे कोई समस्या नहीं है लेकिन आप दूसरे धर्म के लोगों को ऐसा कहने के लिए कैसे कह सकते हैं?”
पिछले हफ़्ते विश्वविद्यालयों को लिखे एक पत्र में यूजीसी के जसपाल एस संधु ने कुलपतियों से कहा था कि वो अपने विश्वविद्यालयों और जुड़े संस्थानों में योग दिवस मनाने पर निजी ध्यान दें.
पत्र में कहा गया था, “मैं आपसे गुज़ारिश करता हूं कि आप विश्व योग दिवस के लिए ऐक्शन प्लान बनाए और इस समारोह में छात्रों और शिक्षकों की विस्तृत हिस्सेदारी को सुनिश्चित करें.”

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इस पत्र के साथ योग पर आयुष मंत्रालय की एक बुकलेट भी भेजी गई है.
इस बुकलेट के अनुसार योग की शुरुआत दो मिनट की उपासना से होती है. उसके बाद छह मिनट की आराधना का ज़िक्र है जिसकी शुुरुआत ‘ओम’ और कुछ संस्कृत श्लोक से होती है. उसके बाद 18 मिनट के योग आसनों और प्राणायाम का ज़िक्र है.
बुकलेट के मुताबिक सहभागी आठ मिनट तक चिंतनशील मुद्रा में बैठेंगे और उसके बाद अंत में ‘शांति पाठ’ होगा.
सरकार और भाजपा ने ज़ोर देकर कहा है कि उसने पिछले साल के मसवदे को जारी रखा है और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.

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पीटीआई के मुताबिक आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “ओम के जाप की कोई आवश्यकता नहीं है.”
पीटीआई के अनुसार भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, “इसकी कोई बाध्यता नहीं है. कुछ लोग योग को धर्म से जोड़ रहे हैं जबकि इसका मक़सद संपूर्ण विकास है. ये अभिमान की बात है कि संयुक्त राष्ट्र योग दिवस मना रहा है और 196 देश इसका अनुसरण कर रहे हैं. कांग्रेस का 'डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट' इस विवाद के पीछे है.”
उधर आरजेडी और सीपीआई एम ने भी मोदी सरकार की आलोचना की है.
आरजेडी के प्रवक्ता मनोज झा ने इसे 'खतरनाक चीज़' बताया और सीपीआईएम नेता वृंदा करात कहती हैं कि सरकार को ‘ओम’ को अनिवार्य करने का कोई अधिकार नहीं है.
पिछले साल भी आयुष मंत्रालय के ऐसे ही सुझाव के बाद मंत्रालय को स्पष्टीकरण देना पड़ा था कि ‘ओम’ का जाप अनिवार्य नहीं है.
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