आख़िर क्यों दम तोड़ रहे हैं बच्चे?

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- Author, आभा शर्मा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
राजस्थान के जमालपुर गाँव की सविता का परिवार उसके बेटे के नामकरण संस्कार की तैयारी कर रहा था.
घर में पहले बच्चे के जन्म से उत्साह का माहौल था. रिश्ते-नातेदारों को न्योता दिया जा रहा था. पर इससे पहले ही बच्चे ने आँख मूंद लीं.
यह नवजात उन नौ शिशुओं में से एक है जिन्होंने अजमेर के जवाहर लाल नेहरु अस्पताल में शनिवार रात से से मंगलवार शाम के बीच दम तोड़ा है.
इनको अजमेर के आसपास के क्षेत्रों से रेफर होने के बाद भर्ती किया गया था.

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इनमे से पांच शिशुओं की मौत तो एक ही रात में हुई थी.
सविता के भाई भीकमचंद ने बीबीसी को बताया कि “जन्म के समय बच्चे का वज़न दो किलो था पर माँ का दूध नहीं ले रहा था. पहले ब्यावर में इलाज करवाया पर तबियत नहीं संभाली तो अजमेर रेफर किया गया. यहाँ भर्ती तो तुरंत कर लिया पर डाक्टरों ने जल्दी संभाला नहीं.”
उन्होंने बच्चों के वार्ड में एयर कंडीशनर सही नहीं होने की भी शिकायत की.

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उधर अस्पताल के कार्यवाहक अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. विक्रांत शर्मा ने कहा कि यह महज इत्तेफाक रहा कि एक ही रात में पांच बच्चों की मौत हो गई. वर्ना ऐसा नहीं है कि कोई भी बच्चे ठीक ही नहीं हो रहे हैं या व्यवस्था की चूक है.
उन्होंने कहा कि अक्सर मरीज़ बहुत गंभीर स्थिति में आते हैं या तब जब बहुत देर हो चुकी होती है.
अजमेर के इस रेफरल अस्पताल में पिछले पांच सालों में 1558 शिशुओं की मौत हुई है.
यूँ राज्य के 33 ज़िलों में 36 सुसज्जित नवजात रोगी शिशु इकाइयाँ हैं.
राजस्थान में शिशु मृत्यु दर 1000 जीवित जन्म पर 47 है और इसी कारण यह मिलेनियम डेवलपमेंट गोल हासिल करने से चूक गया.
नवजात शिशुओं की मौत के बाद सरकार हरकत में आई है.
स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र सिंह राठोड़ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर हालत का जायजा लेने के बाद अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वरिष्ठ डॉक्टर भी रात को ड्यूटी पर तैनात रहेंगे.
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